चाय बेचनी है या जंग लड़नी है? चीनी मिल्क टी कंपनी ने कर्मचारियों को दी 'आर्मी ट्रेनिंग', सोशल मीडिया पर मचा बवाल
नौकरी जॉइन करने से पहले ट्रेनिंग मिलना आम बात है, लेकिन चीन की एक मिल्क टी कंपनी का ट्रेनिंग तरीका वहां के सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. नए कर्मचारियों को अनुशासन और टीमवर्क सिखाने के लिए कंपनी ने आर्मी वाली ट्रेनिंग कराई. कंपनी इसे काम के लिए तैयार करने का तरीका बता रही है, जबकि कई लोग इसे जरूरत से ज्यादा सख्त मानकर सवाल उठा रहे हैं.
नई नौकरी शुरू करने से पहले कर्मचारियों को कंपनी के नियम, काम करने का तरीका और टीम के साथ तालमेल जैसी बातें सिखाई जाती हैं. खासकर मिल्क टी जैसी दुकानों में कर्मचारियों को एक साथ कई काम संभालने पड़ते हैं. इसमें ग्राहकों के ऑर्डर लेना, ड्रिंक तैयार करना, पेमेंट संभालना और भीड़ के समय तेजी से काम करना उनकी रोज की जिम्मेदारी होती है.
लेकिन चीन की एक मशहूर मिल्क टी चेन ने नए कर्मचारियों के लिए जो ट्रेनिंग रखी, उसका अंदाज बाकी कंपनियों से काफी अलग नजर आया. ट्रेनिंग में अनुशासन और टीमवर्क पर जोर दिया गया, मगर इसे कराने के तरीके ने लोगों का ध्यान खींच लिया.
सैनिकों जैसी ट्रेनिंग से चौंके लोग
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नए कर्मचारियों को ट्रेनिंग के दौरान एक तय अनुशासन का पालन करना पड़ा. उन्हें एक साथ रखा गया और टीम के तौर पर अलग-अलग गतिविधियां कराई गईं. कंपनी का कहना है कि इसका मकसद कर्मचारियों में टीम भावना, समय की पाबंदी और जिम्मेदारी की आदत डालना था. हालांकि, ट्रेनिंग से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो चीन के सोशल मीडिया पर सामने आए तो कई लोगों को यह सामान्य कॉरपोरेट ट्रेनिंग से बिल्कुल अलग लगा. कुछ यूजर्स ने इसे सीधे-सीधे सैनिकों जैसी ट्रेनिंग बताया. इसके बाद कंपनी के वर्क कल्चर को लेकर बहस शुरू हो गई.
कंपनी बोली- अनुशासन और टीमवर्क जरूरी
कंपनी की तरफ से इस तरह के कार्यक्रम का मकसद सिर्फ कर्मचारियों पर सख्ती करना नहीं बताया गया है. उसका कहना है कि मिल्क टी स्टोर पर काम करने के दौरान कर्मचारियों को एक टीम की तरह काम करना पड़ता है. एक ग्राहक का ऑर्डर लेने के साथ ही दूसरे कर्मचारी को ड्रिंक तैयार करनी होती है. कोई पेमेंट संभालता है तो किसी को सामान पैक करके ग्राहक तक पहुंचाना होता है. अगर टीम में तालमेल नहीं हो तो छोटी सी दुकान में भी काम का दबाव बढ़ जाता है. कंपनी इसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए ट्रेनिंग के दौरान ग्रुप एक्टिविटी और अनुशासन पर जोर दे रही है. उसका मानना है कि शुरुआत में कर्मचारियों को एक साथ ट्रेन करने से उन्हें आगे काम करने में आसानी हो सकती है.
लेकिन तरीका बना विवाद की वजह
मामला सिर्फ ट्रेनिंग का नहीं है, बल्कि सवाल उसके तरीके को लेकर उठ रहे हैं. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि कर्मचारियों को अनुशासन सिखाना अपनी जगह ठीक है, लेकिन नौकरी के नाम पर किसी व्यक्ति पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालना सही नहीं कहा जा सकता. लोगों का कहना है कि कर्मचारी कोई सैनिक नहीं हैं. वे नौकरी करने के लिए कंपनी में आते हैं और उन्हें काम से जुड़े जरूरी नियम समझाए जा सकते हैं. लेकिन ट्रेनिंग और मानसिक दबाव के बीच एक साफ सीमा होनी चाहिए. अगर किसी कर्मचारी को अपमानित किया जाए, जबरदस्ती कोई काम कराया जाए या उसकी गरिमा को नुकसान पहुंचे, तो मामला सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रह जाता.
कुछ लोगों ने कंपनी का बचाव भी किया
इस विवाद में कंपनी की आलोचना करने वाले लोग ही नहीं हैं. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कंपनी के तरीके का समर्थन भी किया. उनका कहना है कि हर संस्थान की अपनी वर्क कल्चर होती है और कर्मचारियों को शुरुआत से ही उसके हिसाब से तैयार किया जा सकता है. इन लोगों का तर्क है कि सैन्य अंदाज की हर ट्रेनिंग का मतलब कर्मचारियों को परेशान करना नहीं होता. कई बार ऐसे कार्यक्रमों का इस्तेमाल टीमवर्क, टाइम मैनेजमेंट और जिम्मेदारी समझाने के लिए भी किया जाता है. उनका कहना है कि अगर ट्रेनिंग के दौरान किसी कर्मचारी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया जा रहा और उसका मकसद सिर्फ टीम को मजबूत बनाना है, तो इसे तुरंत गलत ठहरा देना भी सही नहीं होगा.
कानूनी पेंच भी हो सकता है
इस पूरे मामले में कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. किसी कंपनी को अपने कर्मचारियों से काम लेने और उन्हें ट्रेनिंग देने का अधिकार जरूर है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है. अगर ट्रेनिंग के नाम पर किसी कर्मचारी को जबरदस्ती अपमानजनक गतिविधि में शामिल किया जाए या उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाए, तो कंपनी के लिए कानूनी मुश्किल खड़ी हो सकती है. इसलिए अनुशासन के नाम पर कर्मचारियों की गरिमा और उनकी सहमति का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग कह रहे हैं कि कंपनी को ट्रेनिंग का मकसद हासिल करने के लिए ऐसे तरीके अपनाने चाहिए, जिनसे कर्मचारियों को सीखने में मदद मिले, न कि उन्हें दबाव महसूस हो.
सोशल मीडिया पर बड़ा सवाल
इस घटना ने सिर्फ एक मिल्क टी कंपनी की ट्रेनिंग को चर्चा में नहीं ला दिया है, बल्कि काम की जगह पर अनुशासन को लेकर बड़ी बहस भी छेड़ दी है. सवाल यह है कि किसी कर्मचारी से बेहतर काम लेने के लिए कंपनी आखिर कितनी सख्ती कर सकती है? एक तरफ कंपनी चाहती है कि कर्मचारी समय पर आएं, नियमों का पालन करें और टीम के साथ मिलकर काम करें. दूसरी तरफ कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक माहौल भी जरूरी है. सोशल मीडिया पर लोगों की राय इसी बात पर बंटी हुई है. कुछ को लगता है कि सख्त ट्रेनिंग से कर्मचारी ज्यादा जिम्मेदार बन सकते हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि अच्छे काम के लिए डर नहीं, बल्कि सही माहौल और बेहतर लीडरशिप जरूरी है.
ट्रेनिंग हो, लेकिन सम्मान के साथ
चीन की इस मिल्क टी कंपनी का मामला फिलहाल इसी वजह से चर्चा में बना हुआ है. कंपनी के मुताबिक, ट्रेनिंग का मकसद कर्मचारियों को अनुशासन और टीमवर्क सिखाना है, लेकिन सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने इसके तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसी भी कंपनी के लिए अच्छी टीम बनाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों का भरोसा और सम्मान बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. आखिरकार ट्रेनिंग का मकसद कर्मचारी को बेहतर बनाना होना चाहिए, उसे छोटा महसूस कराना नहीं. यही वजह है कि चीन का यह मामला अब सिर्फ मिल्क टी कंपनी की ट्रेनिंग नहीं, बल्कि पूरे वर्क कल्चर पर चर्चा का मुद्दा बन गया है.