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घोड़े की रेस और मेले के लिए सरकारी छुट्टी: ऑस्ट्रेलिया में 10 साल रहे भारतीय ने खोला छुट्टियों का राज; सुनकर चौंक जाएंगे आप

भारत में छुट्टी का नाम सुनते ही दिवाली, होली, स्वतंत्रता दिवस या कोई बड़ा त्योहार याद आता है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया में छुट्टी की कहानी थोड़ी अलग है. यहां कुछ जगहों पर घुड़दौड़, मेले, पिकनिक और बड़े आयोजनों के लिए भी पब्लिक हॉलिडे मिल जाता है. ऑस्ट्रेलिया में करीब 10 साल से रह रहे भारतीय आदित्य खनेजा ने एक वीडियो में इसी फर्क को बताया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा में है.

घोड़े की रेस और मेले के लिए सरकारी छुट्टी: ऑस्ट्रेलिया में 10 साल रहे भारतीय ने खोला छुट्टियों का राज; सुनकर चौंक जाएंगे आप
Image Credit: @adityakhaneja | भारतीय ने बताया ऑस्ट्रेलिया का हॉलिडे कल्चर!

विदेश जाकर रहने के बाद सबसे ज्यादा बदलाव अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी में नजर आता है. कब काम करना है, कब आराम करना है और किस मौके पर पूरा शहर छुट्टी के मूड में चला जाता है, ये सब चीजें किसी दूसरे देश को समझने का दिलचस्प तरीका बन जाती हैं.

ऑस्ट्रेलिया में पिछले करीब 10 साल से रह रहे भारतीय आदित्य खनेजा ने भी वहां के हॉलिडे कल्चर को इसी नजरिए से देखा. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया और बताया कि ऑस्ट्रेलिया में पब्लिक हॉलिडे सिर्फ बड़े धार्मिक या राष्ट्रीय मौकों तक सीमित नहीं हैं.

घुड़दौड़ के लिए भी मिल जाती है छुट्टी

आदित्य ने अपने वीडियो में सबसे पहले मेलबर्न कप डे का उदाहरण दिया. मेलबर्न कप ऑस्ट्रेलिया की मशहूर घुड़दौड़ की प्रतियोगिता है और विक्टोरिया में इस दिन पब्लिक हॉलिडे होता है. इसका मतलब जहां एक तरफ भारत में लोग त्योहार के लिए छुट्टी का इंतजार करते हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया में कुछ जगहों पर एक बड़ी घुड़दौड़ भी पूरे इलाके के लिए छुट्टी का कारण बन सकती है. आदित्य ने इसी फर्क को मजेदार अंदाज में लोगों के सामने रखा.

मेले और शो के लिए भी हॉलिडे

बात सिर्फ घुड़दौड़ तक रहे तब भी सही है. आदित्य ने क्वींसलैंड के रॉयल क्वींसलैंड शो का भी जिक्र किया. यह वहां का एक बड़ा शो और स्थानीय आयोजन है, जिसे लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने-फिरने के मौके के तौर पर देखते हैं. इसी तरह उन्होंने डार्विन के पिकनिक डे का उदाहरण दिया. नाम सुनकर ही अंदाजा लग जाता है कि यहां छुट्टी का मूड कितना अलग हो सकता है. आदित्य के अनुसार, इन छुट्टियों के पीछे लोगों को काम से थोड़ा ब्रेक देकर परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने का मौका देना भी एक वजह है.

 

 

खेल पसंद है तो छुट्टी भी मिल सकती है

ऑस्ट्रेलिया में खेल लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा हैं. आदित्य ने एएफएल ग्रैंड फाइनल हॉलिडे का भी उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि इस मौके पर शुक्रवार की छुट्टी मिलने से लोगों को लंबे वीकेंड का मौका मिल जाता है. उनका अंदाज यही था कि अगर किसी बड़े खेल आयोजन को लेकर पूरा शहर उत्साहित है तो उसे देखने, आराम करने और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए छुट्टी भी मिल सकती है. यही चीज भारतीय नजरिए से देखने पर काफी अलग और मजेदार लगती है.

भारत में छुट्टी का मतलब थोड़ा अलग

आदित्य ने ऑस्ट्रेलिया की छुट्टियों की तुलना भारत से भी की. भारत में पब्लिक हॉलिडे की बात हो तो आमतौर पर धार्मिक, राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मौके सबसे पहले याद आते हैं. दिवाली, होली, ईद, क्रिसमस, स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस जैसे मौकों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में छुट्टियां होती हैं. इसके अलावा राज्यों और स्थानीय इलाकों के अपने त्योहार और खास दिन भी होते हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियों का एक हिस्सा स्थानीय परंपराओं, क्षेत्रीय आयोजनों और खेलों से भी जुड़ा हुआ है. यही अंतर आदित्य को खास तौर पर दिलचस्प लगा.

वीकेंड पर पड़ जाए छुट्टी तो क्या?

आदित्य ने वीडियो में ऑस्ट्रेलिया की छुट्टियों से जुड़ी एक और बात का जिक्र किया, जो भारतीयों को काफी दिलचस्प लग सकती है. अगर कोई पब्लिक हॉलिडे शनिवार या रविवार को पड़ता है तो कुछ मामलों में उसके बदले दूसरे दिन छुट्टी मिल सकती है. हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है. ऑस्ट्रेलिया में पब्लिक हॉलिडे के नियम पूरे देश में बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं. अलग-अलग राज्य और क्षेत्र अपने हिसाब से छुट्टियों और उनके बदले मिलने वाले दिनों के नियम तय कर सकते हैं.

'लोगों को लेड-बैक क्यों कहते हैं, अब समझ आया'

आदित्य ने इसी पूरी संस्कृति को अपने मजेदार अंदाज में पेश करते हुए कहा कि अगर लोगों ने कभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को 'लेड-बैक' यानी आराम से रहने वाला कहा है और आपको इसकी वजह समझ नहीं आई, तो शायद वहां का हॉलिडे कल्चर भी इसकी एक वजह हो सकता है. उनकी बात का मतलब यह नहीं था कि ऑस्ट्रेलिया में हर दूसरे दिन छुट्टी रहती है. बल्कि वह यह दिखाना चाहते थे कि वहां छुट्टियों को देखने का नजरिया कई बार भारत से अलग नजर आता है.

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

आदित्य के वीडियो को सोशल मीडिया पर लोगों ने काफी पसंद किया. कई यूजर्स ने उनके बताए उदाहरणों को मजेदार और दिलचस्प बताया. एक यूजर ने सीधे लिखा, 'बहुत सही.' हालांकि, हर किसी ने उनकी बात से पूरी तरह सहमति नहीं जताई. एक यूजर ने बताया कि न्यू साउथ वेल्स में इस तरह की कुछ छुट्टियां नहीं मिलतीं. इससे यह बात भी साफ होती है कि ऑस्ट्रेलिया में पब्लिक हॉलिडे का सिस्टम राज्य और इलाके के हिसाब से बदल सकता है.

छुट्टी सिर्फ काम से भागने का नाम नहीं

आदित्य का वीडियो असल में सिर्फ इस बात की कहानी नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया में किस-किस चीज के लिए छुट्टी मिलती है. इसके पीछे वहां की लाइफस्टाइल की एक झलक भी दिखाई देती है. काम के बीच परिवार के साथ समय बिताना, स्थानीय आयोजन में शामिल होना, खेल देखना या दोस्तों के साथ एक दिन आराम करना भी वहां की छुट्टी की संस्कृति का हिस्सा है. भारत में भी अब कई लोग वीकेंड और छुट्टियों को इसी तरह आराम और परिवार के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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About the Author

Santosh Kumar Mishra

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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