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विदेश जाकर रहने के बाद सबसे ज्यादा बदलाव अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी में नजर आता है. कब काम करना है, कब आराम करना है और किस मौके पर पूरा शहर छुट्टी के मूड में चला जाता है, ये सब चीजें किसी दूसरे देश को समझने का दिलचस्प तरीका बन जाती हैं.
ऑस्ट्रेलिया में पिछले करीब 10 साल से रह रहे भारतीय आदित्य खनेजा ने भी वहां के हॉलिडे कल्चर को इसी नजरिए से देखा. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया और बताया कि ऑस्ट्रेलिया में पब्लिक हॉलिडे सिर्फ बड़े धार्मिक या राष्ट्रीय मौकों तक सीमित नहीं हैं.
आदित्य ने अपने वीडियो में सबसे पहले मेलबर्न कप डे का उदाहरण दिया. मेलबर्न कप ऑस्ट्रेलिया की मशहूर घुड़दौड़ की प्रतियोगिता है और विक्टोरिया में इस दिन पब्लिक हॉलिडे होता है. इसका मतलब जहां एक तरफ भारत में लोग त्योहार के लिए छुट्टी का इंतजार करते हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया में कुछ जगहों पर एक बड़ी घुड़दौड़ भी पूरे इलाके के लिए छुट्टी का कारण बन सकती है. आदित्य ने इसी फर्क को मजेदार अंदाज में लोगों के सामने रखा.
बात सिर्फ घुड़दौड़ तक रहे तब भी सही है. आदित्य ने क्वींसलैंड के रॉयल क्वींसलैंड शो का भी जिक्र किया. यह वहां का एक बड़ा शो और स्थानीय आयोजन है, जिसे लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने-फिरने के मौके के तौर पर देखते हैं. इसी तरह उन्होंने डार्विन के पिकनिक डे का उदाहरण दिया. नाम सुनकर ही अंदाजा लग जाता है कि यहां छुट्टी का मूड कितना अलग हो सकता है. आदित्य के अनुसार, इन छुट्टियों के पीछे लोगों को काम से थोड़ा ब्रेक देकर परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने का मौका देना भी एक वजह है.
ऑस्ट्रेलिया में खेल लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा हैं. आदित्य ने एएफएल ग्रैंड फाइनल हॉलिडे का भी उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि इस मौके पर शुक्रवार की छुट्टी मिलने से लोगों को लंबे वीकेंड का मौका मिल जाता है. उनका अंदाज यही था कि अगर किसी बड़े खेल आयोजन को लेकर पूरा शहर उत्साहित है तो उसे देखने, आराम करने और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए छुट्टी भी मिल सकती है. यही चीज भारतीय नजरिए से देखने पर काफी अलग और मजेदार लगती है.
आदित्य ने ऑस्ट्रेलिया की छुट्टियों की तुलना भारत से भी की. भारत में पब्लिक हॉलिडे की बात हो तो आमतौर पर धार्मिक, राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मौके सबसे पहले याद आते हैं. दिवाली, होली, ईद, क्रिसमस, स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस जैसे मौकों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में छुट्टियां होती हैं. इसके अलावा राज्यों और स्थानीय इलाकों के अपने त्योहार और खास दिन भी होते हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियों का एक हिस्सा स्थानीय परंपराओं, क्षेत्रीय आयोजनों और खेलों से भी जुड़ा हुआ है. यही अंतर आदित्य को खास तौर पर दिलचस्प लगा.
आदित्य ने वीडियो में ऑस्ट्रेलिया की छुट्टियों से जुड़ी एक और बात का जिक्र किया, जो भारतीयों को काफी दिलचस्प लग सकती है. अगर कोई पब्लिक हॉलिडे शनिवार या रविवार को पड़ता है तो कुछ मामलों में उसके बदले दूसरे दिन छुट्टी मिल सकती है. हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है. ऑस्ट्रेलिया में पब्लिक हॉलिडे के नियम पूरे देश में बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं. अलग-अलग राज्य और क्षेत्र अपने हिसाब से छुट्टियों और उनके बदले मिलने वाले दिनों के नियम तय कर सकते हैं.
आदित्य ने इसी पूरी संस्कृति को अपने मजेदार अंदाज में पेश करते हुए कहा कि अगर लोगों ने कभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को 'लेड-बैक' यानी आराम से रहने वाला कहा है और आपको इसकी वजह समझ नहीं आई, तो शायद वहां का हॉलिडे कल्चर भी इसकी एक वजह हो सकता है. उनकी बात का मतलब यह नहीं था कि ऑस्ट्रेलिया में हर दूसरे दिन छुट्टी रहती है. बल्कि वह यह दिखाना चाहते थे कि वहां छुट्टियों को देखने का नजरिया कई बार भारत से अलग नजर आता है.
आदित्य के वीडियो को सोशल मीडिया पर लोगों ने काफी पसंद किया. कई यूजर्स ने उनके बताए उदाहरणों को मजेदार और दिलचस्प बताया. एक यूजर ने सीधे लिखा, 'बहुत सही.' हालांकि, हर किसी ने उनकी बात से पूरी तरह सहमति नहीं जताई. एक यूजर ने बताया कि न्यू साउथ वेल्स में इस तरह की कुछ छुट्टियां नहीं मिलतीं. इससे यह बात भी साफ होती है कि ऑस्ट्रेलिया में पब्लिक हॉलिडे का सिस्टम राज्य और इलाके के हिसाब से बदल सकता है.
आदित्य का वीडियो असल में सिर्फ इस बात की कहानी नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया में किस-किस चीज के लिए छुट्टी मिलती है. इसके पीछे वहां की लाइफस्टाइल की एक झलक भी दिखाई देती है. काम के बीच परिवार के साथ समय बिताना, स्थानीय आयोजन में शामिल होना, खेल देखना या दोस्तों के साथ एक दिन आराम करना भी वहां की छुट्टी की संस्कृति का हिस्सा है. भारत में भी अब कई लोग वीकेंड और छुट्टियों को इसी तरह आराम और परिवार के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं.
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