)
अमेरिका की सड़कों पर अब एक नया नजारा देखने को मिल रहा है. फुटपाथ पर चलते छोटे-छोटे रोबोट, जिनके अंदर किसी का ऑर्डर किया हुआ खाना या दूसरा सामान रखा होता है. ये अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए रास्ता तय करते हैं और लोगों के घरों तक सामान पहुंचाते हैं. लेकिन हर बार इनका सफर आसान नहीं होता.
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में लोग इन डिलीवरी रोबोट के साथ बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं. कोई उन्हें लात मारता है तो कोई उन्हें रोककर परेशान करता है. कुछ वीडियो में लोग रोबोट के ऊपर बैठते और उन्हें नुकसान पहुंचाते दिखाई देते हैं. मशीनें अपना काम करने निकली थीं, लेकिन रास्ते में कुछ लोगों ने उनके साथ ऐसा बर्ताव किया कि मामला चर्चा में आ गया.
डिलीवरी रोबोट के साथ होने वाली इन घटनाओं को लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट में अमेरिका के अलग-अलग शहरों में सामने आए ऐसे मामलों का जिक्र किया गया है. इनमें लॉस एंजिल्स, मियामी और सैक्रामेंटो जैसे शहरों की घटनाएं भी शामिल हैं. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में अलग-अलग रील को जोड़कर दिखाया गया है कि किस तरह कुछ लोग इन मशीनों को परेशान करते हैं. इस वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है. हालांकि, किसी वायरल वीडियो को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका में सभी लोग रोबोट के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं. बहुत से लोग इन मशीनों को रोजाना देखते हैं और बिना किसी परेशानी के अपने रास्ते निकल जाते हैं.
इन घटनाओं के पीछे की वजह हर मामले में एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है. कुछ लोग सिर्फ मजे या शरारत के लिए ऐसा कर सकते हैं. कुछ को फुटपाथ पर चलने वाले रोबोट से परेशानी भी हो सकती है. वहीं, टेक्नोलॉजी के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को लेकर लोगों की चिंताएं भी इस बहस का हिस्सा हैं. दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और ऑटोमेशन का दायरा लगातार बढ़ रहा है. कई कामों में अब मशीनों की मदद ली जा रही है. ऐसे में कुछ लोगों को डर है कि आने वाले समय में रोबोट इंसानों की नौकरियों की जगह ले सकते हैं. लेकिन किसी खास घटना में किसी व्यक्ति ने रोबोट को नुकसान क्यों पहुंचाया, यह जाने बिना उसके पीछे नौकरी जाने का डर ही वजह मानना भी सही नहीं होगा.
अमेरिका में फूड डिलीवरी रोबोट का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है. कई जगह ये रोबोट रेस्तरां, कॉलेज कैंपस और रिहायशी इलाकों में खाना पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इनका मकसद डिलीवरी के काम को आसान बनाना और कुछ स्थितियों में इंसानी कर्मचारियों का काम कम करना है. ये रोबोट सेंसर और कैमरों की मदद से अपने आसपास की चीजों को पहचानते हुए आगे बढ़ते हैं. रास्ते में कोई व्यक्ति या रुकावट आ जाए तो उन्हें उसके हिसाब से चलना होता है. हालांकि, इनकी टेक्नोलॉजी कितनी भी बेहतर हो, सार्वजनिक जगहों पर इनका सुरक्षित इस्तेमाल इस बात पर भी निर्भर करता है कि लोग इनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं.
किसी मशीन को देखकर उसे लात मारना या उस पर चढ़ जाना कुछ लोगों को मजाक लग सकता है, लेकिन इससे नुकसान होने का खतरा रहता है. रोबोट के अंदर रखा खाना खराब हो सकता है, डिलीवरी में देरी हो सकती है और मशीन को ठीक कराने में कंपनी को खर्च उठाना पड़ सकता है. अगर रोबोट को अचानक धक्का दिया जाए या वह पलट जाए तो आसपास मौजूद लोगों को भी चोट लग सकती है. इसके अलावा, ऐसे रोबोट के साथ कोई समस्या हो तो उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय संबंधित कंपनी या स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी देना ज्यादा सही तरीका है. सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक के लिए नियम और लोगों की जिम्मेदारी, दोनों जरूरी हैं.
डिलीवरी रोबोट को लेकर हो रही यह चर्चा एक बड़े सवाल की तरफ भी इशारा करती है. जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में जगह बना रही है, वैसे-वैसे लोगों को उसके साथ तालमेल बैठाना होगा. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर नई मशीन को बिना सवाल किए स्वीकार कर लिया जाए. फुटपाथ पर जगह, पैदल चलने वालों की सुरक्षा और रोबोट के इस्तेमाल से रोजगार पर पड़ने वाले असर जैसे सवालों पर चर्चा जरूरी है. फर्क इतना है कि किसी टेक्नोलॉजी से असहमति जताने और उसे जानबूझकर नुकसान पहुंचाने में बड़ा अंतर है. अगर किसी रोबोट की वजह से रास्ते में परेशानी हो रही है तो उसका समाधान निकालने की जरूरत है, न कि उसे लात मारकर या पलटकर वीडियो बनाने की. फिलहाल, अमेरिका में डिलीवरी रोबोट के साथ बदसलूकी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.