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कमाई के हिसाब से फीस, जेब खाली तो इलाज मुफ्त: 81 साल के डॉक्टर का अनोखा क्लिनिक, गरीबों के लिए बने मसीहा

अहमदाबाद के 81 साल के ENT सर्जन डॉ. नंदलाल मनसेटा ने इलाज और फीस को लेकर ऐसा तरीका अपनाया है, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है. उनके क्लिनिक में मरीज की कमाई के हिसाब से फीस तय होती है. महीने में 1,000 रुपये कमाने वाला सिर्फ 10 रुपये देता है, जबकि 1 लाख रुपये कमाने वाले की फीस 1,000 रुपये है. जिसकी कमाई शून्य है, उससे कोई फीस नहीं ली जाती.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Sep 25, 2026, 01:17 PM IST | Updated: Sep 25, 2026, 01:23 PM IST
Image Credit: @thebetterindia
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आमतौर पर अस्पताल या क्लिनिक में डॉक्टर की फीस पहले से तय होती है. मरीज की जेब में कितने पैसे हैं, इससे फीस पर कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन अहमदाबाद के डॉ. नंदलाल मनसेटा ने इस आम सिस्टम को अपने तरीके से बदल दिया है.

81 साल की उम्र में भी वह मरीजों का इलाज कर रहे हैं और उनकी कोशिश है कि पैसों की कमी किसी जरूरतमंद को डॉक्टर तक पहुंचने से न रोके. उनके क्लिनिक में फीस का फैसला बीमारी या इलाज की जटिलता से ज्यादा मरीज की कमाई के आधार पर होता है. इसके लिए बाकायदा उनके क्लिनिक के बाहर रेट का बोर्ड लगा हुआ है.

1,000 की कमाई तो सिर्फ 10 रुपये फीस

डॉ. मनसेटा के क्लिनिक में फीस का नियम सुनने में जितना आसान है, उतना ही दिलचस्प भी. अगर कोई मरीज महीने में 1,000 रुपये कमाता है तो उसे इलाज के लिए सिर्फ 10 रुपये देने होते हैं. इसी तरह 10,000 रुपये महीने कमाने वाले मरीज से 100 रुपये फीस ली जाती है. अगर किसी की महीने की कमाई 1 लाख रुपये है तो उसकी फीस 1,000 रुपये होगी. मतलब उनकी फीस का सीधा हिसाब मरीज की कमाई से जुड़ा है. इस सिस्टम में किसी तरह का लंबा हिसाब-किताब या मोलभाव नहीं है. मरीज अपनी कमाई बताता है और उसी के हिसाब से फीस तय हो जाती है.

कमाई जीरो तो इलाज भी फ्री

इसकी सबसे खास बात उन लोगों के लिए है, जिनके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है. डॉ. मनसेटा के यहां अगर किसी मरीज की कमाई शून्य है तो उससे कोई फीस नहीं ली जाती. मरीज इलाज कराने के बाद अपनी क्षमता के हिसाब से क्लिनिक में रखे एक छोटे से डोनेशन बॉक्स में पैसे डाल सकता है. लेकिन यह उसकी मजबूरी नहीं है. जिसके पास पैसे नहीं हैं, उसके लिए इलाज का दरवाजा बिना किसी फीस के खुला है.

 

 

न सर्टिफिकेट, न कागजों की जांच

इस व्यवस्था को और खास बनाता है डॉक्टर का अपने मरीजों पर किया गया भरोसा. आम तौर पर किसी आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को मुफ्त या कम फीस में इलाज देने के लिए उसकी इनकम से जुड़े कागजात मांगे जा सकते हैं. लेकिन डॉ. मनसेटा के यहां ऐसा नहीं बताया गया है. वह मरीज की बात पर भरोसा करते हैं. इसके लिए इनकम सर्टिफिकेट या दूसरे कागज दिखाने की जरूरत नहीं होती. यानी डॉक्टर ने इस सिस्टम को कागजों से ज्यादा इंसान की ईमानदारी पर रखा है.

कहते हैं- समाज का कर्ज चुकाना है

डॉ. मनसेटा के इस फैसले के पीछे सिर्फ गरीब मरीजों की मदद करने की इच्छा नहीं, बल्कि उनकी अपनी सोच भी है. उनका मानना है कि जिंदगी में उन्हें जो कुछ मिला है, उसमें समाज और सरकार का भी योगदान रहा है. इसी वजह से वह मानते हैं कि अब समाज के लिए कुछ करने की बारी उनकी है. उनके लिए मरीज का इलाज सिर्फ एक मेडिकल प्रोफेशन नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है. यही सोच शायद वजह है कि 81 साल की उम्र में भी उन्होंने मरीजों से दूरी नहीं बनाई है.

डॉक्टर ने सेवा को चुना अपना रास्ता

उम्र बढ़ने के साथ आमतौर पर लोग काम की रफ्तार कम कर देते हैं. आराम को प्राथमिकता मिलने लगती है. लेकिन डॉ. मनसेटा की कहानी कुछ अलग है. ईएनटी सर्जन के तौर पर लंबे समय तक काम करने के बाद भी उनका मरीजों से जुड़ाव बना हुआ है. उनके क्लिनिक का फीस मॉडल बताता है कि वह इलाज को सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं मानते. खासकर ऐसे मरीजों के लिए यह व्यवस्था बड़ी राहत हो सकती है, जिनके लिए डॉक्टर की फीस ही इलाज के रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन बन जाती है.

सोशल मीडिया पर लोग कर रहे सलाम

डॉ. मनसेटा की कहानी इंटरनेट पर तब चर्चा में आई, जब 'द बेटर इंडिया' ने उनके बारे में जानकारी शेयर की. इसके बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनके काम की तारीफ की. किसी ने उन्हें गरीबों का मसीहा बताया तो किसी ने कहा कि सबसे खास बात यह है कि डॉक्टर मरीजों से उनकी आर्थिक स्थिति साबित करने के लिए कागज नहीं मांगते. कई लोगों ने इस भरोसे को ही उनके काम की सबसे बड़ी खूबसूरती बताया. सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं में डॉक्टर के काम को लेकर सम्मान और भावुकता दोनों नजर आई.

हजारों जरूरतमंदों की मदद का दावा

सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी में यह भी दावा किया गया है कि डॉ. मनसेटा फाउंडेशन ने अब तक हजारों जरूरतमंद मरीजों की सर्जरी का पूरा खर्च उठाने में मदद की है. अगर कोई मरीज इलाज का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है तो उसके लिए इस तरह की मदद बेहद अहम हो जाती है. हालांकि, ऐसे आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है, लेकिन डॉक्टर की फीस का यह मॉडल अपने आप में लोगों का ध्यान खींचने के लिए काफी है.

Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी फैसले से पहले संबंधित आधिकारिक विभाग से संपर्क जरूर करें.

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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