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चूल्हे से बनेगी बर्फ: इस शख्स ने फ्रिज ठंडा करने के लिए नीचे जला दी आग, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

क्या आग से कोई चीज ठंडी हो सकती है? यूट्यूबर Greenhill Forge ने बिना बिजली के चलने वाला ऐसा अनोखा फ्रिज बनाया है जो आग, पानी और नमक की मदद से कूलिंग करता है. जानिए कैसे काम करती है यह गजब की टेक्नोलॉजी.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Oct 23, 2026, 07:28 AM IST | Updated: Oct 23, 2026, 07:30 AM IST
Image Credit: यूट्यूबर Greenhill Forge ने बिना बिजली के चलने वाला ऐसा अनोखा फ्रिज बनाया है.
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जब भी हमें किसी चीज को ठंडा रखना होता है या पानी की बोतल जमानी होती है तो आग का खयाल सबसे आखिर में आता है. आग का नाम सुनते ही गर्मी याद आती है, ठंडक नहीं. लेकिन 'Greenhill Forge' नाम के एक DIY क्रिएटर ने एक ऐसा एक्सपेरिमेंटल फ्रिज तैयार किया है जो बिजली के हैवी कंप्रेसर के बिना, सिर्फ आग, पानी और नमक की मदद से चीजों को ठंडा करता है. यह सुनकर कोई भी हैरान हो सकता है, लेकिन इसके पीछे की साइंस बहुत पुरानी और सॉलिड है. आइए समझते हैं कि आखिर यह आग से ठंडा होने वाला फ्रिज कैसे काम करता है और क्या यह आपके बिजली के बिल को सच में जीरो कर सकता है.

क्या है यह आग और नमक वाला फ्रिज?
आजकल मार्केट में जितने भी फ्रिज आते हैं, वे सब बिजली से चलने वाले हैवी कंप्रेसर पर काम करते हैं. लेकिन 'Greenhill Forge' ने एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया है जो पूरी तरह से अलग लॉजिक पर चलता है. उनके YouTube वीडियो में देखा जा सकता है कि उन्होंने एक ऐसा मेटल सेटअप बनाया है जिसके नीचे आग जलाने पर अंदर का तापमान अचानक गिरने लगता है. जब बाहर का तापमान 16 डिग्री सेल्सियस था, तब इस सेटअप ने अंदर के हिस्से को 5 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर दिया. यानी आग की गर्मी से अंदर की चीजों को अच्छी खासी ठंडक मिल गई. हालांकि यह अभी एक शुरुआती एक्सपेरिमेंट है, फिर भी यह देखने में किसी जादू से कम नहीं लगता.

आग और नमक मिलकर कूलिंग कैसे करते हैं?
पहली नजर में यह जादू लग सकता है, लेकिन इसके पीछे 'एब्जॉर्प्शन रेफ्रिजरेशन' नाम की एक पुरानी और पक्की इंजीनियरिंग तकनीक है. यह तरीका 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. इसमें कंप्रेसर की जगह केमिकल प्रोसेस और हीट (गर्मी) का यूज किया जाता है.

इस सिस्टम के दो मेन पार्ट्स हैं: पहला जेनेरेटर और दूसरा एब्जॉर्बर.

पानी का वाष्पीकरण: जेनेरेटर के अंदर कैल्शियम क्लोराइड और डिस्टिल्ड वॉटर का घोल भरा होता है. जब नीचे आग जलाई जाती है, तो पानी भाप बनकर अलग होता है और पाइप के जरिए कंडेनसर में चला जाता है, जहां यह ठंडा होकर वापस लिक्विड बन जाता है.

वैक्यूम का कमाल: यह लिक्विड पानी एक छोटे वाल्व से होकर इवेपोरेटर में जाता है, जहां का प्रेशर वैक्यूम पम्प की वजह से बहुत कम (लगभग 6 millibars) रखा जाता है. इतने कम प्रेशर पर पानी बहुत ही कम तापमान पर उबलने और भाप बनने लगता है. जब पानी भाप बनता है, तो वह आसपास की पूरी गर्मी खींच लेता है और वहां बर्फ जैसी ठंडक पैदा हो जाती है.

नमक का रोल: अब दिक्कत यह आती है कि जैसे-जैसे भाप जमा होगी, प्रेशर बढ़ेगा और कूलिंग रुक जाएगी. यहीं पर काम आता है नमक (कैल्शियम क्लोराइड). सिस्टम एब्जॉर्बर में गाढ़ा नमक का घोल स्प्रे करता है जो उस भाप को सोख लेता है. इस तरह वैक्यूम बना रहता है और आग की मदद से लगातार कूलिंग होती रहती है.

इसमें Arduino और सेंसर्स का क्या काम है?
यह प्रोजेक्ट सिर्फ पाइप जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मेटलवर्किंग और कोडिंग का भी एक बड़ा कॉम्बिनेशन है. क्रिएटर ने इसे स्टेनलेस स्टील की शीट्स और ट्यूब्स को वेल्ड करके बनाया है. कूलिंग कॉइल्स को सही शेप देने के लिए उन्होंने पाइप के अंदर पानी भरकर उसे जमाया और फिर मोड़ा, ताकि पाइप चपटा न हो.

पूरे सिस्टम में प्रेशर और टेम्परेचर का सही बैलेंस बनाए रखने के लिए उन्होंने एक 'Arduino' बेस्ड कंट्रोलर लगाया है. यह कंट्रोलर लगातार प्रेशर चेक करता रहता है, पंप की स्पीड एडजस्ट करता है और अगर कुछ गड़बड़ हो तो अलार्म बजा देता है.

क्या यह फ्रिज 100% बिना बिजली का है?
यहां एक छोटा सा कैच है. यह फ्रिज पूरी तरह से बिजली-फ्री नहीं है. इसके अंदर पानी के घोल को घुमाने वाले पंप और कूलिंग फैन्स चलाने के लिए थोड़ी सी बिजली की जरूरत पड़ती है. ये पंप्स लगभग 30 से 50 वॉट बिजली यूज करते हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि इतनी कम बिजली किसी छोटे सोलर पैनल या नॉर्मल बैटरी से आसानी से दी जा सकती है. यानी भारी-भरकम बिजली का बिल देने या मेन ग्रिड की लाइट पर डिपेंड रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

क्या यह घर के नॉर्मल फ्रिज को रिप्लेस कर सकता है?
फिलहाल यह सिस्टम एक शुरुआती एक्सपेरिमेंट (Prototype) है. टेस्ट के दौरान इसने 16°C के नॉर्मल मौसम में अंदर 5°C की कूलिंग दी, जो कि काफी बढ़िया है. लेकिन 40°C या 45°C जैसी कड़कड़ाती गर्मी में यह कैसा परफॉर्म करेगा, कितने खाने को ठंडा रख पाएगा और लंबे टाइम तक सेफ टेम्परेचर मेंटेन कर पाएगा या नहीं, इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है.

ऑफ-ग्रिड लाइफ और दूर-दराज के इलाकों के लिए वरदान
भले ही यह आपके किचन के चमचमाते फ्रिज की जगह तुरंत न ले पाए, लेकिन इसका असली यूज उन जगहों पर हो सकता है जहां बिजली की भारी किल्लत है. ऐसे गांव, दूर-दराज के कैंपिंग स्पॉट्स, जंगल के केबिन या रिमोट वर्कशॉप्स जहां बिजली का खंभा नहीं है, वहां लकड़ी या आग की मदद से दवाइयां और खाने-पीने की चीजें ठंडी रखी जा सकती हैं. DIY कल्चर और ऑफ-ग्रिड लिविंग पसंद करने वाले यूथ के लिए यह प्रोजेक्ट एक बहुत बड़ा इंस्पिरेशन है.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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