700% का तूफानी उछाल और फिर सीधे 50% का क्रैश! आखिर क्यों डूबे चीन के AI वाले शेयर्स? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी
700% की तेजी के बाद चीन के AI स्टॉक्स 50% तक गिर गए हैं. $480 बिलियन स्वाहा हो चुके हैं. जानिए चीन के टेक मार्केट में मचे इस हाहाकार की असली वजह.
जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर के दम पर चीन दुनिया पर राज करने के सपने देख रहा था, उसी टेक सेक्टर के गुब्बारे की हवा निकल गई है. देखते ही देखते निवेशकों के करीब 480 अरब डॉलर (लगभग 40 लाख करोड़ रुपये) स्वाहा हो चुके हैं. आखिर ऐसा क्या हो गया कि कल तक जिस AI क्रांति की मिसालें दी जा रही थीं, आज उसी के स्टॉक्स ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं? क्या यह सिर्फ एक छोटा सा करेक्शन है या फिर AI का बबल पूरी तरह फूट चुका है? आइए समझते हैं...
700% की रॉकेट स्पीड और फिर सीधे पाताल में लैंडिंग
कहानी शुरू होती है उन कंपनियों से जो कल तक दलाल स्ट्रीट (चीन के मार्केट) की चहेती थीं. जब ये कंपनियां मार्केट में लिस्ट हुई थीं, तो ऐसा लग रहा था कि इनके पास कोई जादुई छड़ी है. लिस्टिंग के दिन ही सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनी MetaX के शेयर ने 700% की तूफानी बढ़त दर्ज की. वहीं मूर थ्रेड्स का शेयर 400% तक उछल गया.
रोबोटिक्स बनाने वाली कंपनी Unitree का तो ऐसा क्रेज था कि इसके IPO के लिए जितने शेयर उपलब्ध थे, उससे 8,000 गुना ज्यादा डिमांड आ गई थी. लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी. जुलाई-अगस्त के अपने पीक से ये सभी शेयर्स 50% से लेकर 60% तक टूट चुके हैं. जिन लोगों ने तेजी के दौर में इनमें पैसा लगाया था, आज वे अपना सिर पकड़कर बैठे हैं.
480 अरब डॉलर स्वाहा: STAR50 इंडेक्स में भारी तबाही
गिरावट का यह कांटा सिर्फ दो-चार कंपनियों तक सीमित नहीं है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के टेक और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स को ट्रैक करने वाला STAR50 इंडेक्स पिछले साढे तीन महीनों में करीब 40% तक नीचे आ चुका है. इस एक ही इंडेक्स से करीब 480 बिलियन डॉलर का मार्केट कैप साफ हो गया.
सिर्फ टेक ही नहीं, बल्कि चीन का मेन सूचकांक CSI 300 भी अपने जून के हाई से 20% तक नीचे आ चुका है. इसका सीधा मतलब यह है कि डर अब सिर्फ टेक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे चाइनीज मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है.
जब कागजी बढ़त पर लगा हकीकत का ताला
अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह गिरावट हुई क्यों? इसकी सबसे बड़ी वजह है वैल्यूएशन का बहुत ज्यादा बढ़ जाना. गिरावट से पहले STAR50 इंडेक्स का Price-to-Earnings रेशियो 250 तक पहुंच गया था. क्रैश के बाद भी यह 100 के आसपास ट्रेड कर रहा है. तुलना के लिए अमरीका के टेक इंडेक्स Nasdaq 100 का Price-to-Earnings रेशियो लगभग 30 है.
अमरीकी पाबंदियां और एक्सपोर्ट का डर
चीन की टेक कंपनियों के लिए दूसरी सबसे बड़ी मुसीबत अमरीका की तरफ से आ रही पाबंदियां हैं. अमरीका लगातार ऐसे कड़े कदम उठा रहा है जिससे चीन तक एडवांस चिप्स और AI टेक्नोलॉजी न पहुंच सके. हाल ही में ऐसी खबरें आईं कि अमरीकी अथॉरिटीज चीन की कुछ प्रमुख ऑप्टिकल कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों पर रोक लगाने की तैयारी में हैं, ताकि वे अमरीकी डेटा सेंटर्स को अपने प्रोडक्ट्स न बेच सकें.
Zhongji Innolight और Eoptolink जैसी कंपनियां (जो ऑप्टिकल कंपोनेंट्स बनाती हैं) अपने पीक से 60% तक टूट चुकी हैं. इस एक्सपोर्ट बैन के खतरे ने निवेशकों के मन में यह डर बैठा दिया है कि आने वाले दिनों में इन कंपनियों की सेल्स पर ब्रेक लग सकता है.
खुद की सरकार के जाल में उलझे इन्वेस्टर्स
चीन की सरकार लंबे समय से कह रही है कि देश को टेक के मामले में सेल्फ-रिलायंट बनना है. सरकार ने खुद कई AI और रोबोटिक्स कंपनियों में सीधा पैसा लगाया. जब रिटेल इन्वेस्टर्स ने देखा कि सरकार खुद Unitree जैसी कंपनियों में पैसा लगा रही है, तो उन्हें लगा कि यह पूरी तरह से सेफ बेट है. छोटे-मोटे निवेशकों ने बिना कंपनियों के फंडामेंटल्स देखे अंधाधुंध पैसा लगाना शुरू कर दिया. लेकिन जब मार्केट में गिरावट शुरू हुई, तो स्टेट फंड्स भी इसे संभाल नहीं पाए.
चीन की सरकार चाहती है कि लोग अपना पैसा शेयर बाजार में लगाएं ताकि AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों को फंडिंग मिले. लेकिन इस तरह के क्रैश से रिटेल इन्वेस्टर्स का भरोसा बुरी तरह टूट गया है. अब वे टेक स्टॉक्स से दूर भाग रहे हैं और सुरक्षित एसेट्स की तरफ रुख कर रहे हैं.
क्या AI का बिजनेस मॉडल ही फ्लॉप है?
इस क्रैश ने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या AI कंपनियां जितना पैसा पानी की तरह बहा रही हैं, उतना बिजनेस निकाल पाएंगी? AI मॉडल को ट्रेन करना, डेटा सेंटर बनाना और सुपरकंप्यूटर चलाना बेहद खर्चीला काम है. इसमें अरबों डॉलर की लागत आती है. लेकिन इस लागत के मुकाबले रेवेन्यू या मुनाफा उतना नहीं आ रहा है. चीन की डोमेस्टिक मार्केट में भी कंपनियों के बीच प्राइस वॉर शुरू हो गया है. ग्राहक खींचने के लिए कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स सस्ते दामों पर बेच रही हैं, जिससे उनका मार्जिन पूरी तरह खत्म हो रहा है.