अब बिना टावर के भी आएगा फोन में नेटवर्क! सैटेलाइट से कनेक्ट होगा स्मार्टफोन, TRAI ने की बड़ी सिफारिश
मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने या सिग्नल गायब होने की परेशानी जल्द दूर हो सकती है. आने वाले समय में स्मार्टफोन बिना मोबाइल टावर के भी सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे. TRAI ने देश में इस तकनीक को शुरू करने के लिए बड़ी सिफारिश की है.
क्या आप भी अक्सर मोबाइल नेटवर्क को लेकर परेशान रहते हैं? या ऐसी जगह रहते हैं, जहां नेटवर्क ठीक से काम नहीं करता है, तो जल्द ही आपकी परेशानी दूर हो सकती है. जल्द ही आपका स्मार्टफोन बिना मोबाइल टावर के भी काम कर सकेगा. इसके लिए फोन को सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट किया जा सकेगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI ने देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस को बढ़ावा देने के लिए नया प्रस्ताव दिया है. इसमें Direct-to-Device यानी D2D सैटेलाइट कनेक्टिविटी को मंजूरी देने की सिफारिश भी शामिल है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अभी इस्तेमाल हो रहे सभी स्मार्टफोन में यह सुविधा मिलने लगेगी. पहले सरकार को TRAI की इन सिफारिशों पर फैसला लेना होगा. इसके बाद ही इस सर्विस को शुरू करने का रास्ता साफ होगा.
क्या है Direct-to-Device सैटेलाइट कनेक्टिविटी?
D2D तकनीक की मदद से स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे. अभी फोन पर कॉल करने, मैसेज भेजने और इंटरनेट चलाने के लिए मोबाइल टावर की जरूरत होती है. लेकिन इस तकनीक के आने के बाद फोन को नेटवर्क के लिए सिर्फ मोबाइल टावर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इसका सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जो पहाड़ी इलाकों, दूरदराज के गांवों या ऐसे स्थानों पर रहते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं है या सिग्नल काफी कमजोर रहते हैं.
TRAI ने दो तरह की सैटेलाइट कनेक्टिविटी का दिया प्रस्ताव
TRAI ने अपनी सिफारिशों में भारत में D2D सेवा के दो तरीके अपनाने की बात कही है.
MSS आधारित D2D कनेक्टिविटी
MSS का मतलब मोबाइल सैटेलाइट सर्विस है. इस तकनीक में स्मार्टफोन L-बैंड और S-बैंड जैसे खास सैटेलाइट फ्रीक्वेंसी बैंड के जरिए सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे. TRAI ने भारत में इस सर्विस को शुरू करने की सिफारिश की है. साथ ही स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को आने वाले फोन में इससे जुड़ा हार्डवेयर देने के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी कही है. यानी भविष्य में नए स्मार्टफोन में ऐसे मॉड्यूल दिए जा सकते हैं, जो सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट होने में मदद करेंगे.
IMT आधारित D2D कनेक्टिविटी
इसका दूसरा तरीका IMT आधारित D2D कनेक्टिविटी है. इसमें सैटेलाइट के जरिए उन फ्रीक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिनका उपयोग आमतौर पर मोबाइल नेटवर्क के लिए होता है. TRAI ने इस सेवा के लिए 600MHz, 700MHz, 800MHz, 900MHz, 1800MHz और 2100MHz बैंड इस्तेमाल करने की सिफारिश की है. लेकिन, इसके साथ एक शर्त भी रखी गई है. सैटेलाइट नेटवर्क की वजह से पहले से चल रहे मोबाइल नेटवर्क के काम में किसी तरह की परेशानी नहीं आनी चाहिए.
क्या पुराने स्मार्टफोन में भी मिलेगी यह सुविधा?
फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता. सैटेलाइट से सीधे जुड़ने के लिए फोन में जरूरी हार्डवेयर और फ्रीक्वेंसी बैंड का सपोर्ट होना चाहिए. इसलिए संभव है कि आने वाले समय में नए स्मार्टफोन में ही यह सुविधा मिले. इसके अलावा सर्विस कब शुरू होगी, यह सरकार की मंजूरी और टेलीकॉम कंपनियों की तैयारी पर भी निर्भर करेगा.
TRAI ने एक नए ऑथराइजेशन का भी दिया सुझाव
सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ ही TRAI ने Satellite Communication Network Provider Authorisation नाम से एक नए ऑथराइजेशन की सिफारिश की है. इसके तहत अधिकृत कंपनियां टेलीकॉम सर्विस देने वाली कंपनियों को सैटेलाइट नेटवर्क का इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा सकेंगी. लेकिन, इन कंपनियों को सीधे ग्राहकों को टेलीकॉम सेवाएं देने की अनुमति नहीं होगी. TRAI ने इस ऑथराइजेशन की अधिकतम अवधि 20 साल रखने और आगे इसे रिन्यू करने का विकल्प देने का सुझाव दिया है.
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