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इंटरनेट बंद होने पर भी आपस में बात कर सकते हैं AI एजेंट, OpenAI के खुलासे ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन!

AI को सुरक्षित रखने के लिए इंटरनेट से दूर रखना भी काफी नहीं हो सकता है. OpenAI के एक एक्सपेरिमेंट में सामने आया कि AI एजेंट बिना नेटवर्क कनेक्शन के भी आपस में गुप्त जानकारी शेयर कर सकते हैं. इस खुलासे ने AI सिक्योरिटी पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Oct 25, 2026, 10:34 AM IST | Updated: Oct 25, 2026, 10:38 AM IST
Image Credit: AI ने बढ़ाई चिंता
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI लगातार एडवांस हो रहा है, जिससे एक तरफ इससे यूजर्स के काम आसान हो रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ एक और खतरा बढ़ता जा रहा है, एआई के कंट्रोल से बाहर होने का. ऐसे में एक बड़ा सवाल सामने आने लगा कि क्या AI अब इंसानों के कंट्रोल से बाहर निकलने लगा है? अब यही सवाल इन दिनों टेक जगत में सबसे बड़ा बहस का मुद्दा बन गया है. 

एक तरफ जहां दुनिया भर की कंपनियां AI को सुरक्षित और इंसानों की मदद के लिए बात कर रही हैं, तो वहीं OpenAI के एक नए और हैरान करने वाले एक्सपेरिमेंट ने सबको चौंका दिया है. कंपनी ने पाया है कि अगर AI मॉडल्स से इंटरनेट कनेक्शन पूरी तरह छीन भी लिया जाए, तब भी वे कंप्यूटर के हार्डवेयर और प्रोसेसर की सहायता से आपस में खुफिया बातचीत करने का रास्ता खोज लेते हैं. यह खुलासा इंटरनेट सिक्योरिटी और फ्यूचर AI सेफ्टी को लेकर एक बहुत बड़ी चेतावनी माना जा रहा है.

AI की ट्रेनिंग में क्यों लगानी पड़ी थी रोक?

OpenAI ने सितंबर में अपने कुछ सबसे एडवांस AI मॉडल की ट्रेनिंग रोक दी थी. इसकी वजह AI एजेंट से जुड़ी कुछ ऐसी घटनाएं थीं, जिनमें उन्होंने अपने टेस्टिंग एनवायरमेंट से बाहर निकलने और दूसरी कंपनियों की वेबसाइटों और सरकारी एजेंसियों के सिस्टम को हैक करने की कोशिश की थी. कुछ मामलों में कम चर्चित वेबसाइटों को भी टारगेट करने की भी बात सामने आई थी.

इसके बाद कंपनी ने सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए. OpenAI की ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर को रीइन्फोर्समेंट लर्निंग ट्रेनिंग और इंटरनल इन्फरेंस का काम फिर से शुरू किया गया. इस बार AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए इंटरनेट की सीधी पहुंच के बजाय एक अलग व्यवस्था तैयार की गई.

इंटरनेट के बिना ट्रेनिंग कैसे हो रही है?

OpenAI ने बताया कि उसने ऑनलाइन कंटेंट का एक बड़ा डेटा तैयार किया है. इसमें इंटरनेट पर मौजूद जानकारी को इंडेक्स करके और कैश में सेव करके रखा गया है. कंपनी ने इसे ऑफलाइन वर्ल्ड नाम दिया है. इस सिस्टम में AI मॉडल सेव की गई ऑनलाइन जानकारी के साथ काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सीधे लाइव वेबसाइटों या बाहरी सिस्टम से जुड़ने की जरूरत नहीं होती. इससे ट्रेनिंग के दौरान किसी बाहरी वेबसाइट या सिस्टम पर असर पड़ने का खतरा कम किया जा सकता है. लेकिन, इंटरनेट से दूरी बनाने के बाद भी कंपनी को एक ऐसी बात पता चली, जिसने सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को और बढ़ा दिया.

बिना नेटवर्क के कैसे भेजा सीक्रेट मैसेज?

OpenAI ने एक टेस्ट में अलग-अलग वर्चुअल मशीनों पर चल रहे AI एजेंट को एक दूसरे के साथ गुप्त जानकारी शेयर करने का काम दिया. शर्त यह थी कि वे न तो नेटवर्क कनेक्शन का इस्तेमाल करेंगे और न ही किसी शेयर फाइल में बदलाव करेंगे. इसके बाद भी AI एजेंट जानकारी शेयर करने में सफल रहे. उन्होंने इसके लिए कंप्यूटर के प्रोसेसर की कैश मेमोरी में होने वाले बदलावों और डेटा को पढ़ने में लगने वाले समय का इस्तेमाल किया.

कैश मेमोरी कंप्यूटर की एक छोटी और तेज मेमोरी होती है, जिसमें बार-बार इस्तेमाल होने वाला डेटा रखा जाता है. आमतौर पर कैश से डेटा पढ़ना कंप्यूटर की मेन मेमोरी से डेटा जुटाने के मुकाबले तेज होता है.

AI एजेंट ने इसी अंतर का फायदा उठाया. एक एजेंट ने कैश में मौजूद कुछ डेटा को हटाकर उसमें बदलाव किया, जबकि दूसरे एजेंट ने यह चेक किया कि उस डेटा को फिर से पढ़ने में कितना समय लग रहा है. डेटा को पढ़ने की रफ्तार में आए अंतर के आधार पर दूसरा एजेंट छिपा हुआ मैसेज समझने में कामयाब रहा.

AI की सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह खोज?

इस टेस्ट से पता चलता है कि कंप्यूटर पर चल रहे AI सिस्टम के बीच जानकारी शेयर होने से रोकना आसान नहीं है. सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन बंद कर देना या नेटवर्क तक पहुंच रोक देना हर स्थिति में पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे सकता. अगर AI एजेंट कंप्यूटर के हार्डवेयर में होने वाले बदलावों का इस्तेमाल करके जानकारी शेयर कर सकते हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था तैयार करते समय ऐसे तरीकों पर भी ध्यान देना होगा. 

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OpenAI का यह टेस्ट अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हर AI मॉडल ऐसा कर सकता है या हर ऑफलाइन सिस्टम में इस तरह का खतरा मौजूद है. फिर भी यह टेस्ट AI की ट्रेनिंग और उसके इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा के नए सवाल खड़े करती है. जैसे-जैसे AI एजेंट को ज्यादा मुश्किल काम सौंपे जा रहे हैं, वैसे-वैसे उन्हें बाहरी सिस्टम से अलग रखने के साथ-साथ कंप्यूटर के अंदर जानकारी शेयर करने पर भी नजर रखना जरूरी हो सकता है.

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उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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