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अगर आपने 2000 के शुरुआती सालों में इंटरनेट चलाना शुरू किया था, तो ऑर्कुट का नाम सुनते ही चेहरे पर एक अलग ही स्माइल आ जाती है. वो जमाना ही कुछ ऐसा था जब इंटरनेट का मतलब सिर्फ चैट करना, स्क्रैपबुक में मैसेज भेजना और दोस्तों की प्रोफाइल पर जाकर टेस्टीमोनियल लिखना होता था.
फिर धीरे-धीरे फेसबुक और इंस्टाग्राम का दौर आया और हमारा पुराना ऑर्कुट कहीं पीछे छूट गया. लेकिन अब टेक की दुनिया से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है. ऑर्कुट के फाउंडर ओर्कुट बुयुक्कोक्टेन एक बार फिर से इस प्लेटफॉर्म को नए अंदाज में वापस लाने की तैयारी कर रहे हैं.
फाउंडर ने मांगी लोगों से मदद
हाल ही में ऑर्कुट के क्रिएटर ने एक्स पर एक दिल छू लेने वाली पोस्ट शेयर की. उन्होंने इंटरनेट की जनता से अपील की है कि वे इस पुराने प्लेटफॉर्म को दोबारा खड़ा करने में उनका साथ दें. उनका मानना है कि इंटरनेट का असली मकसद लोगों को आपस में जोड़ना और सच्ची कम्युनिटी बनाना होना चाहिए. उन्होंने लोगों से कहा है कि वे आधिकारिक वेबसाइट orkut.com पर जाएं, अपना नाम दर्ज करें और अपना सपोर्ट कार्ड दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि इस मुहीम को आगे बढ़ाया जा सके.
The internet should help us find our people. Friendship. Community. A place to belong. Help me bring Orkut back in that spirit. Add your name at https://t.co/FO48fJMjEq and share your supporter card with someone you want to bring along. Love, Orkut https://t.co/zesE18Y3Fd
— Orkut Buyukkokten (@orkut) October 8, 2026
आज के सोशल मीडिया से क्यों परेशान हैं फाउंडर
वेबसाइट पर लिखे अपने एक खुले खत में ऑर्कुट के फाउंडर ने आज के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जमकर भड़ास निकाली है. उनका कहना है कि पिछले 20 सालों में इंटरनेट पूरी तरह बदल चुका है. आज के ऐप केवल इस बात पर ध्यान देते हैं कि आप स्क्रीन पर कितना टाइम बिता रहे हैं और वे आपको कितने विज्ञापन दिखा सकते हैं. एल्गोरिदम और फेक लाइक्स के इस खेल ने लोगों के बीच के सच्चे रिश्तों को खत्म कर दिया है. यही वजह है कि आज का यूथ दिन भर फोन में लगे रहने के बावजूद अंदर से अकेला महसूस कर रहा है.
AI और एल्गोरिदम के खिलाफ एक नई जंग
फाउंडर ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि आजकल ऑनलाइन बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ गया है. जब हर मैसेज और पोस्ट के पीछे एल्गोरिदम काम करने लगे, तो इंसानी जुड़ाव खत्म होने लगता है. उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ी एक ऐसा इंटरनेट डिजर्व करती है जहां रोबोट्स नहीं, बल्कि असली इंसान हों. एक ऐसी जगह जहां लोगों को उनकी अच्छी सोच, दोस्ती और भरोसे के लिए जाना जाए, ना कि सिर्फ व्यूज और फॉलोअर्स के लिए.
कम्युनिटी ही थी ऑर्कुट की असली पहचान
जब भी पुराने दिनों की बात होती है, लोग ऑर्कुट की कम्युनिटीज को सबसे ज्यादा याद करते हैं. वहाँ हर तरह के लोगों के लिए ग्रुप्स बने होते थे. चाहे वो एक ही रूट से बस में सफर करने वाले लोग हों, बाइक लवर्स हों, या फिर मंडे से नफरत करने वाले लोग. किसी फीड को सिर्फ देखना आपको दर्शक बनाता है, लेकिन किसी कम्युनिटी का हिस्सा होना आपको परिवार जैसा फील कराता है. ऑर्कुट इसी अपनेपन को दोबारा इंटरनेट पर वापस लाना चाहता है.