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क्या एलियंस का घर ढूंढ निकालेगा NASA? जानिए 1.2 बिलियन डॉलर के नए Prima टेलिस्कोप की पूरी इनसाइड स्टोरी

NASA ने $1.2 बिलियन के नए Prima टेलिस्कोप मिशन का ऐलान किया है. यह नया 'फार-इन्फ्रारेड' टेलिस्कोप बताएगा कि ग्रह, तारे और गैलेक्सी कैसे बनते हैं. जानिए 2033 में लॉन्च होने वाले NASA के इस नए सुपर स्पेस प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल...

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Sep 25, 2026, 07:38 AM IST | Updated: Sep 25, 2026, 07:41 AM IST
Image Credit: Prima Mission
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अगर आपको लगता है कि NASA ने James Webb स्पेस टेलिस्कोप बनाकर अंतरिक्ष के सारे राज़ ढूंढ लिए हैं, तो आप बिल्कुल ग़लत हैं. NASA अब ब्रह्मांड के उन पन्नों को पलटने जा रहा है जो अब तक इंसानियत के लिए पूरी तरह से अनजान थे. हाल ही में Nancy Grace Roman टेलिस्कोप के बाद NASA ने अपने एक और बहुत बड़े मिशन 'Prima' का ऑफिशियल ऐलान कर दिया है. लगभग $1.2 बिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपये में कहें तो करीब 10,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह सुपर टेलिस्कोप सीधे यह देखने की कोशिश करेगा कि आख़िर हमारी धरती, दूसरे ग्रह, तारे और विशालकाय गैलेक्सी कैसे पैदा हुए थे. आइए इस नए और रोमांचक मिशन को समझते हैं...

क्या है NASA का नया Prima टेलिस्कोप प्रोजेक्ट?
NASA ने हाल ही में पुष्टि की है कि उसका नया स्पेस टेलिस्कोप मिशन 'Prima' अब Phase B में पहुंच चुका है. आसान शब्दों में कहें तो इसका मतलब यह है कि अब इस टेलिस्कोप की डिज़ाइनिंग और टेक्नोलॉजी बनाने की तैयारी आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है. Prima का पूरा नाम 'Probe far-Infrared Mission for Astrophysics' है. यह NASA के 'Probe Explorers' प्रोग्राम का पहला सदस्य है. NASA इस मिशन को उन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए तैयार कर रहा है जिनके जवाब आज तक दुनिया का कोई भी टेलिस्कोप नहीं दे पाया है.

फार-इन्फ्रारेड टेक्नोलॉजी: क्यों ख़ास है यह नया टेलिस्कोप?
अब आप सोच रहे होंगे कि जब हमारे पास पहले से ही James Webb जैसा पावरफुल टेलिस्कोप है तो Prima की क्या ज़रूरत पड़ी? दरअसल, अंतरिक्ष में बहुत सी चीज़ें ऐसी हैं जिन्हें हम आम लाइट या फिर नार्मल इन्फ्रारेड कैमरों से नहीं देख सकते. Prima टेलिस्कोप को 'Far-Infrared Wavelengths' (दूर की इन्फ्रारेड तरंगों) में देखने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है. यह उस खाली जगह (gap) को भरेगा जो James Webb टेलिस्कोप और रेडियो टेलिस्कोप के बीच में रह जाती है. NASA की साइंस मिशन डायरेक्टर निकी फॉक्स का कहना है कि Prima इंसानियत के लिए गहरे ब्रह्मांड को देखने वाली एक नई खिड़की साबित होगा.

कैसे बनते हैं नए ग्रह? Prima खोलेगा सबसे बड़ा राज़!
इस पूरे मिशन का सबसे कूल और इंटरेस्टिंग काम यह पता लगाना है कि हमारे सौर मंडल (Solar System) के बाहर नए ग्रह कैसे जन्म लेते हैं. जब भी कोई नया ग्रह बनता है तो उसके चारों तरफ़ बहुत ठंडी धूल और गैसों का एक विशाल बादल जमा हो जाता है. आम टेलिस्कोप इस ठंडी धूल के पार नहीं देख पाते. लेकिन Prima इस ठंडी धूल को चीरकर अंदर की तस्वीरें ले सकेगा. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में आसानी होगी कि ब्रह्मांड के वो कौन-से मैटेरियल्स थे जिनसे हमारी धरती जैसी दुनिया बनी है.

गैलेक्सी और ब्लैक होल के कनेक्शन की होगी जांच!
ब्रह्मांड में मौजूद हर बड़ी गैलेक्सी (आकाशगंगा) के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा और भयानक ब्लैक होल बैठा होता है. लेकिन वैज्ञानिक आज तक यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि गैलेक्सी और उसके सेंटर में मौजूद ब्लैक होल साथ-साथ कैसे बड़े होते हैं. Prima टेलिस्कोप इस बात की पूरी टाइमलाइन ट्रैक करेगा कि अरबों सालों में गैलेक्सीज़ का विकास कैसे हुआ और पूरे ब्रह्मांड में भारी एलिमेंट्स (Heavy Elements) और कॉस्मिक डस्ट कैसे फैली.

कब होगा लॉन्च और कितनी है इसकी कीमत?
NASA के मुताबिक Prima टेलिस्कोप में 5.9 फीट (1.8 मीटर) चौड़ा एक मेन टेलिस्कोप शीशा लगा होगा. इस विशाल मिशन को साल 2033 तक अंतरिक्ष में लॉन्च करने का टारगेट रखा गया है. अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद यह मिशन कम से कम 5 सालों तक लगातार काम करेगा. NASA ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी तरफ़ से $1.2 बिलियन (1.2 अरब डॉलर) का बजट तय किया है. अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक़ रहा तो 2033 में यह टेलिस्कोप रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष की गहराईयों में भेज दिया जाएगा.

दुनिया भर की एजेंसियां मिलकर कर रही हैं काम!
इतने बड़े और महंगे मिशन को अकेले सम्भालना आसान नहीं होता. NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) इस पूरे मिशन को मैनेज कर रही है. इसके साथ ही NASA के गोडार्ड और मार्शल स्पेस फ़्लाइट सेंटर भी इसमें मदद कर रहे हैं. सबसे ख़ास बात यह है कि इस मिशन में अमेरिका के साथ-साथ फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा, साउथ कोरिया, जापान और यूके जैसी दुनिया की बड़ी-बड़ी स्पेस एजेंसियां और रिसर्च इंस्टीट्यूट एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

यूथ के लिए क्यों इंपॉर्टेंट है यह स्पेस अपडेट?
आज की युवा जनरेशन स्पेस, टेक्नोलॉजी और एलियन लाइफ जैसे टॉपिक्स में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट रखती है. Prima मिशन सिर्फ एक साइंटिफिक प्रोजेक्ट नहीं है बल्कि यह इंसानियत के उस सफ़र का हिस्सा है जहाँ हम यह ढूंढ रहे हैं कि हम कहाँ से आए हैं. अगर Prima टेलिस्कोप कामयाब रहता है तो आने वाले 10-15 सालों में हमें ब्रह्मांड के ऐसे राज़ पता चलेंगे जो शायद आज की टेक्स्टबुक्स में लिखे ही नहीं गए हैं. यह मिशन आने वाले समय में स्पेस टेक्नोलॉजी की पूरी दिशा बदल सकता है.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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