Diwali Sale में मोबाइल मार्केट में बड़ा उलटफेर! फोन की कुल बिक्री में 12 परसेंट की भारी गिरावट, लेकिन महंगे स्मार्टफोन्स खरीदने के लिए मची लूट
काउंटरपॉइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक इस फेस्टिव सीजन स्मार्टफोन की बिक्री वॉल्यूम में 12% की गिरावट आ सकती है, लेकिन लोग महंगे और प्रीमियम फोन ज्यादा खरीद रहे हैं.
काउंटरपॉइंट रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस फेस्टिव सीजन स्मार्टफोन्स की कुल बिक्री (वॉल्यूम के हिसाब से) लगभग 12 प्रतिशत कम हो सकती है. हालांकि, इसके बावजूद मार्केट की कुल वैल्यू 5 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि लोग भले ही कम संख्या में नए फोन खरीद रहे हों, लेकिन वे ज्यादा महंगे और प्रीमियम डिवाइसेज पर पैसे खर्च कर रहे हैं.
क्यों घट रही है फोन की बिक्री?
हर साल फेस्टिव सीजन में लाखों लोग नया फोन खरीदने की सोचते हैं. लेकिन इस बार मार्केट का ट्रेंड थोड़ा अलग नजर आ रहा है. रिसर्च के मुताबिक, रैम और स्टोरेज जैसी मेमोरी की कीमतें बढ़ने की वजह से स्मार्टफोन्स के दाम थोड़े ऊपर चले गए हैं. इसके अलावा, मोबाइल कंपनियों के पास इस बार बंपर डिस्काउंट देने का ज्यादा मौका नहीं बचा है.
इन तमाम कारणों की वजह से कई ग्राहक नया फोन खरीदने का अपना प्लान थोड़ा आगे टाल रहे हैं या फिर बहुत सोच-समझकर पैसा खर्च कर रहे हैं. काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का कहना है कि इस फेस्टिव सीजन सबसे बड़ा चैलेंज एक्टिव खरीदारों की संख्या का होगा. महंगाई और महंगे फोन्स की वजह से कई लोग फिलहाल साइडलाइन पर हैं और खरीदारी केवल तभी हो रही है जब किसी को सच में पुराने फोन को बदलकर नए की जरूरत महसूस हो रही है.
नया फोन खरीदने का नहीं, बल्कि अपग्रेड करने का है सीजन
इस फेस्टिव सीजन का सबसे बड़ा मंत्र 'फर्स्ट-टाइम बायर' यानी पहली बार फोन खरीदने वाला ग्राहक नहीं, बल्कि 'अपग्रेड' करने वाला ग्राहक बन गया है. यानी वे लोग ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं जो पहले से ही स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं और अब अपने पुराने फोन को बदलकर एक बेहतर और प्रीमियम मॉडल हाथ में लेना चाहते हैं.
सर्वइफाई (Servify) के फाउंडर और सीईओ श्रीवत्सा प्रभाकर का कहना है कि यह फेस्टिव सीजन पूरी तरह से अपग्रेड सीजन जैसा दिख रहा है. जो लोग नया फोन ले रहे हैं, वे सीधे मिड-रेंज या बजट फोन से छलांग लगाकर प्रीमियम कैटेगरी में जा रहे हैं. यही वजह है कि कम यूनिट्स बिकने के बावजूद मार्केट का कुल बिजनेस फायदे में रहने की उम्मीद है.
ट्रेड-इन और फाइनेंस ऑफर्स का चल रहा है तगड़ा जादू
महंगे स्मार्टफोन्स को खरीदने के लिए लोग अब सीधे अपनी जेब ढीली करने के बजाय स्मार्ट तरीके अपना रहे हैं. इसमें फोन एक्सचेंज (Trade-in) और आसान ईएमआई फाइनेंसिंग ऑप्शंस सबसे बड़ा रोल निभा रहे हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि अक्टूबर और नवंबर के महीनों में फोन एक्सचेंज करने की वॉल्यूम आम महीनों के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशत तक ज्यादा होती है.
आजकल 60,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन्स की बिक्री इन्हीं फाइनेंस और ट्रेड-इन ऑफर्स के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही है. इसके अलावा, 1 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाले फोन्स और फोल्डेबल (Foldable) स्मार्टफोन्स की डिमांड भी उन लोगों के बीच बढ़ रही है जो हर 12 से 24 महीने में अपना फोन अपग्रेड करने के शौकीन हैं.
छोटे शहरों में भी पहुँच रहा है प्रीमियम फोन्स का क्रेज
पहले के समय में महंगे और प्रीमियम स्मार्टफोन्स का शौक सिर्फ बड़े महानगरों (Metros) यानी दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों तक ही सीमित हुआ करता था. लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदल रहा है.
ट्रेड-इन और फाइनेंस की सुविधा छोटे शहरों यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुँच चुकी है. छोटे शहरों के युवा भी अब आईफोन और महंगे प्रीमियम एंड्रॉइड फोन्स खरीदने में पीछे नहीं हैं. इससे यह साबित होता है कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स खरीदने की चाहत अब पूरे देश के कोने-कोने में फैल चुकी है. छोटे शहरों से आ रही यह जबरदस्त डिमांड स्मार्टफोन कंपनियों के लिए एक बहुत बड़ा पॉजिटिव संकेत है.
महंगे फोन के साथ डिवाइस प्रोटेक्शन भी बन रही है जरूरत
जब कोई इंसान 70,000 या 1 लाख रुपये का महंगा स्मार्टफोन खरीदता है, तो उसके मन में फोन के टूटने या खराब होने का डर भी उतना ही ज्यादा रहता है. यही कारण है कि महंगे फोन्स के साथ डिवाइस प्रोटेक्शन और वारंटी प्लान्स लेने का क्रेज भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है.
सर्वइफाई के आंकड़ों के अनुसार, मिड-रेंज फोन्स के मुकाबले प्रीमियम स्मार्टफोन्स में डिवाइस प्रोटेक्शन लेने की दर 30 से 40 प्रतिशत तक ज्यादा होती है. कंपनियाँ और प्लेटफॉर्म्स अब फाइनेंस और अपग्रेड प्लान्स के साथ ही इन प्रोटेक्शन पैक्स को बंडल करके बेच रहे हैं, ताकि ग्राहकों को मानसिक शांति मिल सके. कुल मिलाकर इस फेस्टिव सीजन में भारी-भरकम छूट भले न मिल रही हो, लेकिन एक्सचेंज और फाइनेंस के सहारे मार्केट का पहिया बहुत ही शानदार तरीके से घूम रहा है.