)
दुनियाभर की टेक इंडस्ट्री, रोजमर्रा की जिंदगी और आम बोलचाल पर राज करने वाले शब्द 'Artificial Intelligence' यानी AI की आधिकारिक तौर पर विदाई हो चुकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक और बेहद हैरान कर देने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है. अब अमेरिकी सरकार के सभी विभागों, आधिकारिक पत्राचार, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स, रिपोर्ट्स और सरकारी वेबसाइटों में 'AI' शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होगा. इसकी जगह अब आधिकारिक रूप से 'Super Intelligence' यानी SI शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा.
व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए इस नए आदेश का शीर्षक है "Inaugurating the Era of Super Intelligence" (सुपर इंटेलिजेंस के युग का शुभारंभ). ट्रंप प्रशासन का सीधा तर्क है कि आज के एडवांस्ड कंप्यूटर मॉडल अब सिर्फ इंसानी दिमाग की नकल करने या छोटे-मोटे काम ऑटोमेट करने तक सीमित नहीं रह गए हैं. ये मॉडल विज्ञान, मेडिसिन, कोडिंग और रिसर्च में इंसान की सोच से कई गुना आगे निकल चुके हैं. ऐसे में 70 साल पुराना शब्द 'आर्टिफिशियल' अब इस आधुनिक टेक्नोलॉजी के वास्तविक कद और क्षमता के सामने बेहद छोटा पड़ गया है.

व्हाइट हाउस में जुटा दुनिया की सबसे तेज सोच का कुनबा
इस बड़े फैसले का ऐलान राष्ट्रपति ट्रंप ने केवल कागजी तौर पर नहीं किया, बल्कि इसके लिए व्हाइट हाउस में एक बेहद हाई-प्रोफाइल लंच समिट का आयोजन किया गया था. इस समिट में सिलिकॉन वैली और वैश्विक टेक जगत के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली चेहरों को एक ही मेज पर देखा गया.
इस ऐतिहासिक बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख टेक लीडर्स:
* एलन मस्क (xAI और X के फाउंडर व सीईओ)
* सुंदर पिचाई (गूगल और अल्फाबेट के सीईओ)
* मार्क जुकरबर्ग (मेटा के फाउंडर और सीईओ)
* जेन्सन हुआंग (एनवीडिया के फाउंडर और सीईओ)
* डारियो अमोदेई (एंथ्रोपिक के सीईओ)
* ग्रेग ब्रॉकमैन (ओपन-एआई के प्रेसिडेंट)
बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस टेक्नोलॉजी की ताकत की तुलना करते हुए कहा कि यह टेक्नोलॉजी केवल एक नया टूल नहीं है, बल्कि यह इंसानी इतिहास में इंटरनेट की खोज और औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) से भी कई गुना बड़ी साबित होने वाली है. ट्रंप ने कमरे में मौजूद सभी दिग्गजों की तारीफ करते हुए कहा कि ये दुनिया के सबसे स्मार्ट लोग हैं जिन्होंने एक साथ आकर अमेरिका और पूरी दुनिया के भविष्य के लिए 'एक तरह का नया संविधान' तैयार कर दिया है.

क्या-क्या बदलेगा 'AI से SI' के इस नए आदेश से?
ट्रंप के इस नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के लागू होते ही अमेरिका के प्रशासनिक और कानूनी ढांचे में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
* सरकारी शब्दावली का पूरा कायाकल्प: अमेरिकी सरकार के सभी एग्जीक्यूटिव डिपार्टमेंट्स और सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पत्राचार, सार्वजनिक बयानों, वेबसाइट्स और रिपोर्ट्स में तत्काल प्रभाव से 'AI' की जगह 'Super Intelligence' या 'SI' का इस्तेमाल शुरू करें.
* पुराने दस्तावेजों पर असर नहीं: यह नया नियम केवल नए और भविष्य में बनने वाले दस्तावेजों पर लागू होगा. पहले से जारी नियम-कानूनों, पुराने सरकारी अनुबंधों (Government Contracts), ग्रांट्स और ऐतिहासिक अभिलेखों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
* कानूनी परिभाषा बदलने की तैयारी: वर्तमान में अमेरिकी कानून (Title 15 of the US Code) के तहत जो परिभाषा AI के लिए लागू थी, वही फिलहाल SI पर भी लागू रहेगी. हालांकि, ट्रंप ने अपने साइंस एंड टेक्नोलॉजी एडवाइजर को 60 दिनों का समय दिया है ताकि वे अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में पेश करने के लिए नया कानूनी ड्राफ्ट तैयार करें और संघीय कानूनों में आधिकारिक बदलाव करवाएं.
White House Accord on Super Intelligence pic.twitter.com/NVNkHmLcbk
— The White House (@WhiteHouse) September 30, 2026
खतरों से निपटने के लिए '4-लेयर सेफ्टी ऑडिट' का गुप्त समझौता
सुपर इंटेलिजेंस की अपार क्षमता के साथ-साथ इसके इंसानी कंट्रोल से बाहर हो जाने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. इसी डर और जन-आशंकाओं को दूर करने के लिए ट्रंप और टेक कंपनियों के सीईओ ने "Joint Commitment on Frontier Responsibilities" नाम के एक नैतिक रूप से बाध्यकारी (Morally Binding) सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
इस समझौते के तहत हर टेक कंपनी को अपने फ्रंटियर मॉडल्स की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित 4 कड़े स्तरों (4 Layers of Controls and Audits) का पालन करना अनिवार्य होगा:

इस समझौते के दौरान मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि ये कड़े सुरक्षा ऑडिट जनता और ग्राहकों में यह भरोसा जगाएंगे कि टेक्नोलॉजी ठीक उसी तरह काम कर रही है जैसा हम चाहते हैं. वहीं एलन मस्क ने नौकरियों पर पड़ने वाले असर पर बात करते हुए कहा कि रोबोट्स और एआई के आने से काम की प्रकृति में बदलाव जरूर आएगा, लेकिन इसका दीर्घकालिक नतीजा इंसानियत के लिए बेहद फायदेमंद होगा.

America.gov: अब पूरी सरकार आपकी हथेली में
व्हाइट हाउस समिट के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के चीफ डिजाइन ऑफिसर जो गेबिया के साथ मिलकर देश का नया सिंगल-विंडो डिजिटल पोर्टल America.gov पेश किया.
* आम बोलचाल की भाषा में संवाद: इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नागरिक किसी भी जटिल सरकारी प्रक्रिया के बारे में साधारण भाषा में सवाल पूछ सकते हैं. सुपर इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी तुरंत सत्यापित और सटीक सरकारी जानकारी प्रदान करेगी.
* एक क्लिक पर जरूरी सेवाएं: आने वाले समय में नागरिक बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटे घर बैठे पासपोर्ट रिन्यूअल, मेडिकेयर इनरोलमेंट और अन्य जरूरी प्रशासनिक काम ऑनलाइन कर सकेंगे.
* 10 अरब घंटों की सीधी बचत: व्हाइट हाउस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी नागरिक हर साल सरकारी फॉर्म्स और कागजी कार्रवाई में लगभग 10 अरब घंटे बर्बाद करते हैं. America.gov पोर्टल इस कागजी जाल को खत्म करके जनता के समय और पैसे दोनों की बचत करेगा.
* 1 लाख से अधिक यूज़र्स वाली सेवाएं एकीकृत: एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत उन सभी सरकारी सेवाओं को इस पोर्टल से जोड़ा जाएगा जो सालाना 1,000,000 से अधिक नागरिकों को सेवा प्रदान करती हैं. हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सेवाओं और IRS टैक्स फाइलिंग को फिलहाल इससे बाहर रखा गया है.
डेटा सेंटर्स पर ट्रंप की टेक दिग्गजों को सख्त हिदायत
सुपर इंटेलिजेंस मॉडल्स को ट्रेन और रन करने के लिए अमेरिका के कई राज्यों और स्थानीय समुदायों में विशाल डेटा सेंटर्स बनाए जा रहे हैं. इन डेटा सेंटर्स की वजह से भारी मात्रा में बिजली-पानी की खपत हो रही है, जिससे स्थानीय जनता और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है.
समिट के दौरान ट्रंप ने इस जमीनी विरोध पर टेक कंपनियों के प्रमुखों से सख्त लहजे में बात की. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि टेक कंपनियों को केवल अपने मुनाफे और मॉडल डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें उन स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत साझेदारी बनानी होगी जहां वे अपने डेटा सेंटर्स स्थापित कर रहे हैं.
ट्रंप ने कंपनियों को सलाह दी कि वे स्थानीय स्कूलों, शिक्षकों के वेतन और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सीधी वित्तीय सहायता प्रदान करें. ट्रंप का मानना है कि अगर कंपनियां स्थानीय जनता को खुश रखेंगी, तो डेटा सेंटर्स का विरोध खत्म हो जाएगा और वे अमेरिका के भीतर ही तेजी से विकसित हो सकेंगे, वरना कंपनियों को विदेशों का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
अमेरिका बनाम चीन: सुपर इंटेलिजेंस का महासंग्राम
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात को बार-बार दोहराया कि सुपर इंटेलिजेंस के विकास की यह दौड़ सिर्फ तकनीक की प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक वर्चस्व की सीधी महाजंग (Global Competition) है.
ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा, "इस रेस में कोई दूसरा स्थान (Second Place) नहीं होता. या तो आप नंबर-1 बनकर जीतते हैं या फिर आप हार जाते हैं. अमेरिका इस रेस में काफी आगे चल रहा है और मैं किसी भी ऐसे कानून या पाबंदी का समर्थन नहीं करूंगा जो अमेरिका की टेक कंपनियों की रफ्तार को धीमा करे."
हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के वाशिंगटन दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच एआई से जुड़ी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक संवाद माध्यम बनाने पर सहमति जरूर बनी थी, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया कि वे चीन के साथ बहुत अधिक सहयोग करने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि अमेरिका इस तकनीक में चीन से काफी आगे है.