चीन ने फोड़ा ऐसा 'चिप बम', अमेरिकी शेयर बाजार हो गया ढेर, एक झटके में डूबे अरबों डॉलर
चीन की मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी CXMT ने एक ऐसा ऐलान किया है जिसने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के टेक शेयरों में भारी गिरावट ला दी है. जानिए क्या है यह चिप टेक्नोलॉजी और क्यों कांप रहे हैं टेक दिग्गज.
ग्लोबल टेक और शेयर बाजार की दुनिया में आजकल एक ही नाम की गूंज है - CXMT. चीन की इस सेमीकंडक्टर कंपनी के बारे में कुछ महीनों पहले तक चीन से बाहर बहुत कम लोगों ने सुना था. लेकिन पिछले कुछ दिनों में इस अकेली कंपनी ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी चिप मैनुफैक्चरिंग कंपनियों के अरबों डॉलर डुबो दिए हैं. सैमसंग, माइक्रोन और एसके हायनिक्स जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए हैं. चीन की इस कंपनी ने दावा किया है कि उसने चिप डिजाइन में एक ऐसी सफलता हासिल की है जो AI डेटा सेंटर्स की दुनिया को पूरी तरह बदल कर रख देगी.
चीन का वो ऐलान जिसने मचाया हड़कंप
चीन की एक बड़ी मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी है, जिसका नाम चांगक्सिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज यानी CXMT है. इस कंपनी ने शंघाई में हुए एक टेक इवेंट के दौरान अपनी नई मेमोरी चिप डिजाइन का खुलासा किया. कंपनी के प्रेसिडेंट काओ कान्यू ने बताया कि उनकी टीम ने '4F²' नाम की एक बेहद एडवांस्ड चिप टेक्नोलॉजी में बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है. इस खबर के आते ही वॉल स्ट्रीट से लेकर एशिया के शेयर बाजारों तक हड़कंप मच गया. इन्वेस्टर्स में ऐसा डर फैला कि वे अपनी कंपनियों के शेयर फटाफट बेचने लगे और देखते ही देखते टेक कंपनियों के अरबों डॉलर स्वाहा हो गए.
शेयर बाजार में क्यों मचा इतना हाहाकार?
इस खबर का असर इतना भयानक था कि दक्षिण कोरिया के सेउल में SK Hynix के शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए. वहीं दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Samsung के शेयर 7.4 प्रतिशत गिर गए. अमेरिकी शेयर बाजार में भी माइक्रोन, सीगेट और वेस्टर्न डिजिटल जैसी सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर बुरी तरह फिसल गए. वजह बहुत साफ है. CXMT का प्लान है कि वह 2026 के अंत तक इस नई डिजाइन पर बने सर्वर मेमोरी मॉड्यूल को बाजार में उतार देगा. यह वही सेक्टर है जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की भारी डिमांड के कारण कंपनियों का मुनाफा इस साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था.
क्या है यह '4F²' चिप टेक्नोलॉजी?
आज के समय में जितने भी मेनस्ट्रीम DRAM मेमोरी चिप्स इस्तेमाल होते हैं, उनकी डिजाइन लगभग 6F² साइज की होती है. आसान शब्दों में कहें तो 'F' सिलिकॉन चिप पर बनी सबसे छोटी आकृति होती है. चीन की कंपनी ने इस साइज को घटाकर 4F² कर दिया है. इसका मतलब यह हुआ कि हर मेमोरी सेल का साइज लगभग एक-तिहाई कम हो जाएगा. जब साइज छोटा होगा तो उतने ही बड़े चिप पर 50 प्रतिशत ज्यादा मेमोरी फिट की जा सकेगी.
वर्टिकल ट्रांजिस्टर का कमाल
CXMT का कहना है कि उन्होंने एक खास वर्टिकल ट्रांजिस्टर डिजाइन तैयार किया है. यह डिजाइन सेल के छोटे होने पर भी बिजली का लीकेज नहीं होने देता जिससे परफॉर्मेंस एकदम सॉलिड बनी रहती है. कंपनी का पहला प्रोडक्ट DDR5 RDIMM होगा, जो बड़े-बड़े डेटा सेंटर सर्वर्स के अंदर लगाया जाता है. हैरानी की बात यह है कि सैमसंग और एसके हायनिक्स जैसी दिग्गज कंपनियां भी कई सालों से इसी टेक्नोलॉजी को हासिल करने की रेस में लगी थीं. लेकिन एक चाइनीज कंपनी का इस रेस में आगे निकल जाना ही मार्केट के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ.
माइक्रोन और सैमसंग के लिए क्यों बढ़ा खतरा
इस साल AI की भारी मांग की वजह से मेमोरी चिप्स की भारी कमी हो गई थी, जिसकी वजह से दिग्गज कंपनियों ने मनचाहे दामों पर चिप्स बेचे. अमेरिकी कंपनी माइक्रोन का रेवेन्यू इस साल उछलकर 54 अरब डॉलर से भी ऊपर पहुंच गया. लेकिन जब बाजार में कोई नया और सस्ता कॉम्पिटिटर आता है तो कंपनियों की यह मनमानी खत्म हो जाती है. इन्वेस्टर्स को डर है कि चीन की कंपनी आने वाले दिनों में सस्ते दामों में चिप्स बेचना शुरू कर देगी जिससे बाकी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा.
चीन की CXMT अब कोई छोटी कंपनी नहीं रही
आपको बता दें कि CXMT का ग्लोबल DRAM मार्केट शेयर पिछले एक साल में 4 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 10 प्रतिशत पर पहुंच गया है. चीन के हेफेई शहर में बनी इस कंपनी ने इसी साल जुलाई में एशिया का सबसे बड़ा IPO लाकर 8.6 अरब डॉलर जुटाए थे. कंपनी ने हाल ही में बताया है कि पिछले नौ महीनों में उसका मुनाफा बढ़कर लगभग 19.8 अरब डॉलर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी दौरान कंपनी नुकसान में चल रही थी. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स अब इसे एक बहुत बड़ा खतरा मान रहे हैं.
क्या सच में खतरे में है अमेरिकी टेक मार्केट
हालांकी कई टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर बाजार में आई यह गिरावट थोड़ी जल्दबाजी में लिया गया फैसला हो सकती है. CXMT ने अभी यह साबित नहीं किया है कि वह बड़े पैमाने पर इन चिप्स का प्रोडक्शन कर सकती है या नहीं. इसके अलावा सर्वर बनाने वाली बड़ी कंपनियां किसी भी नए सप्लायर के चिप्स को अप्रूव करने में महीनों का समय लेती हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि AI प्रोसेसर्स में इस्तेमाल होने वाली HBM यानी हाई-बैंडविड्थ मेमोरी में अभी भी सैमसंग और एसके हायनिक्स काफी आगे हैं.
अमेरिकी बैन भी बना हुआ है रोड़ा
इसके अलावा अमेरिका ने चीन पर कई तरह के कड़े एक्सपोर्ट बैन लगा रखे हैं, जिसकी वजह से चिप बनाने वाली सबसे अडवांस्ड मशीनें चीन नहीं पहुंच पा रही हैं. माइक्रोन के सीईओ संजय मेहरोत्रा का भी मानना है कि 2027 और 2028 तक बाजार में चिप्स की डिमांड सप्लाई से ज्यादा ही रहने वाली है. ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या चीन का यह '4F²' डिजाइन सच में बाजार के दिग्गजों को पछाड़ पाएगा या फिर यह सिर्फ एक शुरुआती हलचल बनकर रह जाएगा. इसका असली सच 2026 के अंत तक ही सामने आ पाएगा.