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अपनी मौत का सही अंदाजा लगा लेते हैं इंसान! रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला सच, बस एक टाइप के लोग खा जाते हैं धोखा

जापान की एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि इंसान अपनी मौत और उम्र का सही अंदाजा लगा सकते हैं. जानिए 28 साल चली इस स्टडी के चौंकाने वाले नतीजे और वो कौन से लोग हैं जो अपनी उम्र का गलत अंदाजा लगाते हैं.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Sep 03, 2026, 11:22 AM IST | Updated: Sep 03, 2026, 11:24 AM IST
Image Credit: Research
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क्या आपने कभी सोचा है कि आप कितने साल जिएंगे? 70, 80 या 100 साल? अगर आप सोचते हैं कि आप बहुत लंबा जीने वाले हैं, तो बहुत चांस हैं कि आपकी यह बात बिल्कुल सच साबित हो जाए. जी हां, जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी रिसर्च की है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. इस स्टडी के मुताबिक इंसान अपनी उम्र का अंदाजा लगाने में काफी हद तक सही साबित होते हैं. लेकिन रुकिए, इसमें एक बहुत बड़ा ट्विस्ट भी है. एक खास तरह की सोच रखने वाले लोग अपनी मौत के अंदाजे में पूरी तरह मात खा जाते हैं. आइए समझते हैं इस अजीब और माइंड-ब्लोइंग रिसर्च का पूरा सच....

जापान की वो रिसर्च जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया
जापान की त्सुकुबा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक शोहेई ओकामोतो और उनकी टीम ने एक बहुत ही अनोखी स्टडी की है. उन्होंने 'जापानी एजिंग एंड हेल्थ डायनामिक्स स्टडी' के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया. इस सर्वे में 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के 2,447 लोगों को शामिल किया गया था.

इन सभी बुजुर्गों से एक बहुत ही सीधा लेकिन मुश्किल सवाल पूछा गया था- "आपको क्या लगता है, आप किस उम्र तक जिएंगे?"

इनमें से 393 लोगों ने कहा कि उन्हें कोई अंदाजा नहीं है. लेकिन बाकी बचे लोगों ने एक फिक्स नंबर बताया. किसी ने कहा 63 साल, तो किसी ने कहा पूरे 120 साल.

28 साल बाद जब मिलाया गया मौत का डेटा
यह स्टडी कोई दो-चार दिन की नहीं थी. पूरे 28 साल बाद, यानी साल 2024 में वैज्ञानिकों ने उन 1,514 लोगों का डेटा दोबारा निकाला जिनकी इस दौरान मौत हो चुकी थी. फिर वैज्ञानिकों ने उनकी खुद बताई गई संभावित उम्र और उनकी असली मौत की उम्र का मिलान किया.

जो नतीजे सामने आए, उसने वैज्ञानिकों के भी होश उड़ा दिए. जिन लोगों ने जवानी या बुढ़ापे की शुरुआत में यह सोचा था कि वे लंबा जिएंगे, वे सचमुच बहुत लंबे समय तक जिए. उनके अंदाजे काफी हद तक सटीक निकले.

तो क्या पॉजिटिव सोच से बढ़ती है उम्र?
अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ यह सोचने से कि हम लंबा जिएंगे, हमारी उम्र बढ़ जाती है? क्या यह पॉजिटिव सोच का जादू है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी वे इसकी कोई ठोस वजह नहीं बता सकते. यह सिर्फ डेटा पर आधारित ऑब्जर्वेशन है. हो सकता है कि जो लोग खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं और जिनके परिवार में लोग लंबा जीते हैं, वे अपने आप ही यह मान लेते हैं कि वे भी लंबा जिएंगे. यानी उनकी सेहत और लाइफस्टाइल ही उनके इस भरोसे की वजह होती है.

कौन से लोग खा गए अपनी मौत का गलत अंदाजा?
इस रिसर्च में सबसे मजेदार बात यह निकलकर आई कि एक खास टाइप के लोग अपनी उम्र का गलत अंदाजा लगा बैठे. वे लोग जिन्होंने सोचा था कि वे ज्यादा दिन नहीं जिएंगे और जल्दी मर जाएंगे, उनमें से ज्यादातर लोग अपनी ही सोच को गलत साबित कर गए.

डेटा के मुताबिक, ऐसे लगभग 59 परसेंट लोग अपनी उम्मीद से कई साल ज्यादा जिए. यानी जिन लोगों ने अपनी जिंदगी की डोर को छोटा समझा था, वे अपनी सोची हुई उम्र को पार कर गए और कई साल अतिरिक्त जिए.

80 साल का वो मैजिकल नंबर
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने एक और दिलचस्प बात नोटिस की. सर्वे में शामिल ज्यादातर लोगों ने अपनी संभावित उम्र 80 साल बताई थी.

वैज्ञानिकों का मानना है कि 1996 के आसपास जापान में औसतन जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) लगभग 80 साल ही थी. चूंकि लोग इसके बारे में जानते थे, इसलिए उन्होंने बिना ज्यादा सोचे-समझे 80 का नंबर चुन लिया.

पढ़ाई-लिखाई और महिलाओं का कनेक्शन
इस स्टडी में यह भी सामने आया कि महिलाएं और ज्यादा पढ़े-लिखे लोग अपनी सोची हुई उम्र से कहीं ज्यादा जिए.

वैज्ञानिकों ने देखा कि जिन लोगों के पास शिक्षा के ज्यादा साल थे, यानी जो ज्यादा पढ़े-लिखे थे, उन्होंने 75, 80 या 85 जैसे राउंड फिगर्स (5 से कटने वाले नंबर) कम चुने. उन्होंने ज्यादा सटीक नंबर दिए.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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