AI एजेंट का खतरनाक खेल! भारतीय कंपनियों के सिस्टम में बिना परमिशन बनाई पहुंच, सरकार ने जारी की बड़ी चेतावनी
AI की बढ़ती ताकत अब नए साइबर खतरों का कारण बन रही है. CERT-In के अलर्ट के बाद सरकार ने कंपनियों को सावधान किया है, बिना परमिशन AI एजेंट्स के लाइव डेटा तक पहुंचने से सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल हर दिन बढ़ता ही जा रहा है, एक तरफ इससे कम समय में आसानी से काम हो रहा है तो वहीं, अब इससे जुड़ा एक नया साइबर खतरा सामने आया है. भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने चेतावनी दी है कि AI एजेंट बिना परमिशन के भारतीय कंपनियों के लाइव सिस्टम और गोपनीय डेटा तक पहुंच गए. सबसे हैरानी वाली बात यह है कि जिन कंपनयों के सिस्टम में यह एक्टिविटी हुई, उन्हें इसकी जानकारी तक भी नहीं हुई. इस घटना के बाद सरकार अब कंपनियों को अपनी सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दे रही है.
कंपनियों को क्यों सतर्क रहने की जरूरत?
सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि इस घटना में किसी बड़े संगठन की अहम जानकारी लीक होने या बड़े वित्तीय नुकसान की बात सामने नहीं आई है. लेकिन फिर भी इसे चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. सरकार चाहती है कि कंपनियां अपने सिस्टम की सुरक्षा जांचें और संदिग्ध गतिविधियों पर पहले से ज्यादा नजर रखें.
सिस्टम में कहां हुई चूक?
CERT-In ने अपने अलर्ट में बताया कि रिसर्च और टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कुछ AI मॉडल और एजेंट को तय काम से आगे बढ़ने से नहीं रोका जा सका. वे उन सिस्टम तक पहुंच गए, जहां उनकी पहुंच नहीं होनी चाहिए थी. इसके पीछे सुरक्षा से जुड़ी कई पुरानी कमियां थीं. कहीं लॉगिन की जानकारी सेफ नहीं रखी गई थी, तो कहीं क्लाउड सर्विस को जरूरत से ज्यादा परमिशन दे दिए गए थे. सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी में मौजूद जानकारी भी खतरे का कारण बनी. यानी मामला सिर्फ AI की क्षमता का नहीं, बल्कि उन खामियों का भी था जिन्हें समय रहते ठीक किया जा सकता था.
चिंता इसलिए भी है क्योंकि प्रभावित कंपनियों को खुद इस एक्टिविटी का पता नहीं चला. उन्हें जानकारी तब मिली, जब AI मॉडल उपलब्ध कराने वाली कंपनियों ने अपनी जांच के बाद इसकी सूचना दी.
कुछ घंटों में हो रहे साइबर हमले
CERT-In ने साइबर अपराधियों की एक और गतिविधि का जिक्र किया है. एजेंसी के मुताबिक, अपराधी अब खुले तौर पर उपलब्ध AI आधारित टूल का इस्तेमाल कर सिस्टम की कमजोरियां तलाश रहे हैं और हमले कर रहे हैं.
इन टूल की मदद से साइबर हमले की रफ्तार बढ़ गई है. एजेंसी ने बताया कि कुछ मामलों में सिस्टम में पहली बार पहुंच बनाने और नुकसान पहुंचाने के बीच का समय कई दिनों से घटकर कुछ घंटे रह गया. जिन संगठनों ने सुरक्षा खामियों को आधा-अधूरा ठीक किया, उन्हें कुछ ही दिनों में फिर निशाना बनाया गया.
कंपनियों को क्या बदलना होगा?
सरकार ने कंपनियों से कहा है कि वे अपने सिस्टम की निगरानी बढ़ाएं. बार-बार लॉगिन की कोशिश, अनजान IP एड्रेस से पहुंच और अचानक होने वाली एक्टिविटी को बिल्कुल भी इग्नोर न करें. बड़ी कंपनियों को सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर के जरिए ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है.
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AI एजेंट पर लग सकती हैं पाबंदियां?
इस घटना के बाद अब सरकार एआई एजेंट को लेकर नियम बनाने पर विचार कर सकती है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक AI नियमन पर जल्द आने वाले कंसल्टेशन पेपर में इस मुद्दे को जगह मिल सकती है. इसमें यह सवाल उठ सकता है कि AI एजेंट को अपने आप काम करने की कितना परमिशन दिया जाए और किन कामों के लिए इंसान की परमिशन की जरूरत हो.
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