SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

ट्रॉफी कंट्रोवर्सी: नकवी को नहीं आती शर्म, बार-बार कर रहे नौटंकी! क्या कहते हैं सेरेमनी के नियम?

महिला एशिया कप 2026 भारत की जीत के साथ खत्म हुआ. टीम इंडिया चैंपियन बनी, लेकिन जब जीत के जश्न की बारी आई तो ट्रॉफी कंट्रोवर्सी पिछले साल की तरह रिपीट हो गई. पाकिस्तान के गृह मंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने अपनी जिद के आगे नियमों की धज्जियां उड़ा दीं.

Written By Kavya Yadav
Published: Sep 15, 2026, 07:14 AM IST | Updated: Sep 15, 2026, 07:28 AM IST
Join

महिला एशिया कप 2026 की ट्रॉफी कंट्रोवर्सी की खबर हर किसी के पास पहुंच चुकी होगी. पाकिस्तान के गृह मंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी की पिछले साल से भी भयानक बेइज्जती हुई. लेकिन उनके सिर पर जिद, जुनून और बेशर्मी सवार थी, इसलिए एक बार फिर ट्रॉफी लेकर चलते बने. लेकिन क्या ये सब रोका जा सकता था, क्या भारतीय टीम को ट्रॉफी कोई और सौंप सकता था? हम आपको प्रोटोकॉल का वो पन्ना बताते हैं, जो नकवी ने अपनी जिद के आगे पलट दिया.

ये मुद्दा सबसे पहले मेंस एशिया कप 2025 में उठा, जब भारतीय टीम ने खिताब जीता और दोनों देशों के बीच तनाव के चलते टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी न लेने की ठान ली. नकवी दूसरी तरफ खुद ट्रॉफी देने के लिए अड़े रहे और फिर खिताब लेकर चलते बने. महिला एशिया कप में भी यही देखने को मिला. भारत ने फाइनल में श्रीलंका को मात दी और चैंपियन बनी, लेकिन चमचमाती ट्रॉफी लेकर तो मोहसिन नकवी भाग गए. नियमों को उठाकर देखें तो ये कंट्रोवर्सी रोकी जा सकती थी, लेकिन नकवी ने अपनी जिद और जुनून के आगे नियमों की धज्जियां उड़ा डालीं.

क्या कहता है नियम?

एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की पुरानी गाइडलाइंस को उठाकर देखें, तो समझ आता है कि इस पूरी कंट्रोवर्सी का केंद्र मोहसिन नकवी हैं. गाइलाइंस के मुताबिक बड़े आयोजनों या द्विपक्षीय सीरीज में पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान विजेता टीम को ट्रॉफी देने का सम्मान न्यूट्रल पदाधिकारियों, स्थानीय क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधियों या मेजबान देश के बोर्ड अध्यक्ष को दिया जाता है. ये नियम खेल भावना को बनाए रखने और राजनीतिक गतिरोध को मैदान से दूर रखने के लिए ही बनाया गया है.

ACC अध्यक्ष बनकर भी नहीं किया नियमों का सम्मान

मोहसिन नकवी ने ACC अध्यक्ष बनकर भी नियमों का सम्मान नहीं किया. मान लेते हैं, पिछले साल टीम इंडिया नकवी से ट्रॉफी न लेना उनके लिए सरप्राइजिंग था, लेकिन इस बार उन्होंने दोहरा रवैया दिखाया. बीसीसीआई सचिव और अन्य पदाधिकारियों ने फाइनल मैच से पहले ही साफ कर दिया था, कि भारत किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनेगा. क्योंकि मोहसिन नकवी के पाकिस्तान के गृह मंत्री के पद पर भी हैं. खिताबी जंग से पहले बीसीसीआई ने एसीसी अधिकारियों को आगाह किया था कि नकवी अगर नकवी प्रेजेंटेशन सेरेमनी में आते हैं, तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. भारत की तरफ से आगाह करने के साथ सुझाव भी था कि एसीसी के उपाध्यक्ष या मेजबान यूएई के कोई पदाधिकारी ट्रॉफी सौंप सकते हैं, लेकिन नकवी जिद पर अड़े रहे और बेशरमी की सरी हदें पार कर दीं.

क्या है नकवी की जिद?

अब बात करें ट्रॉफी की जिद की, तो नियमों के मुताबिक ये जायज नहीं है. पिछले साल जब भारत को ट्रॉफी देने का मुद्दा उठा, तो जवाब था कि 'भारत को ट्रॉफी चाहिए तो उनके दफ्तर से कलेक्ट कर ले.' पिछले साल की तरह दूसरी ट्रॉफी भी मोहसिन नकवी ट्रॉफी ले जा चुके हैं. अब देखना होगा कि इस बार भारत की तरफ से दोनों ट्रॉफी को लेकर कोई कदम उठाया जाएगा या नहीं. 
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

4 साल से खेल पत्रकारिता में सक्रिय. 2022 में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर डेब्यू किया. क्रिकट्रैकर, न्यूज18 से होते हुए अब जी न्यूज हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर स्पोर्ट्स टीम का हिस्सा हैं. खेल जगत की हर हलचल, हर खास कहानी और हर ब्रेकिंग न्यूज पर पकड़. IPL, ODI World Cup, T20 World Cup, Olympics समेत कई बड़े इवेंट्स कवर किए हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES