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भारतीय टीम ने अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 में एकतरफा जीत दर्ज की. बैटिंग और बॉलिंग दोनों ही तरीके से टीम इंडिया का दबदबा देखने को मिला. इस सीरीज में कुछ प्लेयर्स इंजरी से उबरकर लौटे, लेकिन सभी की नजरें स्टार गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पर रहीं. बुमराह टीम इंडिया के लिए सिर्फ गेंदबाज नहीं बल्कि जीत के चीट-कोड बन चुके हैं. भले ही उनके खाते एक विकेट आए या एक भी न आए, लेकिन बुमराह की मौजूदगी ही टीम इंडिया के लिए काफी है. इसकी गवाही आंकड़े दे रहे हैं.
यूं तो क्रिकेट के खेल में कोई एक खिलाड़ी अपने दम पर मैच नहीं जिता सकता, लेकिन बुमराह टी20I में टीम इंडिया के लिए लकी जरूर साबित हुए हैं. जसप्रीत बुमराह का खौफ ही विरोधी टीम को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर देता है. बुमराह के ओवर में बल्लेबाज बड़ा हिट खेलने से बचते दिखते हैं. यही वजह है कई बार टी20I में बुमराह को उतने विकेट नहीं मिलते. बुमराह के लकी होने का सबूत क्या है, आइए हम आपको आंकड़ों से समझाते हैं.
बुमराह के लिए कहा जाता है, 'जस्सी हैं, तो मुमकिन है.' इसमें कितना सच है, वो बुमराह के आंकड़ों से साफ हो जाएगा. बुमराह की मौजूदगी में पिछले दो सालों (2025-2026) में टीम इंडिया ने 26 मैच खेले, जिनमें से 20 मैचों में टीम को जीत मिली जबकि, महज महज 4 मैचों में हार का सामना करना पड़ा. बाकी मुकाबले बेनतीजा रहे. लेकिन बुमराह जब टीम में नहीं होते हैं, तो मानों बॉलिंग यूनिट जीत के लिए पापड़ बेलती नजर आती है.
अब अगर वो आंकड़े उठाकर देखें, जब बुमराह टीम के साथ नहीं थे तो किसी को भी हैरानी होगी. बुमराह या तो रेस्ट पर बाहर हुए हैं या फिर इंजरी के चलते उन्हें बाहर होना पड़ा. इस दौरान भारत ने 12 मैच खेले, जिसमें महज टीम को 5 जीत मिली हैं. बुमराह के साथ टीम इंडिया एक हार के मुकाबले 5 मैच जीतती है. वहीं, उनके बिना जीत-हार का रेशियो 5 से घटकर सिर्फ 1.71 रह जाता है.
जसप्रीत बुमराह के मैदान में असर की बात करें तो बड़ी-बड़ी टीमों के खिलाफ वो मैच का रुख पलटने का माद्दा रखते हैं. कभी बाउंसर, कभी स्लोअर तो कभी यॉर्कर से बुमराह बल्लेबाजों को रनों के लिए तरसा देते हैं. उनकी बहुमुखी प्रतिभा ही सबसे बड़ी ताकत है. बड़े टूर्नामेंट्स में टीम इंडिया के लिए उनका फिट रहना बेहद जरूरी है. अब देखना होगा कि अफगानिस्तान के खिलाफ बाकी दोनों टी20 मुकाबलों में बुमराह का कैसा प्रदर्शन देखने को मिलता है.