1 मैच में 1432 रन: ईशान किशन की टीम ईस्ट जोन 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी चैंपियन, ड्रॉ मैच में कैसे हुआ विजेता का फैसला?
Duleep Trophy East Zone vs South Zone: ईस्ट जोन ने 13 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब जीत लिया है. चेन्नई में साउथ जोन के खिलाफ फाइनल मुकाबला ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन 372 रन की पहली पारी की बढ़त के आधार पर ईशान किशन की कप्तानी में ईस्ट जोन चैंपियन बना.
Duleep Trophy East Zone vs South Zone: चेन्नई के ऐतिहासिक एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया दलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ. पहली पारी में हासिल की गई विशाल बढ़त के आधार पर ईस्ट जोन ने साउथ जोन को पछाड़कर ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमा लिया. भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन की कप्तानी में ईस्ट जोन ने 13 साल बाद यह प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया है. उसने ने अपनी पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर बनाया और साउथ जोन को 336 रन पर समेटकर 372 रन की मजबूत पहली पारी बढ़त हासिल की थी.
दूसरी पारी में बल्लेबाजी करते हुए ईस्ट जोन ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक 5 विकेट खोकर 212 रन बना लिए थे. इस मजबूत बल्लेबाजी के बदौलत ईस्ट जोन की कुल बढ़त बढ़कर 584 रन हो गई, जिसने साउथ जोन की मैच में वापसी की सभी उम्मीदों को खत्म कर दिया. चौथे दिन का खेल समाप्त होने के समय कुमार कुशाग्र (34)* और एमडी कोनैन कुरैशी (26)* क्रीज पर नाबाद डटे हुए थे. दोनों युवा बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 52 रनों की अटूट साझेदारी कर टीम को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया था.
कुरैशी ने ठोका शतक
मैच के पांचवें दिन कुरैशी ने अपनी पारी को शानदार अंदाज में आगे बढ़ाते हुए शतक पूरा किया. उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए और साउथ जोन के गेंदबाजों को काफी परेशान किया. ईस्ट जोन ने अपनी दूसरी पारी को 388/7 के स्कोर पर घोषित किया. तब कुरैशी 116 रन पर नाबाद थे. मोहम्मद शमी ने अपना खाता नहीं खोला था. दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने हाथ मिला लिया और अंपायरों ने मैच को ड्रॉ घोषित कर दिया. दोनों टीमों ने मिलकर इस मैच के 5 दिनों में कुल 1432 रन बनाए.
मैच के हीरो रहे ईशान किशन
ईशान किशन ने इस मैच की पहली पारी में 250 और दूसरी पारी में 80 रन बनाए. उन्होंने दोनों पारियों को मिलाकर 330 रन बनाए. किशन को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया. उन्होंने पिछले सीजन मेंके सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में भी प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड अपने नाम किया था. साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा को प्लेयर ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड दिया गया. तिलक ने 2 मैचों की 3 पारियों में 266 रन बनाए.
ईशान ने की टीम की तारीफ
दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम करने के बाद ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने पूरी टीम के सामूहिक प्रयास की सराहना की. ईशान ने कहा कि एक समूह के रूप में यह ट्रॉफी जीतना उनके लिए सबसे खास था, क्योंकि पूरी प्रतियोगिता के दौरान सभी खिलाड़ी एक-दूसरे का ख्याल रख रहे थे. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे खुद को एक अच्छा लीडर मानते हैं, लेकिन यह सफर यहीं खत्म नहीं होता. टीम को हर विभाग, खासतौर पर फील्डिंग में होने वाली कमियों को सुधारकर रोजाना बेहतर होना पड़ेगा.
ईशान में क्या बदलाव आया?
भारतीय टीम से बाहर रहने के दौर का जिक्र करते हुए ईशान किशन ने बताया कि उस ब्रेक के बाद वे काफी शांत और खेल के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं. उन्होंने कहा कि अब वे मैच की स्थितियों को ज्यादा बेहतर ढंग से पढ़ना सीख गए हैं. ईशान ने कहा, ''मैं बस यह कोशिश कर रहा था कि टीम का कोई भी युवा खिलाड़ी उस कठिन दौर में न पहुंचे, जिससे मैं गुजरा था. इस जिम्मेदारी ने मुझे एक इंसान और क्रिकेटर के रूप में बदला है. अब मेरे भीतर टीम को जिताने की भूख और अधिक बढ़ गई है.'' वहीं, अपने चुलबुले स्वभाव पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि उनका यह अंदाज 90 साल की उम्र तक बना रहेगा.
साउथ जोन के कप्तान ने क्या कहा?
दूसरी तरफ, साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने खिताबी मुकाबले में मिली हार पर निराशा जताई, लेकिन कहा कि इस मैच से उनकी टीम को कई अहम सीख मिली है. तिलक वर्मा ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर बनाकर मैच को पूरी तरह अपनी मुट्ठी में कर लिया था. उन्होंने विरोधी बल्लेबाजों की तारीफ करते हुए कहा कि 700 से अधिक रनों के विशाल पहाड़ जैसा पीछा करना बहुत मुश्किल था और ईस्ट जोन ने उन्हें हर मोर्चे पर पछाड़ दिया.
मैच को लेकर साउथ जोन की क्या रणनीति थी?
मैच के विभिन्न चरणों पर बात करते हुए तिलक वर्मा ने बताया कि पहली पारी में पिछड़ने के बाद उनकी सोच अगले तीन दिनों तक टिककर बल्लेबाजी करने की थी. उन्होंने कहा कि यदि वे तीन दिनों तक बल्लेबाजी कर पाते, तो मैच ड्रॉ की ओर जा सकता था या वे भी बड़ा स्कोर बना सकते थे. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उनके गेंदबाज कुछ अहम मौकों पर सही दिशा में गेंदबाजी नहीं कर पाए, जिसके चलते ईस्ट जोन ने पहली पारी में 372 रन की निर्णायक बढ़त हासिल कर ली.