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4 ओवर का चक्कर: हर 8वीं बॉल पर सिक्स लगा रहे वेस्टइंडियन, क्या एक्स्ट्रा बैटर के कारण हो रहा टीम इंडिया का कबाड़ा?

भारत के गेंदबाजों ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज में जमकर रन लुटाए हैं. विंडीज ने लगातार तीन मैचों में 200 से अधिक के स्कोर को पार करके टीम इंडिया की बॉलिंग को सवालों के घेरे में ला दिया है.

4 ओवर का चक्कर: हर 8वीं बॉल पर सिक्स लगा रहे वेस्टइंडियन, क्या एक्स्ट्रा बैटर के कारण हो रहा टीम इंडिया का कबाड़ा?
Image Credit: भारत बनाम वेस्टइंडीज. BCCI

भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज 2-2 की बराबरी पर है. लखनऊ में खेले गए पहले टी20 मैच में भारत को जीत मिली, तो रांची में वेस्टइंडीज ने वापसी कर ली. इंदौर में भारत ने पलटवार किया, तो विंडीज ने हैदराबाद में फिर से सीरीज को बराबरी पर ला दिया. अब बेंगलुरु में शनिवार (17 अक्टूबर) को अंतिम मुकाबला होगा. सीरीज में रनों की बारिश हुई. दोनों टीमों के गेंदबाजों की जमकर पिटाई हुई और फैंस को चौके-छक्के देखने को मिले. 'रन फेस्ट' में गेंदबाजों का हाल बुरा हुआ और खासकर टीम इंडिया के बॉलर्स काफी परेशान नजर आए.

भारत और वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी और गेंदबाजी की तुलना करें तो टीम इंडिया बहुत ज्यादा आगे नजर आती है. विंडीज बैटर पावर हिटर तो हैं, लेकिन टीम इंडिया के बल्लेबाजों के पास पावर हिटिंग के साथ-साथ क्लास भी है. यहां विंडीज 19 है तो भारत 20 है. असली सवाल तो गेंदबाजी को लेकर है. वहां भारत 20 है तो वेस्टइंडीज 18 भी नहीं. ऐसे सवाल उठ रहे हैं कि भारतीय गेंदबाजों ने लगातार तीन मैचों में 200 से ज्यादा रन कैसे लुटा दिए? क्या सिर्फ चार प्रमुख गेंदबाजों के साथ खेलना टीम इंडिया को भारी पड़ रहा? क्या हार्दिक पांड्या की कमी खल रही?

'हाई रिस्क, हाई रिटर्न' की थ्योरी

27 जुलाई 2027 को गौतम गंभीर का भारतीय कोच के तौर पर पहला इंटरनेशनल मैच था. उसके बाद उन्होंने पूर्व कोच रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ से अलग रवैया अपनाया है और बल्लेबाजी को ज्यादा मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने एक अतिरिक्त गेंदबाज की तुलना में एक एक्स्ट्रा बल्लेबाज या बल्लेबाजी करने वाले गेंदबाज पर ज्यादा जोर दिया. टीम इंडिया से जुड़ने से पहले वह लखनऊ सुपर जाएंट्स और कोलकाता नाइटराइडर्स के कोच के तौर पर काम कर चुके थे. दोनों टीमों में उन्होंने 'हाई रिस्क, हाई रिटर्न' की थ्योरी पर काम किया. उनका मानना है कि हम जितना ज्यादा जोखिम लेंगे, उतना ही हमें लाभ मिलेगा. अब भारतीय टीम के साथ भी वह उसी तरह की योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं. इससे उन्हें फायदा तो मिला है, लेकिन कई बार नुकसान भी देखने को मिले हैं. कुछ ऐसा ही वेस्टइंडीज के खिलाफ देखने को मिल रहा है.

आठवें नंबर तक बल्लेबाजी पर जोर क्यों?

गौतम गंभीर ने टीम इंडिया में एक अतिरिक्त बल्लेबाज के कल्चर पर जोर दिया. उनके रहते प्लेइंग-11 में छह मुख्य बल्लेबाज और दो ऑलराउंडर होते हैं. पहले टीम इंडिया पांच बल्लेबाज और दो ऑलराउंडर या छह बल्लेबाज और एक ऑलराउंडर के साथ उतरती थी. गंभीर चाहते हैं कि टीम इंडिया रनों की बारिश करे या विपक्षी द्वारा खड़े किए किसी भी स्कोर को हासिल कर ले. हालांकि, चौथे टी20 मैच में यह देखने को नहीं मिला. वेस्टइंडीज ने 247 रन बनाए और हैदराबाद की पिच पर इसे चेज किया जा सकता था, लेकिन इतने बड़े-बड़े विस्फोटक बल्लेबाजों के रहते भी टीम इंडिया 223 रन ही बना सकी. यहां गंभीर का दांव उल्टा पड़ गया.

गंभीर के कोच बनने के बाद भारत ने सातवें और आठवें क्रम पर कुल 16 खिलाड़ियों को उतारा है. इनमें से सिर्फ दो विशुद्ध गेंदबाज रहे हैं. बाकी या तो विशुद्ध बल्लेबाज या ऑलराउंडर रहे हैं. उनके इस प्रयोग के कारण टीम इंडिया कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज या कई अन्य प्रमुख गेंदबाजों को प्लेइंग-11 में नहीं रख पा रही है. कई अनुभवी गेंदबाज बेंच गर्म करते हुए नजर आए हैं.

2. अतिरिक्त बॉलर पर रखने पर कौन होगा बाहर?

भारत अभी पिछले कुछ मैचों से 6 बल्लेबाज, दो ऑलराउंडर और तीन गेंदबाजों के साथ खेल रहा है. अगर एक और स्पेशलिस्ट गेंदबाज को टीम में शामिल करना हो तो गंभीर को किसी एक ऑलराउंडर या किसी एक बल्लेबाज को बाहर करना पड़ सकता है. ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम में शामिल खिलाड़ियों की बात करें तो नमन धीर बाहर हो सकते हैं उनकी जगह कुलदीप यादव या रवि बिश्नोई को मौका मिल सकता है. अगर नमन धीर भी बाहर हो जाते हैं तो टीम की ताकत पर कोई खास असर नहीं होगा. भारत के पास ऐसे टॉप-5 में ही ऐसे-ऐसे बल्लेबाज हैं जो किसी भी परिस्थिति में मैच को पलट सकते हैं.

3. हार्दिक के रहने से बैलेंस हो जाती है टीम इंडिया

अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा ऐसे पांच बल्लेबाज हैं जिनकी प्लेइंग-11 में जगह पक्की है. छठे और सातवें क्रम के लिए दो ऑलराउंडर को रखा जा सकता है. हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल टीम के नियमित दो ऑलराउंडर होंगे. हार्दिक की अनुपस्थिति में यह भूमिका शिवम दुबे या नीतीश रेड्डी निभा सकते हैं. इसके बाद टीम के पास चार स्पेशलिस्ट बॉलर को रखने का भी मौका मिल सकता है. हार्दिक के रहने पर टीम काफी ज्यादा बैलेंस हो जाती है और वह एक एक्स्ट्रा बल्लेबाज को रखने का विकल्प खोल देते हैं. हार्दिक तीसरे फास्ट बॉलर की भूमिका निभाते हैं और उनके रहते शिवम दुबे भी कई मैच खेल चुके हैं. ऐसे में टीम इंडिया में हार्दिक की भूमिका काफी अहम है. हार्दिक के नहीं रहने पर भारत को तीन ऑलराउंडर रखने पड़ जाते हैं क्योंकि उसे रन बनाने वाले प्लेयर भी चाहिए होते हैं.

4. मध्यक्रम में आक्रामकता की कमी?

वेस्टइंडीज ने 5 मैचों की सीरीज के चार मैचों में अब तक 57 छक्के लगाए हैं. वहीं, टीम इंडिया ने 41 छक्के उड़ाए हैं. वेस्टइंडीज पावर हिटिंग के लिए मशहूर है. उसने इसे साबित भी किया. सीरीज में हर 8वीं गेंद पर वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने छक्का लगाया है. भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाजों की बात करें तो श्रेयस अय्यर ने सबसे ज्यादा 9 छक्के लगाए हैं. तिलक वर्मा ने 6 और नीतीश रेड्डी ने 4 छक्के लगाए हैं. दूसरी ओर, अय्यर और तिलक के बराबर अकेले वेस्टइंडीज के मध्यक्रम के बल्लेबाज शेरफेन रदरफोर्ड ने छक्के उड़ा दिए. उन्होंने 4 मैचों में 15 सिक्स लगाए हैं. रोमारियो शेफर्ड ने भी 4 छक्के लगाए. भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने वेस्टइंडीज के बराबर ही छक्के लगाए हैं, लेकिन पूरी टीम की बात करें तो विंडीज आगे हैं. इसमें शाई होप ने 20 छक्कों से सबसे बड़ा अंतर डाला है और यह दौरा पूरी तरह उनके नाम रहा.

5. हाई स्कोरिंग ओवर में वेस्टइंडीज कैसे आगे?

इस सीरीज में एक खास बात और देखने को मिली है कि वेस्टइंडीज ने हाई-स्कोरिंग ओवर की संख्या में भारत से बाजी मारी है. उसने एक ओवर में कई बार 15 या उससे अधिक रन बनाए हैं. टीम इंडिया आक्रामक बल्लेबाजों के रहने के बावजूद ऐसा करने में पीछे रही है. इसका सीधा संबंध बल्लेबाजी के तरीके पर है. वेस्टइंडीज की टीम बड़े शॉट्स लगाने में ज्यादा भरोसा रखती है. इसके उलट भारतीय टीम विकेटों के बीच दौड़कर भी रन बनाने में लगी रहती है. वेस्टइंडीज को इसका कभी-कभी फायदा तो जरूर मिलता है, लेकिन भारत सिंगल-डबल के अलावा चौके-छक्के भी लगाता है. इसी कारण वह लगातार दो बार वर्ल्ड कप जीत पाया है. वेस्टइंडीज को लगातार बाउंड्री मारने की जल्दबाजी के कारण कई बार नुकसान झेलना पड़ा है. इस कारण उसकी पारी अचानक ढह भी जाती है.

6. अतिरिक्त गेंदबाज मिलने से क्या फायदे?

अगर किसी टीम की प्लेइंग-11 में अतिरिक्त गेंदबाज की एंट्री होती है तो कप्तान को फायदा जरूर होता है. उसे अतिरिक्त विकल्प मिल जाते हैं. अगर विशेषज्ञ गेंदबाज टीम में आता है तो वह मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभाल सकता है. हालांकि, जब विकेट फ्लैट या सामने वाले टीम का खिलाड़ी बेहतर खेल रहा होता है तो सारी योजनाएं धरी की धरी रह जाती हैं. भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ चारों मैच फ्लैट विकेट पर खेले हैं और यहां गेंदबाजों के लिए कुछ भी नहीं था. इसे कोच गौतम गंभीर ने भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि वह बल्ले और गेंद के बीच संघर्ष देखना चाहते हैं, लेकिन फ्लैट पिचों पर ऐसा नहीं हो सकता.

इस सीरीज में किसी भी गेंदबाज की टोटल इकोनॉमी रेट अब तक 8 से नीचे नहीं है. सिर्फ चार गेंदबाज ही 10 से कम की इकोनॉमी से गेंदबाजी कर पाए हैं. इनमें भारत के एक और वेस्टइंडीज के तीन गेंदबाज हैं. कुलदीप यादव, मयंक यादव और अर्शदीप सिंह जैसे गेंदबाजों ने 10 से ज्यादा की इकॉनमी रेट से गेंदबाजी की है. यह दिखाता है कि पूरी सीरीज में पिच ने बल्लेबाजों का साथ दिया है, क्योंकि ये सभी गेंदबाज अपनी कसी हुई बॉलिंग के लिए जाने जाते हैं. अगर पिच फ्लैट नहीं होती तो सभी गेंदबाज महंगे साबित नहीं होते.

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About the Author

Rohit Raj

Rohit Raj

रोहित राज एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने वाले रोहित ईटीवी, दैनिक भास्कर, जनसत्ता और अमर उजाला से होते हुए जी न्यूज के हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं और स्पोर्ट्स टीम को लीड करते हैं. रोहित कई एक्सक्लूसिव खबरें और एथलीट्स का इंटरव्यू कर चुके हैं. पत्रकारिता में 40 अंडर 40 अवॉर्ड विजेता हैं. खेलों में ज्यादा रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप, वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 और अन्य खेलों के बड़े-बड़े इवेंट को करने का अनुभव रखते हैं. ब्रेकिंग न्यूज, एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर पकड़ है. क्रिकेट के अलावा हर खेलों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश में लगे रहते हैं.
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