कोर्ट केस, गुटबाजी और भारी बवाल: एक राज्य की लड़ाई, सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर, आखिर क्रिकेट प्रशासन की गलती कौन भुगतेगा?
अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट में गुटबाजी और कोर्ट केस के कारण अंडर-19 टीम वीनू मांकड़ ट्रॉफी से बाहर हो गई है. अब 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली रणजी ट्रॉफी में टीम की भागीदारी पर भी संकट मंडरा रहा है.
भारत जैसे देश में करोड़ों लोगों की भीड़ से निकलकर नेशनल क्रिकेट टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों को कई सालों तक एड़ियां रगड़नी पड़ती है, लेकिन जब क्रिकेट की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रशासनिक संघ आपसी विवाद में उलझ जाएं, तो इसका नुकसान युवा खिलाड़ियों को उठाना पड़ता है. अरुणाचल प्रदेश में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. राज्य की अंडर-19 पुरुष टीम प्रशासनिक विवाद और कोर्ट केस के कारण वीनू मांकड़ ट्रॉफी में हिस्सा नहीं ले सकी. अब सवाल यह है कि क्या इस खींचतान के चलते राज्य की टीम रणजी ट्रॉफी से भी बाहर हो जाएगी.
अरुणाचल प्रदेश को गुरुवार को भुवनेश्वर के KIIT क्रिकेट स्टेडियम में वीनू मांकड़ ट्रॉफी के प्लेट ग्रुप में सिक्किम के खिलाफ अपना पहला मुकाबला खेलना था, लेकिन राज्य क्रिकेट संघ में चल रहे विवाद और हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण टीम मैदान पर नहीं उतर सकी. ऐसे में मुकाबले में अरुणाचल प्रदेश को हार का सामना करना पड़ सकता है और बीसीसीआई के खेलने के नियमों के मुताबिक विरोधी टीम को पूरे अंक मिल सकते हैं.
कोर्ट केस, गुटबाजी और भारी बवाल
अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) के भीतर विवाद कई जिला क्रिकेट संघों की आपत्तियों के बाद बढ़ा. लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कामले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे के छह जिला क्रिकेट संघों ने राज्य कार्यकारिणी के चुनाव में कथित नियम उल्लंघन का आरोप लगाया. इन संघों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की.
एक राज्य की लड़ाई, सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर
अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष नबाम विवेक और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी चुनौती के बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर पीठ ने संघ के कामकाज पर अंतरिम रोक लगा दी. इसके चलते राज्य क्रिकेट संघ की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि मामला अदालत में लंबित होने के कारण फिलहाल संघ के पास कामकाज संभालने वाली प्रभावी व्यवस्था नहीं है.
सैकिया के मुताबिक, सितंबर के पहले सप्ताह में मामले की सुनवाई पूरी हो गई थी, लेकिन अदालत का फैसला अभी आना बाकी है. इसी वजह से वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए टीम तैयार करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. इस विवाद का असर अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी में राज्य की भागीदारी पर भी पड़ा है.
अरुणाचल के सामने सबसे बड़ी चुनौती
अरुणाचल प्रदेश के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लेने की है. टूर्नामेंट 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है. प्लेट ग्रुप में शामिल अरुणाचल प्रदेश को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में नागालैंड के खिलाफ अपना पहला मुकाबला खेलना है. हालांकि, राज्य क्रिकेट संघ में जारी प्रशासनिक संकट के कारण टीम की भागीदारी पर अनिश्चितता बनी हुई है. देवजीत सैकिया ने भी माना कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अरुणाचल प्रदेश रणजी ट्रॉफी में खेल पाएगा या नहीं. उन्होंने कहा कि सभी लोग अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण बीसीसीआई भी सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता.
विवाद अदालत तक पहुंचा
मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े दो या तीन अलग-अलग गुट खुद को असली और वैध संगठन बता रहे हैं. आपसी विवाद अदालत तक पहुंचने के कारण राज्य में क्रिकेट गतिविधियों को संभालने वाली मान्यता प्राप्त संस्था का कामकाज प्रभावित हुआ है. सूत्र के अनुसार, मौजूदा हालात में बीसीसीआई के लिए राज्य के प्रतिनिधियों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि अरुणाचल क्रिकेट की ओर से आधिकारिक तौर पर कौन बात कर सकता है. सूत्र ने इस स्थिति की तुलना बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में पहले रहे प्रशासनिक गतिरोध से भी की, जिसके कारण वहां लंबे समय तक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी प्रभावित हुई थी.
खिलाड़ी इसकी भारी कीमत चुका रहे
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (CoA) की सिफारिशों के बाद, 2018 में अरुणाचल प्रदेश को अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ BCCI की पूर्ण सदस्यता दी गई थी. चल रही प्रशासनिक खींचतान पर नाराजगी जताते हुए सूत्र ने आगे कहा, 'जब युवा क्रिकेटरों के करियर से ज्यादा अहमियत निजी स्वार्थ और पदों की होड़ को दी जाती है, तो ऐसा ही होता है. खिलाड़ी इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं, उनका विकास रुक गया है और उनकी महत्वाकांक्षाएं बर्बाद हो रही हैं.'
सूत्र ने कहा, 'लेकिन सच तो आखिरकार सामने आएगा ही. जो लोग इस मामले के केंद्र में हैं, उन्हें इससे हो रहे नुकसान को समझना होगा और अपने निजी स्वार्थों से ऊपर अरुणाचल के युवा टैलेंट के भविष्य को रखना होगा. अगर हम अभी इन बच्चों के भविष्य के बारे में नहीं सोचेंगे, तो राज्य में क्रिकेट का भविष्य पूरी तरह खत्म हो जाएगा.'