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एशियन गेम्स 2026 का आगाज 19 सितंबर से होगा. जापान इस टूर्नामेंट को होस्ट कर रहा है, जहां टूर्नामेंट के लिए 'स्पोर्ट्स विलेज' नहीं बनाया गया है. आमतौर पर एथलीट्स के लिए स्पोर्ट्स विलेज बनता है, जहां प्लेयर्स ठहरते हैं और टूर्नामेंट का लुत्फ उठाते हैं. लेकिन जापान ने एथलीट्स के लिए कंटेनर और क्रूज की व्यवस्था की है. भारतीय एथलीट्स बेंगलुरू में कंटेनर्स में रात गुजारकर खुद को मानसिक तौर पर तैयार करने में जुटे हैं. लेकिन हर किसी के जेहन में सवाल होगा कि जापान ने आखिर क्यों 'स्पोर्ट्स विलेज' नहीं बनवाया या प्लेयर्स को होटलों में क्यों नहीं ठहराया. इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी हम आपको समझाते हैं.
एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्तूबर तक चलेंगे. आयोजकों ने प्लेयर्स को रोकने के लिए क्रूज शिप और कंटेनर्स जैसी सुविधाओं का सहारा लिया है. इसे मजबूरी भी कह सकते हैं और समझदारी भी कहा जा सकता है. ये मामला सिर्फ बजट का नहीं है बल्कि जगह की कमी और खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या से जुड़ा है. ये 3 बड़ी वजह थी, जिसके चलते जापान को यह कदम उठाना पड़ा.
एथलीट्स विलेज बनाने में अच्छी-खासी लागत लगती है. जापान ने भी पहले स्पोर्ट्स विलेज बनाने का प्लान बनाया था. लेकिन लागत और निर्माण लागत के चलते एक मोटा खर्चा निकलकर आया, जिसके बाद चापान ने फैसला बदल लिया. अब एशियन गेम्स 2026 में एक बड़ी क्रूज शिप और कंटेनर स्टाइल के लकड़ी के कमरे तैयार किए हैं. जापान की न्यूज वेबसाइट निप्पॉन डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, यह जापान में बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहली बार क्रूज शिप को होटल की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास है.
जापान के क्रूज शिप का नाम कोस्टा सेरेना है. यह करीब 290 मीटर लंबी इटालियन जहाज है. इसमें लगभग 1500 कमरे हैं, इसके अलावा जिम, खुले डेक और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं भी हैं. आयोजकों इस व्यवस्था से प्लेयर्स के बीच बातचीत और आपसी मेल-जोल भी बढ़ावा मिलेगा. खिलाड़ियों और अधिकारियों की संख्या का बढ़ना भी इस फैसले के पीछे वजह है. शुरुआत में करीब 15,000 खिलाड़ी और अधिकारी आने की उम्मीद थी, जो खुद ओलंपिक से भी ज्यादा है. लेकिन ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) ने आंकड़ा बढ़ाकर लगभग 17,000 कर दिया. आयोजकों के पास न तो पर्याप्त जगह है और न ही बजट, जिसके चलते ये बीच का रास्ता निकाला गया.
भारत के खिलाड़ी भी कंटेनर में रहने के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार कर रहे हैं. प्लेयर्स जापान में जाकर किसी तरह का तनाव न महसूस करें, इसलिए उनके लिए कंटेनर्स में रुकने की व्यवस्था की गई है. स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बेंगलुरु में दो एयर-कंडीशंड यूनिट बनाए हैं, प्रत्येक 40 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा. इनमें दो छोटे बेडरूम, बाथरूम, छोटा किचन और टीवी-म्यूजिक सिस्टम वाला लिविंग एरिया है.