एशियन गेम्स का कंटेनर से कनेक्शन, क्यों लोहे के पिंजरे में रात गुजारने को मजबूर हैं एथलीट्स? ये है वजह
खेल की दुनिया में प्लेयर्स को वीआईपी सुविधा दी जाती है. लेकिन एशियन गेम्स से पहले एथलीट्स एक लोहे के कंटेनर में रात गुजार रहे हैं. ये खबर सुर्खियों में है, लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है हम आपको समझाते हैं.
Asian Games 2026: एशियन गेम्स का शोर तेज है, 19 सितंबर से इस टूर्नामेंट का आगाज हो जाएगा. लेकिन इससे पहले एथलीट्स की कंटेनर के साथ फोटो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रही है. अक्सर प्लेयर्स के रुकने की व्यवस्था 5 स्टार होटल में देखने को मिलती है, लेकिन एशियन गेम्स की तैयारी में ही खिलाड़ी कंटेनर्स में रात गुजार रहे हैं. कई सवाल है, कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि खिलाड़ियों को लोहे के डिब्बे में रात गुजारने पर मजबूर होना पड़ रहा है. इसके पीछे का पूरा सच हम आपको समझाते हैं.
लगभग 7 फीट लंबे कंटेनर में एथलीट्स के जरूरत के सामान रखने की जगह है. इस कंटेनर में 5 स्टार होटल जैसी सुविधा नहीं है, जिसके चलते कुछ एथलीट्स को असहज भी महसूस हो सकता है. लेकिन कंटेनर में रुकना कोई सजा नहीं, बल्कि ये खास तैयारी है. पटियाला में स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनएसएनआईएस) में कुछ एथलीट्स कंटेनर में रहकर जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए आदत डाल रहे हैं.
क्यों हो रही ऐसी प्रैक्टिस?
अब सवाल है कि ऐसा क्या है कि एथलीट्स को कंटेनर में रुकना पड़ रहा है. एशियन गेम्स का कनेक्शन कंटेनर के साथ है. जापान में एशियन गेम्स के लिए एथलीट्स के रुकने की व्यवस्था होटल रुम की जगह कंटेनर में की गई है. जिसके चलते एथलीट्स अभी से लोहे के पिंजरे में रहने की आदत डाल रहे हैं. आमतौर पर टूर्नामेंट में स्पोर्ट्स विलेज होता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. खिलाड़ियों के ठहरने का इंतजाम कंटेनरों, क्रूज और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं में किया जा रहा है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले SAI के उप महानिदेशक
साइ के उप महानिदेशक विनीत कुमार ने एनएसएनआईएस में पत्रकारों से बातचीत में इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा, "2 साल पहले ही तय हुआ था कि एशियन गेम्स के लिए प्लेयर्स के ठहरने के लिए स्पोर्ट्स विलेज नहीं होगा. रुकने की व्यवस्था कंटेनर, क्रूज और विकल्पों में की जाएगी. इसके बाद ही खेल मंत्री ने विचार किया था, कि प्लेयर्स को भी पहले से इसी तरह के माहौल में रहने के लिए सहज बनाना चाहिए. इसके लिए एक तरह के सिमुलेटर जैसी व्यवस्था तैयार करने की योजना बनाई गई थी."
विनीत कुमार एनएसएनआईएस पटियाला के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक भी हैं. उन्होंने समझाया कि प्लेयर्स को कंटेनर में रोकने का मकसद है कि खिलाड़ियों को नए तरह के आवास में रहने पर घुटन या असहजता महसूस न हो. वे इस बात से हैरान न हों कि उन्हें किस तरह के आवास में ठहराया गया है या उन्हें वहां क्रूज या कंटेनर्स में रुकने से कोई मानसिक दबाव न महसूस हो.