भारतीय खेल और राजनीति की साझा दुनिया में ऐसे बहुत कम व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने मैदान पर देश को विश्व स्तर पर गौरव दिलाने के बाद राजनीतिक में भी लंबी पारी खेली हो. परगट सिंह एक ऐसा ही प्रमुख नाम हैं. भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान, पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित परगट सिंह ने अब पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के नए अध्यक्ष के रूप में एक बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी संभाली है. अंतरराष्ट्रीय हॉकी इतिहास के सबसे बेहतरीन फुल बैक डिफेंडरों में गिने जाने वाले परगट अब पंजाब में कांग्रेस की कैप्टेंसी करेंगे.
खेल की उपलब्धियों के अलावा परगट सिंह ने पंजाब पुलिस में एसपी (पुलिस अधीक्षक) के रूप में सेवा दी है. पंजाब में जालंधर के पास मिट्ठापुर गांव में जन्मे परगट सिंह का हॉकी करियर बेहद प्रेरणादायक रहा है. 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में वह भारतीय हॉकी टीम की रक्षापंक्ति के सबसे मजबूत स्तंभ थे. मैदान पर शानदार स्टिक-वर्क, तेज गति और बेहतरीन रणनीतिक समझ के साथ उन्होंने विश्व हॉकी में खुद को एक मजबूत और सम्मानित फुल-बैक डिफेंडर के रूप में स्थापित किया.
किन-किन ओलंपिक खेलों में की भारतीय टीम की कप्तानी?
परगट सिंह ने कई ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. वह 1992 बार्सिलोना ओलंपिक और 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारतीय राष्ट्रीय टीम के कप्तान रहे. इससे पहले वह 1988 सियोल ओलंपिक, 1985 पर्थ चैंपियंस ट्रॉफी (जहां उन्होंने वेस्ट जर्मनी के खिलाफ प्रसिद्ध वापसी मैच खेला था) और 1986 कराची जैसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के जरिए अपनी पहचान बना चुके थे. भारतीय खेलों में उनके अमूल्य योगदान और अनुकरणीय नेतृत्व को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार (1989) और पद्म श्री (1998) से सम्मानित किया. खेल इतिहासकार और दिग्गज खिलाड़ी उन्हें हॉकी इतिहास के सबसे महान आधुनिक डिफेंडरों में गिनते हैं.
खेल के मैदान से राजनीति के अखाड़े में कैसे रखा कदम?
प्रतिस्पर्धी खेलों से संन्यास लेने और पंजाब पुलिस में एसपी (SP) के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद परगट सिंह ने इस विश्वास के साथ सार्वजनिक सेवा और राजनीति में कदम रखा कि व्यवस्था में वास्तविक सुधार और जमीनी विकास के लिए शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी आवश्यक है. उन्होंने जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में काम करते हुए वर्षों में महत्वपूर्ण विधायी और प्रशासनिक भूमिकाएं निभाई हैं. पंजाब की राजनीति में उनकी पहचान एक बेबाक और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में है, जो अपने सिद्धांतों पर निडरता से आवाज उठाते हैं.
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पार्टी आलाकमान ने परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. ऐसे समय में जब राज्य का राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, यह नियुक्ति उनके राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है. जल्द ही पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. हॉकी टर्फ पर अंतरराष्ट्रीय मैचों में टीमों का नेतृत्व करने का दशकों का अनुभव रखने वाले परगट सिंह के सामने अब पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट कर पार्टी को आगे ले जाने की बड़ी चुनौती है.