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Explained: टिकटॉक, फ्लैश लाइट और शोर-शराबा... यूएस ओपन क्यों बन गया 'चिड़ियाघर'? कंटेंट क्रिएटर्स पर बैन लगाएगा विंबलडन?

यूएस ओपन में इन्फ्लुएंसर्स के हंगामे के बाद विंबलडन सख्त नियम लागू करने की तैयारी में है. कोको गॉफ और एड्रियन मन्नारिनो सहित स्टार खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई है. ऐसे में विंबलडन ने क्यों इन्फ्लुएंसर्स को लेकर कड़े नियम बनाने की घोषणा की है?

Explained: टिकटॉक, फ्लैश लाइट और शोर-शराबा... यूएस ओपन क्यों बन गया 'चिड़ियाघर'? कंटेंट क्रिएटर्स पर बैन लगाएगा विंबलडन?
Image Credit: AI Generated Image

साल का चौथा ग्रैंडस्लैम यूएस ओपन इस बार अपने खेल से ज्यादा विवादों के कारण सुर्खियों में बना हुआ है. कभी टिकटॉक और शोर-शराबे ने खिलाड़ियों को परेशान किया, तो कभी किसी ने स्टेडियम में भी गांजा फूंक दिया. यूएस ओपन में आए इस तरह के व्यवधानों के बाद विंबलडन ने सीख लेनी शुरू कर दी है. न्यूयॉर्क में प्लेयर्स को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है और अब विंबलडन नहीं चाहता कि लंदन में इस तरह की समस्या का सामना पड़े. वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ अधिक प्रतिबंधात्मक और सख्त रुख अपनाने की योजना बना रहा है.

मैचों के दौरान लगातार होने वाली अशांति ने खिलाड़ियों के बीच बड़े टेनिस टूर्नामेंट्स के बदलते माहौल को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है. प्रेस एसोसिएशन के अनुसार, ''विंबलडन का आयोजन करने वाला ऑल इंग्लैंड क्लब आगामी 2027 के टूर्नामेंट के लिए इन्फ्लुएंसर्स या कंटेंट क्रिएटर्स को अलग से कोई आधिकारिक मान्यता (एक्रिडिटेशन) श्रेणी नहीं देगा. इसके अतिरिक्त, सुरक्षाकर्मी रिंग लाइट और ऐसे अन्य उपकरणों को जब्त करने के लिए तैयार रहेंगे, जो खेल में बाधा डालने या खिलाड़ियों का ध्यान भटकाने में सक्षम हैं.

दर्शकों को जोड़ने का प्रयोग क्यों भारी पड़ा?

यूएस ओपन में दर्शकों द्वारा मैच के दौरान तेज रोशनी का इस्तेमाल करने, चिल्लाने और पॉइंट्स खेले जाने के दौरान वीडियो फिल्माने जैसी कई घटनाएं देखी गईं, जिससे खिलाड़ी काफी नाराज थे. न्यूयॉर्क के इस ग्रैंड स्लैम ने नई पीढ़ी और युवा दर्शकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से पारंपरिक मीडिया के साथ-साथ लगभग 100 कंटेंट क्रिएटर्स को आधिकारिक रूप से आमंत्रित कर मान्यता दी थी. हालांकि, इस प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि सोशल मीडिया के जरिए मिलने वाले प्रचार-प्रसार और एक बड़े टेनिस टूर्नामेंट की गरिमा व शिष्टाचार के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है.

कोको गॉफ के बयान से मची सनसनी

महिला टेनिस की स्टार खिलाड़ी कोको गॉफ ने स्पष्ट किया कि खेल को आगे बढ़ाना अच्छा है, लेकिन इन्फ्लुएंसर्स के कुछ आपत्तिजनक व्यवहारों को बदलने की जरूरत है. 3 सितंबर को पाउला बडोसा पर अपनी जीत दर्ज करने के बाद गॉफ ने कहा, ''मुझे खेल में एक नए वर्ग के दर्शकों का आना पसंद है. मुझे इन्फ्लुएंसर्स से कोई निजी समस्या नहीं है और मैं उनमें से कुछ को ऑनलाइन फॉलो भी करती हूं.'' हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टेनिस कोर्ट में कदम रखने वाले हर व्यक्ति को वहां के विशेष नियमों और मर्यादा को समझना चाहिए. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जो ब्रांड मेहमानों को आमंत्रित करते हैं, वे पहली बार आने वाले दर्शकों को नियमों से अवगत कराने की जिम्मेदारी उठाएं.

कैमरे के फ्लैश और सोशल मीडिया वीडियो से परेशानी

गॉफ के अनुसार, असली समस्या इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी नहीं, बल्कि खेल के शिष्टाचार से अनजान लोगों का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है. उन्होंने कहा, ''मैं बेहद उदार खिलाड़ियों में से हूं, लेकिन मैच के दौरान फ्लैश फोटोग्राफी बिल्कुल बंद होनी चाहिए क्योंकि इससे हमें परेशानी होती है.'' गॉफ ने आगे कहा कि दर्शकों को बहुत जोर से बात करने से बचना चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हालांकि ऑर्थर ऐश एक शोरगुल वाला कोर्ट है और वह इसकी आदी हैं, लेकिन मैच के पॉइंट्स के बीच में वीडियो या टिकटॉक के लिए होठ हिलाना और अभिनय करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कैमरा फ्लैश खिलाड़ियों के खेल को बिगाड़ने के साथ-साथ वहां उपस्थित अन्य दर्शकों के मैच देखने के अनुभव को भी खराब करता है.

यूएस ओपन बना 'चिड़ियाघर'

यूएस ओपन के अनियंत्रित माहौल की आलोचना करने वालों में फ्रांस के अनुभवी खिलाड़ी एड्रियन मन्नारिनो भी शामिल थे. उन्होंने स्टैंड्स में दर्शकों की बेधड़क आवाजाही, हर तरफ फैले शोर और बाहरी कोर्ट्स पर आने वाली गांजे (मारिजुआना) की गंध पर गहरा असंतोष व्यक्त किया. मन्नारिनो ने कहा, ''पॉइंट्स खेले जाने के दौरान भी दर्शकों को घूमने-फिरने की छूट दी जा रही है. टूर्नामेंट प्रशासन इसे नजरअंदाज कर रहा है, जो टेनिस के हित में नहीं है। सच तो यह है कि यह माहौल अब एक चिड़ियाघर जैसा बनता जा रहा है.''

इंग्लैंड में पॉलिसी रिव्यू पर जोर

इसके विपरीत, विंबलडन हमेशा से अपनी शांत, अनुशासित और औपचारिक परंपराओं के लिए जाना जाता है. वहां दर्शकों के आचरण को लेकर बेहद कड़े नियम लागू रहते हैं. ऑल इंग्लैंड क्लब हर साल अपनी पॉलिसी को रिव्यू करता है, जिसमें सोशल मीडिया को लेकर उसका नजरिया भी शामिल है. इसकी एंट्री की शर्तें पहले से ही उन चीजों पर रोक लगाती हैं जो खेल में रुकावट डाल सकती हैं, जिसका मतलब है कि कंटेंट बनाने वाले इक्विपमेंट पर बिना किसी खास इन्फ्लुएंसर पॉलिसी के भी रोक लग सकती है.

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About the Author

Rohit Raj

Rohit Raj

रोहित राज एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने वाले रोहित ईटीवी, दैनिक भास्कर, जनसत्ता और अमर उजाला से होते हुए जी न्यूज के हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं और स्पोर्ट्स टीम को लीड करते हैं. रोहित कई एक्सक्लूसिव खबरें और एथलीट्स का इंटरव्यू कर चुके हैं. पत्रकारिता में 40 अंडर 40 अवॉर्ड विजेता हैं. खेलों में ज्यादा रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप, वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 और अन्य खेलों के बड़े-बड़े इवेंट को करने का अनुभव रखते हैं. ब्रेकिंग न्यूज, एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर पकड़ है. क्रिकेट के अलावा हर खेलों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश में लगे रहते हैं.
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