शनि के नाम से ही लगता है डर? जानिए आपकी राशि पर कब लगेगी साढ़ेसाती-ढैय्या, देखें 12 राशियों का पूरा हिसाब
शनि को ज्योतिष में न्याय का देवता कहा गया है, कड़ी सजा देने के उनकी खासियत के कारण लोग शनि के नाम से डर जाते हैं. लेकिन हर व्यक्ति को अपने जीवन में कभी न कभी शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या झेलनी पड़ती है. अपनी राशि के आधार पर जानिए आप पर साढ़ेसाती-ढैय्या का साया कब रहेगा?
शनि देव का नाम ही डरने के लिए काफी है. राजा को भिखारी और भिखारी को राजा बनाने वाले इस ग्रह को सबसे ज्यादा डर उनकी साढ़ेसाती या ढैय्या को लेकर रहता है. साढ़ेसाती और ढैय्या के अनुसार लगती हैं. इस समय मेष, कुंभ और मीन राशि पर साढ़ेसाती चल रही है. वहीं सिंह और धनु पर ढैय्या का साया है. लेकिन बाकी राशियां कब साढ़ेसाती व ढैय्या की गिरफ्त में आएंगी व कब मुक्त होंगी. साथ ही साढ़ेसाती-ढैय्या कब लगती है, यह किस राशि के लिए ज्यादा मुश्किल और किसके लिए आसान रहती है. साथ ही इससे बचाव के उपाय समेत कई सवालों के जवाब.
साढ़ेसाती-ढैय्या कब लगती है?
शनि जिस राशि में हो उससे ठीक पहले वाली राशि, उसी राशि और उसके बाद की राशि पर साढ़ेसाती लगती है. जैसे अभी शनि राशिचक्र की आखिरी राशि मीन में हैं, लिहाजा मीन से पहले आने वाली राशि कुंभ और मीन के बाद राशिचक्र की पहली राशि मेष पर साढ़ेसाती चल रही है.
वहीं शनि जिस राशि में हों उससे चौथी और आठवी राशि पर ढैय्या लगती है. जैसे अभी शनि मीन में हैं तो उससे चौथी और आठवी राशि सिंह व धनु पर ढैय्या चल रही है.
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किस राशि पर कब रहेगी ढैय्या?
शनि हर ढाई साल में राशि बदलते हैं, इसलिए साढ़ेसाती साढ़े 7 साल की और ढैय्या ढाई साल की होती है. साढ़ेसाती में ढाई-ढाई साल के 3 चरण उस राशि वाले लोगों को झेलने पड़ते हैं. अगले 15 साल में होने वाले शनि गोचर की भी बात करें तो उसके अनुसार सभी 12 राशियों को कब साढ़ेसाती और ढैय्या झेलनी पड़ेंगी, उसे हम नीचे दी गई इंफोग्राफिक टेबल से समझ सकते हैं. साथ ही जिन राशियों पर अभी साढेसाती-ढैय्या है या वे हाल के वर्षों में मुक्त हुए हैं उनका भी जिक्र इस टेबल में है.
किस राशि के मित्र किसके शत्रु हैं शनि?
हर ग्रह के शत्रु और मित्र ग्रह होते हैं. इससे मतलब है कि शत्रु ग्रह वाली राशियों को अशुभ और मित्र ग्रह वाली राशियों को शुभ फल देते हैं. शनि, बुध और शुक्र ग्रह के मित्र हैं, इस कारण वृष, मिथुन, कन्या, तुला राशि वालों को शुभ फल देते हैं. साथ ही मकर और कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि हैं, वे इन भी कृपा करते हैं.
वहीं शनि, सूर्य, चंद्र और मंगल ग्रह के शत्रु हैं इसलिए इनसे संबंधित राशियों को साढ़ेसाती व ढैय्या के दौरान खासा कष्ट देते हैं. बाकी कुंडली में शनि की स्थिति और महादशा-अंर्तदशा के आधार पर भी साढ़ेसाती-ढैय्या में लाभ-हानि होती है.
मेष - बेहद संघर्षपूर्ण समय
वृष - अच्छी होती है.
मिथुन - अपेक्षाकृत अच्छी होती है
कर्क - कष्टपूर्ण समय
सिंह - बेहद संघर्ष, तनाव, हानि
कन्या - मित्रवत फल देती है
तुला - शनि उच्च के होते हैं, लिहाजा बेहद शुभ.
वृश्चिक - मुश्किल समय.
धनु - मुश्किल समय.
मकर - ज्यादा कष्ट नहीं.
कुंभ - अपेक्षाकृत अच्छी.
मीन - कष्टपूर्ण समय.
इन लोगों को तंग नहीं करते शनि
जिन लोगों की कुंडली में शनि शुभ हों, उन्हें साढ़ेसाती-ढैय्या में ज्यादा कष्ट नहीं देते हैं. साथ ही जो लोग झूठ, चालाकी, धोखा, नशे की लत जैसे गलत कामों से दूर रहते हैं. मजदूर वर्ग, महिलाओं, जीवों को नहीं सताते हैं. ऐसे लोगों को शनि तंग नहीं करते हैं. बल्कि मेहनती, अनुशासित, ईमानदार, गरीबों की मदद या सेवा करने वाले लोगों को शनि खूब पैसा, सम्मान, पद देते हैं.
शनि के अशुभ फल से बचाव के उपाय
- शनिवार को सरसों तेल का दान.
- पीपल पर जल और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाना.
- रोज हनुमान चालीसा का पाठ.
- अच्छे कर्म करना.
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(Disclaimer: यह जानकारी वैदिक पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है. शनि के वक्री-मार्गी होने से तिथियों में मामूली अंतर संभव है. किसी भी उपाय से पहले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें.)