कन्या-मकर समेत 4 राशियां ऐसी हैं, जिन पर जल्द ही शनि की कृपा होने वाली है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 की शाम 07:28 बजे शनि रेवती नक्षत्र से निकलकर अपने ही नक्षत्र उत्तर भाद्रपद में प्रवेश करेंगे जहां वह 20 जनवरी तक रहेंगे. इसके बाद इसी नक्षत्र के अगले चरण में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, से करीब 3 महीने का समय 4 राशि वालों की आर्थिक स्थिति, संपत्ति, कामकाज और व्यक्तिगत जीवन के लिहाज से सकारात्मक रह सकता है.
शनि कुछ महीनों के अंतराल पर नक्षत्र परिवर्तन करते हैं लेकिन अक्टूबर का नक्षत्र परिवर्तन इसलिए विशेष है क्योंकि इस बार शनि उसी उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिसके वे स्वामी हैं. इसलिए उनकी ताकत बढ़ेगी, जिससे वे कुछ राशियों को शुभ और कुछ को अशुभ फल देंगे. जानिए शुभ फल पाने वाली 4 लकी राशियां कौन-सी हैं.
वृषभ राशि वाले लोगों के लिए शनि ऐसा कोई महत्वपूर्ण काम पूरा करवा सकते हैं, जिसे करने की योजना वे लंबे समय से बना रहे थे. जैसे- संपत्ति से जुड़ी डील, करियर में बदलाव आदि. साथ ही इन लोगों की आर्थिक-शारीरिक समस्याएं और तनाव भी दूर होगा. निजी जीवन को लेकर नई उम्मीद जागेगी. घर में खुशी का माहौल रहेगा.
कन्या राशि के शादीशुदा लोगों और स्टूडेंट्स के लिए समय विशेष शुभ है. जो स्टूडेंट्स बड़े कॉम्पटीटिव एग्जाम या इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें सफलता मिल सकती है, लिहाजा मेहनत में कमी न आने दें. वहीं पारिवारिक जीवन खुशहाल रहेगा. यादगार ट्रिप पर जा सकते हैं. मेहनत का फल मिलेगा.
तुला राशि वालों के लिए तो शनि का यह नक्षत्र गोचर किसी वरदान से कम नहीं है. इस समय भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. छोटे से काम के भी बड़े लाभ मिलेंगे. आपकी तारीफ होगी. सीनियर्स आपको सपोर्ट करेंगे. शारीरिक-मानसिक सेहत में सुधार होगा.
मकर राशि के स्वामी शनि हैं और वे अपने ही नक्षत्र में रहेंगे. इसका डबल बेनिफिट मकर राशि वालों को मिल सकता है. आपके सोचे हुए काम पूरे होंगे. जो लोग विदेश जाने की योजना बना रहे थे, वो इस समय पूरा हो सकती है. अपना कारोबार दूर तक फैलाना चाहते हैं, वह योजना भी सफल हो सकती है.
(Disclaimer: यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं एवं ग्रह गोचर की व्याख्याओं पर आधारित है. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें, न कि किसी निश्चित परिणाम या भविष्यवाणी के दावे के रूप में. किसी भी व्यक्ति पर ग्रह गोचर का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा, अंतर्दशा तथा अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.)