गांधी जी के राजयोग: सत्य, संयम, संघर्ष...गांधी जी की कुंडली के ग्रहों का गजब मेल, जिसने उन्हें बनाया जननेता और आंदोलनकारी
महात्मा गांधी महान हुए और उनके कामों को दुनिया आज भी सराह रही है. 2 अक्टूबर गांधी जयंती के मौके पर उनकी जन्म कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं और जानते हैं वो कौनसे योग, ग्रह-नक्षत्र थे, जो उनके व्यक्तित्व और कामों को उनसे जोड़ते हैं.
2 अक्टूबर को हर साल देश महात्मा गांधी की जयंती मनाता है. इतिहास में उनका नाम सत्य, अहिंसा, जनआंदोलन और आजादी की लड़ाई से जुड़ा है. वे बेमिसाल जननेता और आंदोलनकारी बने, देश को आजादी दिलाने में अहम रोल निभाया, बल्कि उन्होंने अहिंसा की एक खास विचारधारा को भी जन्म दिया. ज्योतिषीय दृष्टि से उनकी जन्म कुंडली का विश्लेषण करने पर कुछ ऐसे योग दिखाई देते हैं, जिन्हें ज्योतिषी उनके व्यक्तित्व, लोगों से जुड़ने की क्षमता और सेवा भाव से जोड़कर देखते हैं. ज्योतिषाचार्य मनित वर्मा से जानते हैं महात्मा गांधी की कुंडली का विश्लेषण.
मालव्य राजयोग और बुध-मंगल का कमाल
ऐस्ट्रोलॉजर मनित वर्मा कहते हैं कि गांधी जी का चार्ट देखते हुए सबसे पहले उनका तुला लग्न नोटिस होता है. शुक्र अपनी ही राशि में लग्न में है, साथ में बुध और मंगल भी हैं. इससे लोगों से बात करने का तरीका, अपनी बात समझाना और उसके लिए खड़े होना, ये तीनों चीजें साथ आती हैं. शुक्र यहां मालव्य महापुरुष योग भी बना रहा है, जो उनकी पब्लिक डीलिंग और लोगों पर प्रभाव को समझने में मदद करता है.
जिंदगी पर प्रभाव - शानदार कम्युनिकेशन स्किल, लोगों की नब्ज पहचानकर उनसे बात करने की कला, चमत्कारिक व्यक्तिव जिसके पीछे लोग खिंचे चले आएं.
सूर्य-चंद्र और राहु ने बनाया आंदोलनकारी
गांधीजी की कुंडली में 10वें भाव का स्वामी चंद्रमा अपनी ही राशि कर्क में 10वें भाव में है. राहु भी इसी भाव में स्थित है. ज्योतिषीय नजरिए से 10वें भाव का यह जोर उनके काम को निजी दायरे से आगे ले जाकर बड़े जनसमूह से जोड़ने का संकेत देता है. गुरु की लग्न पर दृष्टि उनके काम में नैतिकता और मार्गदर्शक की भूमिका के पहलू को भी जोड़ती है.
कुंडली में 11वें भाव का स्वामी सूर्य बारहवें भाव में है. सूर्य का राशि स्वामी बुध लग्न में दूसरे भाव के स्वामी मंगल के साथ बैठा है. इस संबंध को लाभ और संसाधनों के जनहित से जुड़ने के रूप में पढ़ा जा सकता है.
जिंदगी पर प्रभाव - गांधी जी ने अपना तन-मन-धन, यानी कि पूरा समय, मेहनत और एनर्जी जनता के लिए दी और जनहित को ही अपने जीवन का मकसद बना लिया.
शनि ने दिया संघर्ष
इस विश्लेषण में पितृकारक माने गए शनि दूसरे भाव में वृश्चिक राशि में हैं. दूसरा भाव भोजन, संसाधनों और रोजमर्रा की जरूरतों से भी जुड़ा है. गांधीजी ने नमक सत्याग्रह के जरिए नमक पर लगे टैक्स को आम लोगों के जीवन और अधिकारों का मुद्दा बनाया. ज्योतिषीय दृष्टि से शनि और दूसरे भाव के इस संबंध को उनके संघर्ष, सादगी और धैर्य-संयम के साथ लंबे समय तक अपने सिद्धांतों पर टिके रहने के पहलू से जोड़कर देखा जा सकता है.
जिंदगी पर प्रभाव - लोगों की मूलभूत जरूरत नमक के लिए सत्याग्रह, अनशन, संघर्ष और आंदोलन के जरिए न्याय के लिए लड़ना. संयम रखते हुए अपने लक्ष्य पर टिके रहना.
शुक्र ने दी विदेश यात्रा
1893 में शुक्र और शनि की अहम दशा के दौरान वह दक्षिण अफ्रीका गए. साथ ही दशमांश कुंडली में कुंभ लग्न है. यहां के ग्रह उनके करियर का कनेक्शन आइडियाज, प्रिंसिपल्स और कम्युनिकेशन से बनाते हैं. वहीं दूसरी ओर शनि अपनी राशि कुंभ में 12वें घर में है, जो विदेशी धरती पर लंबा संघर्ष दिखाता है. भारत आने के बाद उनके जीवन में चंद्रमा और सूर्य की दशा चलती है. यह उन्हें जनता से जोड़ती है और लीडर बनाती है.
जिंदगी पर प्रभाव - गांधी को बड़े पब्लिक मूवमेंट से जोड़ा और लीडर की भूमिका में रहे.
ज्योतिषाचार्य मनित वर्मा कहते हैं कि मुझे इस चार्ट की सबसे खास बात यही लगती है कि उनकी जिंदगी, काम, सेवा भाव और सामाजिक जीवन अलग-अलग नहीं थे. बल्कि उन्होंने अपनी बात से लोगों को जोड़ा, उनके लिए खड़े हुए और लोगों की जिंदगी में बेहतरी लाने को ही अपनी निजी जिंदगी का मकसद बना लिया.
(Disclaimer: यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और जन्म कुंडली की व्याख्या पर आधारित है. ग्रहों की स्थिति और योगों को लेकर अलग-अलग ज्योतिषियों की अलग राय हो सकती है. Zee News इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता.)