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कुंडली में छिपे 12 घरों का खेल, पहला घर बिगड़ा तो जिंदगी बिगड़ी! अपनी किस्मत खुद चेक कर लो

12 घरों का असली मतलब क्या है और क्यों पहला घर बिगड़ने से पूरी जिंदगी बिगड़ जाती है. ज्‍योतिष की नॉलेज सीरीज में कुंडली के इन घरों का महत्‍व और इनका आपकी जिंदगी पर असर समझिए.

कुंडली में छिपे 12 घरों का खेल, पहला घर बिगड़ा तो जिंदगी बिगड़ी! अपनी किस्मत खुद चेक कर लो
Image Credit: कुंडली के 12 भाव, उनका जीवन से कनेक्‍शन, जिसमें पहले भाव यानी लग्‍न भाव का सबसे ज्‍यादा महत्‍व है. (Photo: AI)

कुंडली कागज का टुकड़ा भर नहीं होती है. इसमें आपके अतीत से भविष्‍य तक का लेखा-जोखा होता है. कुंडली को यदि समझने की बात करें तो इसकी पहली सीढ़ी होती है, कुंडली के 12 भाव. कुंडली में ऊपर ही एक चक्र नजर आता है जिसमें 12 खाने बने होते हैं. इन्‍हें ज्‍योतिष में 12 घर या भाव कहा जाता है. हर भाव का संबंध आपके जीवन के किसी न किसी क्षेत्र से होता है. आसान भाषा में कहें तो इन्‍हें 12 कमरों वाला घर समझिए. जिसके हर कमरे में कुछ न कुछ रखा है. जैसे एक कमरे में पैसा रखा है, एक में शादी, एक में नौकरी, एक में दुश्‍मन आदि.

12 भाव और उनका संबंध

कुंडली के 12 भाव और उनका जीवन के किस क्षेत्र से संबंध है, जानिए.

पहला घर - लग्न भाव 
ये आप खुद हैं, यानी कि आपका शरीर, आपकी सोच, आपका स्वभाव, आपका आत्‍मसम्‍मान.

दूसरा घर - धन भाव 
पैसे, परिवार, वाणी का भाव है.

तीसरा घर - पराक्रम भाव 
साहस-हिम्मत, छोटे भाई-बहन, कम्‍युनिकेशन, मेहनत का भाव है.

चौथा घर - सुख भाव 
मां, अपना घर, गाड़ी, जमीन का भाव है.

पांचवां घर - संतान भाव
प्‍यार, बच्चे, पढ़ाई, पूर्व जन्‍मों के पुण्‍य का भाव है.

छठा घर - शत्रु भाव
बीमारी, कर्ज, दुश्मन और नौकरी में आने वाली समस्‍याओं का भाव है.

सातवां घर - विवाह भाव 
शादी, बिजनेस पार्टनर, शादी के समय विवाह गुण मिलान के समय इस भाव का भी विश्‍लेषण करना चाहिए.

आठवां घर - आयु भाव
उम्र, मृत्‍यु, अचानक धन, आकस्मिक होने वाली घटनाओं का भाव है.

नौवां घर - भाग्य भाव
किस्मत, पिता, धर्म, लंबी यात्राओं का भाव.

दसवां घर - कर्म भाव
नौकरी, व्यापार, इज्जत, सरकार से जुड़ा भाव.

ग्यारहवां घर - लाभ भाव
कमाई, दोस्त, इच्छा पूर्ति का भाव.

बारहवां घर - व्यय भाव 
खर्च, विदेश यात्रा, नींद, अस्‍पताल का खर्च और मोक्ष का भाव है.

पहला घर सबसे अहम क्‍यों?

कुंडली के पहले भाव या पहले घर को सबसे अहम माना गया है, जिसे लग्‍न कहते हैं. यह आपकी कुंडली की नींव है. अगर ये कमजोर है तो पूरी कुंडली ही कमजोर होगी. लग्‍न भाव आपका शरीर, आत्‍मविश्‍वास और आपका व्‍यक्तिव है.

जिंदगी की अधिकांश लड़ाइयां और सफलताएं पाने का प्रमुख आधार यही चीजें होती हैं. यदि लग्‍ज मजबूत हो तो व्‍यक्ति सारे दुख-संघर्ष पार कर जाता है. लेकिन पहला भाव या लग्‍न कमजोर या पीड़ित हो तो करोड़पति व्‍यक्ति भी सुखी नहीं रह पाता है. उसे कोई बड़ा दुख या समस्‍या बनी रहती है.

लग्‍न कमजोर या मजबूत?

इसे समझने के लिए ऊपर दिए गए थंबनेल चार्ट को देखें. इसमें सबसे ऊपर बीचों-बीच जो घर है, वहीं 'प्रथम भाव - लग्न' लिखा हुआ है. आपकी असल कुंडली में इसी पहले घर के अंदर 1 से 12 के बीच कोई एक नंबर लिखा होता है या वहां राशि का चिह्न बना होता है. यह नंबर या राशि चिह्न ही आपकी लग्न राशि है. अब इस राशि का जो भी मालिक ग्रह होगा, उसे ही पहले घर का स्वामी (लग्नेश) माना जाएगा. बस इसी ग्रह की स्थिति से तय होता है कि आपका लग्न कितना मजबूत है.

मजबूत लग्‍न : अगर पहले भाव में शुभ ग्रह गुरु, शुक्र, बुध बैठे हैं तो समझिए नींव मजबूत है.
कमजोर लग्‍न: यदि पहले भाव में कोई ग्रह नीच का होकर बैठा हो, या वहां राहु-केतु का प्रभाव हो, तो लग्न कमजोर होता है. यदि पहले घर का स्वामी (लग्नेश) कुंडली के 6, 8, या 12वें भाव में चला जाए या नीच का हो जाए, तो भी लग्न को कमजोर माना जाता है.
खाली घर: अगर कुंडली के पहले भाव में कोई भी ग्रह नहीं लिखा है तो इसका मतलब है वह खाली है. ऐसी स्थिति में कुंडली में जो आपकी लग्‍न राशि है, उसके स्‍वामी ही आपके पहले भाव के स्‍वामी होंगे.

हालांकि इसके अलावा भी कई पहलू होते हैं, जिनसे लग्‍न का कमजोर होना या मजबूत होना निर्भर करता है.

(Disclaimer: जानकारी वैदिक ज्योतिष के सामान्य सिद्धांतों और मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है, किसी भी प्रकार का अंधविश्वास बढ़ाना नहीं. किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अपनी कुंडली की सटीक जानकारी के लिए किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें.) 

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About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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