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करवा चौथ व्रत पर महिलाएं लाल पोशाक पहनती हैं, महावर-मेहंदी लगाती हैं और इसी तरह सुहागिन इस दिन सोलह शृंगार करती हैं. महिलाएं करवा चौथ व्रत पर दिनभर का निर्जला व्रत रखती हैं और शाम चंद्र दर्शन कर व्रत खोलती हैं. करवा चौथ पर शृंगार करने से वैवाहिक जीवन में सुख-सौभाग्य बढ़ता है. सुहागिन महिलाओं के सोलह शृंगार का महत्व क्या है, ज्योतिष अनुसार, सिंदूर से लेकर महावर और पायल समेत सभी सोलह शृंगार का किन ग्रहों से संबंध है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
वैदिक ज्योतिष में सौंदर्य, प्रेम, सुख, धन और आकर्षण का कारक ग्रह शुक्र है और जब कोई महिला खुद को 16 शृंगार से सजाती है तो उसके जीवन में प्रेम और दांपत्य सुख बढ़ता है. हालांकि, इसे केवल गहने या सुंदर पोशाक न समझें बल्कि जब एक महिला शृंगार करती है तो उस पर और उसके घर पर मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा होती है. ऐसी महिला के पति की तरक्की तेजी से होती है. विशेष मौकों पर या व्रत-त्योहार पर महिलाओं के शृंगार करने का महत्व और भी बढ़ जाता है.
महिलाएं मांग में जो लाल सिंदूर भरती हैं उसका सीधा संबंध मंगल ग्रह से है. धार्मिक मान्यता है कि जब स्त्री सिंदूर धारण करती है तो पति की आयु बढ़ाती है और पति की तरक्की होती है. दांपत्य जीवन सुखमय होता है.
माथे की बिंदी या टीका सूर्य से संबंधित है. ज्योतिषीय मान्यता है कि इसे माथे पर धारण करने से सूर्य सक्रिय होता है मान-सम्मान प्राप्त होता है. पति और पत्नी दोनों का आत्मविश्वास बढ़ता है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शृंगार में से एक मांग टीका का संबंध मुख्य रूप से गुरु बृहस्पति ग्रह से माना गया है. जिसे धारण करने से भाग्य खुलता है.
काजल शनि ग्रह से संबंधित है. गहरे काले रंग के काजल को जब आंखों में धारण किया जाता है बुरी नजरें दूर रहती हैं और वैवाहिक जीवन पर शनि दोष का प्रभाव कम से कम पड़ता है.
वैदिक ज्योतिष के अनुसार नाक में पहनी जाने वाली नथ का संबंध शुक्र ग्रह से है जो सौभाग्य और सुखी दांपत्य का प्रतीक है. नथ अगर सोने का हो तो इस और भी शुभ माना जाता है.
मंगलसूत्र का संबंध गुरु बृहस्पति ग्रह से है. गुरु भाग्य, विवाह और सुहाग का कारक है और जब इसे महिला अपने पति के नाम से धारण करती है तो उसके पति का भाग्य खुल जाता है और अनेक सफलताएं मिलती हैं. इसे धारण करने से पति की आयु लंबी होती है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्णफूल या झुमके का शुक्र ग्रह से संबंध है. जिसे धारण करने से महिला का सुख, सौंदर्य और आकर्षण बढ़ता है.
ज्योतिष शास्त्र में मेहंदी और महावर का संबंध मंगल और शुक्र ग्रह से है. मेहंदी की बात करें तो इसका गहरा लाल रंग मंगल को दर्शाता है और इसकी ठंडी तासीर चंद्रमा से संबंधित है जिसे लगाने से मानसिक शांति मिलती है. वहीं, पैरों में महावर लगाने से महिला की कुंडली में मंगल मजबूत होता है जिससे उसके अंदर सकारात्मक ऊर्जा और साहस का संचार होता है. ऐसी महिलाओं का सौभाग्य बढ़ता है.
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, बाजू में बांधा जाने वाला बाजूबंद सभी नौ ग्रहों को संतुलित करता है क्योंकि बाजूबंध को नौ ग्रहों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी नवरत्न से बनाया जाता है. बाजूबंध में पुखराज, हीरा, नीलम, माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, गोमेद और लहसुनिया जड़े जाते हैं ताकि महिला को नवग्रहों की ऊर्जा मिल सके.
कलाइयों में चूड़ियां धारण करने से कुंडली में शुक्र ग्रह सक्रिय होता है यानी चूड़ियों का संबंध शुक्र से है. इसे धारण करने से जब शुक्र मजबूत होता है तो जीवन में प्रेम, सुख और शरीर की सुंदरता बनी रहती है. हालांकि, हरी चूड़िया बुध ग्रह से संबंधित होती है. जिसे धारण करने से वाणी मधुर होती है और समझदारी बढ़ती है.
कमरबंद चांदी या सोने से बना गहना होता है. अगर यह चांदी का है तो इसका चंद्रमा और शुक्र ग्रह से संबंध है. बृहस्पति और सूर्य से सोने का कमरबंध का संबंध है.
सोलह शृंगार के अनुसार अंगूठी को लेकर मान्यता है कि इसका मुख्य रूप से सूर्य और शनि ग्रह से संबंध है. हालांकि, वैदिक ज्योतिष की मान्यताओं की जब बात आती है तो अंगूठी में जड़े रत्नों से ग्रहों का संबंध तय होता है.
लाल रंग का सीधा संबंध मंगल ग्रह से है जो ऊर्जा का कारक है. लाल रंग के वस्त्र को धारण करने से सब मंगल ही मंगल होता है. यही कारण है कि व्रत त्योहार में ज्यादातर बार लाल रंग के वस्त्र पहनने के लिए कहा जाता है. यह रंग सौभाग्य, प्रेम और नई ऊर्जा का जीवन में संचार करता है.
पायल चांदी की होती हैं और चांदी का ग्रह चंद्रमा है. इस तरह पायल धारण करने से मन शांत रहता हैं. धार्मिक मान्यता है कि घर की स्वामिनी खुश रहती है और उसकी चहल-पहल से पायल की धीमी झनक सुनाई देती रहती है, वहां पर मां लक्ष्मी वास करती हैं. वहीं, पैरों के उंगुली में पहनी जाने वाली बिछुआ सूर्य और शनि के दोष को दूर करती है.
बालों में लगाया जाने वाला गजरा सुगंध से भरा होता है. बालों को संवारने के बाद जब महिला अपने बालों में गजरा लगाती है तो उसका और उसके पति का शुक्र ग्रह सक्रिय हो जाता है. इससे दंपत्ति के बीच रोमांस और आकर्षण बढ़ता है. रिश्तों में प्रेम दिन-रात बढ़ता है.
वैदिक ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्त्री जब सजने-संवरने के बाद इत्र या सुगंध लगाती है तो उसका शुक्र सक्रिय होता है. यानी सुगंध का शुक्र ग्रह से संबंध है. जिसको लगाने से महिला का सौंदर्य बढ़ता है, सुख और धन में वृद्धि होती है. पति-पत्नी का प्रेम बढ़ता है.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी वैदिक ज्योतिष, धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है. ग्रहों से शृंगार का संबंध ज्योतिषीय व्याख्या है। इसे वैज्ञानिक प्रमाण न मानें. किसी उपाय को करने से पहले विद्वान ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें.)