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घर में सबसे पवित्र जगह घर का मंदिर होता है. ये जगह घर के पॉजटिव एनर्जी का केंद्र होता है. वास्तू की माने तो घर का मंदिर सही जगह और सही तरीके रखा गया हो तो आपके घर में खुशहाली बनी रहती है.
लेकिन कुछ घरों के मंदिर में वास्तु की गलतियां हो जाती है. जिसके वजह से घर का माहौल खराब होने लगता है.
इतना ही नहीं आपके तरक्की में रुकावटें आने लगती हैं. आज हम इस खबर में आपको बताएंगे कि घर के मंदिर में कौन-सी बातों का ध्यान रखना चहिए.
अक्सर देखा जाता है कि लोग भगवान को चढ़ाए गए फूलों को सूखने के बाद भी मंदिर में ही पड़ा रहने देते हैं.
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर में मुरझाए या बासी फूल रखना बहुत अशुभ माना जाता है. ऐसा करने से पूजा का फल नहीं मिलता है और घर में नेगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है.
इसलिए जब भी आप रोज सुबह नई पूजा करें, तो सबसे पहले पुराने और सूखे फूलों को मंदिर से पूरी तरह हटा दें. इसके बाद ही साफ-सफाई करके भगवान को नए ताजे फूल चढ़ाएं.
पूजा घर में भगवान के आसन के लिए बिछाया गया कपड़ा हमेशा साफ-सुथरा होना चाहिए.
कई बार दीपक या माचिस की तीली से मंदिर का कपड़ा हल्का सा जल जाता है या काफी दिनों तक गंदा रहता है.
वास्तु के अनुसार जला हुआ या मैला कपड़ा मंदिर में बिछाना बहुत बड़ा दोष माना जाता है. आपको हफ्ते में कम से कम एक बार मंदिर के कपड़े को जरूर धोना चाहिए.
अगर रोज ऐसा करना संभव न हो, तो हर पूर्णिमा के दिन मंदिर की सफाई करके नया या धुला हुआ कपड़ा जरूर बिछाएं.
घर के मंदिर में रामायण, भगवद्गीता या अन्य पूजा-पाठ की धार्मिक किताबें बहुत सम्मान के साथ रखी जाती हैं.
लेकिन कई बार बहुत समय से रखी रहने के कारण या ध्यान न देने से ये किताबें फट जाती हैं.
वास्तु शास्त्र के अनुसार फटी या पुरानी धार्मिक किताबें मंदिर में रखना सही नहीं माना जाता है.
ये घर में नकारात्मक विचारों को आकर्षित करती हैं और पूजा में ध्यान भटकने लगता है.
यदि कोई किताब बहुत ज्यादा फट गई है, तो उसे इज्जत से बहते जल में विसर्जित कर देना चाहिए.
वास्तु के नियमों के मुताबिक घर के मंदिर में किसी भी देवी-देवता की टूटी या खंडित मूर्ति बिल्कुल नहीं रखनी चाहिए.
जाने-अनजाने अगर किसी मूर्ति का कोई हिस्सा टूट जाए या तस्वीर का शीशा चटक जाए, तो उसकी पूजा करने से बचना चाहिए.
ऐसी खंडित मूर्तियों की पूजा करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. जैसे ही कोई मूर्ति खंडित हो, उसे तुरंत मंदिर से हटाकर किसी पवित्र नदी या वृक्ष के पास जल-विसर्जित कर दें और उसकी जगह नई मूर्ति स्थापित करें.
वास्तु शास्त्र में माना गया है कि घर का मंदिर हमेशा शांत और साफ-सुथरी जगह पर ही होना चाहिए.
ऐसी जगह जहां बहुत ज्यादा शोर-शराबा या गंदगी न हो, वहीं पर पूजा का मन सही से लग पाता है. मंदिर की सही दिशा और स्वच्छता का सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है.
मंदिर को हमेशा खुला और हवादार रखें ताकि वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे. नियमित रूप से मंदिर में सुबह-शाम दीपक जलाने से घर के कई तरह के दोष अपने आप दूर हो जाते हैं.
यदि आप भी अपने घर के मंदिर में इनमें से कोई भी गलती कर रहे हैं, तो उसे तुरंत सुधार लें. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से घर में किसी भी तरह का वास्तु दोष नहीं बनता है.
ईश्वर आपकी पूजा और प्रार्थना को आसानी से स्वीकार करते हैं. घर में सुख, शांति और समृद्धि का माहौल बना रहता है और परिवार के सदस्यों की तरक्की के बंद रास्ते फिर से खुलने लगते हैं.
इसलिए अपने पूजा घर को हमेशा साफ-सुथरा और वास्तु नियमों के अनुसार ही सजाकर रखें.
Disclaimer): यह लेख पारंपरिक वास्तु शास्त्र के नियमों और सनातन धर्म की मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों तक सामान्य धार्मिक जानकारी पहुंचाना है.