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भारत में लोग घर बनवाते समय वास्तु का बहुत ध्यान देते हैं. लेकिन टॉयलेट कहां बनना चाहिए उस पर किसी का ध्यान नहीं जाता है.
अगर आपके घर पर भी टॉयलेट गलत दिशा में बन गया है तो, हो सकता है कि आपके घर पर बड़ा वास्तु दोष लग जाए.
जैसा कि हम जानते हैं कि वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व होता है. अब सवाल ये उठता है कि टॉयलेट को किस दिशा में बनवाने से सबसे ज्यादा नुकसान होता है.
तो ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट का होना बहुत नुकसानदायक होता है. लेकिन अब इसको ठीक करना सबके बस की बात नहीं होती है.
हर कोई टॉयलेट को तोड़कर फिर से नहीं बनवा सकता है. आज हम इस खबर में कुछ वास्तु के उपाय लेकर आए हैं. जिसको अपनाकर आप बिना किसी तोड़-फोड़ के दोष को हटा सकते हैं.
अगर आपको बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोष को हटाना है तो सबसे पहले समुद्री नमक यानी सी-सॉल्ट अपने टॉयलेट में रख दें.
क्योंकि सी-सॉल्ट को नेगेटिव एनर्जी को खींचने के लिए सबसे बेस्ट उपाय माना जाता है.
अगर आप ऐसा करते हैं तो जितनी जल्दी हो सकता है, उतनी जल्दी वास्तु दोष हट जाएगा. इस बात का आपको ध्यान रखना पड़ेगा कि जिस कटोरी में आपने नमक को रखा है, उसे हर हफ्ते बदलते रहें.
आपने कुछ लोगों को देखा होगा, जो टॉयलेट जाते हैं और वापस आते समय दरवाजा खुला ही छोड़ देते हैं. लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए.
वास्तु के नियमों के अनुसार टॉयलेट का दरवाजा हमेशा बंद ही रहना चाहिए. कहा जाता है कि टॉयलेट वो जगह होती है, जहां घर की सबसे ज्यादा नेगेटिव एनर्जी जमा होती है.
अगर बार-बार दरवाजा खुला रहेगा तो नेगेटिव एनर्जी पूरे घर में फैल जाएगी. साथ ही आपको अपने टॉयलेट की सफाई रोज-रोज करना चाहिए.
अगर आपको टॉयलेट के वास्तु दोष को पूरी तरीके से हटाना है तो आपको टॉयलेट के दरवाजे के ठीक सामने वाली दीवार पर या दरवाजे के बाहर एक छोटा शीशा लगाना चाहिए.
अब आपके मन में ये सवाल आएगा ऐसा करने से क्या होगा, तो भाई जो ऊर्जा टकरा के वापस लौट जाती है, उसे शीशा संतुलित करने का काम करता है.
लेकिन ये नहीं की शीशा लगाकर वैसे ही छोड़ दिया. उसे रोजाना साफ करना चाहिए. इससे घर में दरिद्रता नहीं आती है.
वास्तु शास्त्र में अलग-अलग दिशाओं के लिए अलग-अलग रंगों को बहुत शुभ माना गया है. इस बेहद खास उपाय के तहत आप टॉयलेट सीट के नीचे की बाउंड्री पर दिशा के हिसाब से रंगीन टेप चिपका सकते हैं.
अगर टॉयलेट उत्तर दिशा में है तो नीला या हरा टेप लगाएं, और पूर्व दिशा में होने पर हरे रंग का टेप लगाएं.
वहीं अगर टॉयलेट दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण में है तो लाल या नारंगी टेप का प्रयोग करें. दक्षिण दिशा में बने टॉयलेट के लिए पीला या सुनहरा टेप लगाना सही रहता है.
अगर आपके टॉयलेट में रोशनी अच्छे से नहीं आती है, तो ये भी एक समस्या है. वास्तु के हिसाब से टॉयलेट पर्याप्त रोशनी का होना भी बहुत जरूरी है.
इसलिए हमेशा अपने टॉयलेट में अच्छे रोशनी वाले लाइट का इस्तेमाल करना चाहिए.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य वास्तु मान्यताओं और लोक-विश्वासों पर आधारित है.