8 अक्टूबर 2026 से 14 जुलाई 2027 तक का दौर वैदिक ज्योतिष की नजर से बेहद संवेदनशील साबित हो सकता है. इस समय गुरु-केतु और मंगल ग्रह मिलकर ऐसी अशुभ स्थितियां पैदा कर रहे हैं जो महामारी और वैश्विक आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं. 8 अक्टूबर 2026 से गुरु और केतु गण्डांत दोष बना रहे हैं. इससे पहले साल 2020 में यह दोष बना था और कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी थी. इस बार फिर यह ऐसे ही गंभीर संकेत दे रहा है. अनुभवी ज्योतिषाचार्य श्याम ठाकुर ने इस दोष पर गहन रिसर्च की है. आइए जानते हैं इससे जुड़ी सारी डिटेल्स.
वैदिक ज्योतिष में जल राशि के अंतिम हिस्से और अग्नि राशि के शुरुआती हिस्से के संधि क्षेत्र को गण्डांत कहा जाता है. कर्क-सिंह संधि भी इन्हीं संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है. इस समय गुरु कर्क राशि में हैं और केतु सिंह राशि में हैं. 8 अक्टूबर को गुरु और केतु की युति गण्डांत की डिग्री पर यानी जल तत्व कर्क राशि के आखिरी पद 26 डिग्री 20 मिनट से लेकर मघा नक्षत्र के पहले पद यानी सिंह राशि के पहले 3 डिग्री 20 मिनट तक हो रही है. जो कि जुलाई 2027 तक रहेगी.
इतना ही नहीं इस अशुभ दोष के साथ-साथ अग्नि तत्व वाले और युद्ध-दंगल करवाने वाले मंगल ग्रह भी गुरु-केतु के साथ जुड़ जाएंगे, जिससे स्थिति और भी विकट बन जाएगी. ज्योतिषाचार्य श्याम ठाकुर के अनुसार, मंगल 5 नवंबर से 20 नवंबर, फिर 31 जनवरी 2027 से 10 फरवरी 2027, इसके बाद 28 फरवरी से 7 मई 2027 के बीच में मंगल भी इनके साथ जुड़ जाएंगे. यह समय वैश्विक पटल पर विनाशकारी स्थितियां पैदा कर सकता है.
गुरु, केतु और मंगल की यह अशुभ स्थिति महामारी और आर्थिक संकट का खतरा पैदा कर रही हैं.
- ज्योतिष के अनुसार ऐसे समय में बड़े आर्थिक फैसले लेने से बचना चाहिए. जिन लोगों का मेडिकल इंश्योरेंस नहीं है, उन्हें इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए.
- यह समय आर्थिक अस्थिरता ला सकता है.
- वैश्विक स्तर पर स्थितियां बदलेंगी.
- प्राकृतिक आपदाओं या भू-राजनीतिक तनाव जैसी बड़ी घटनाओं का दौर भी देखने को मिल सकता है.
हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं और आकलन हैं, इन्हें निश्चित वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए. फिर भी इस समय सावधानी बरतने की बहुत ज्यादा जरूरत है.
ज्योतिष इस समय में सावधान रहने की सलाह इसलिए दे रहा है क्योंकि इस अशुभ योग के कारण हुए नकारात्मक प्रभाव दुनिया पहले भी साल 2020 और साल 1932-33 में झेल चुकी है. इसलिए साल 2026 के गण्डांत दोष की तुलना इन सालों से की जा रही है.
ज्योतिषाचार्य श्याम ठाकुर कहते हैं कि इतिहास में इससे मिलती-जुलती ग्रह स्थितियां साल 2020 में कोरोना महामारी और वैश्विक आर्थिक संकट के समय थीं. जब साल 2020 में कोविड-19 महामारी आई थी, तब भी ठीक यही तीन ग्रह यानि कि बृहस्पति(गुरु), केतु और मंगल गण्डांत से गुजरे थे. महामारी के साथ वैश्विक आर्थिक संकट की भी साथ में स्थिति बन गयी थी.
इससे पहले साल 1932-33 में भी यह स्थिति बन चुकी है, जब महामंदी और यूरोप में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल का दौर भी ऐसे ही ग्रह स्थितियों के साए में आया था. इसी वजह से अक्टूबर 2026-27 का यह काल ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष ध्यान देने योग्य बन जाता है.
ज्योतिषाचार्य श्याम ठाकुर कहते हैं कि 8 अक्टूबर 2026 से 14 जुलाई 2027 के बीच विश्व युद्ध की शुरुआत होने, भूकंप, ज्वालामुखी फटना, सुनामी और बाढ़ जैसी विपदा के प्रबल होने आशंका है. संभवतः इनमें से एक या कई घटनाएं एकसाथ होने के कारण बहुत बड़ा वैश्विक संकट भी आ जाए.
(Disclaimer- इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष की मान्यताओं और ज्योतिषीय आकलनों पर आधारित है. ग्रहों की स्थिति को आर्थिक मंदी, महामारी, युद्ध, भूकंप या अन्य वैश्विक घटनाओं का वैज्ञानिक कारण नहीं माना जा सकता. किसी भी घटना की निश्चित भविष्यवाणी के रूप में इसे न लें.)