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8 अक्टूबर से बन रहा गुरु-केतु का गण्डांत दोष, आर्थिक मंदी और कोरोना जैसे संकट की आशंका?

अक्‍टूबर महीने से गुरु और केतु की स्थिति अशुभ गण्‍डांत दोष पैदा कर रही है. ये वो दोष है जो साल 2020 में बना था तो कोरोना महामारी आई थी. अब ये दोष वैसी ही महामारी और आर्थिक मंदी के संकेत दे रहा है. यानी कि अगला करीब 1 साल देश-दुनिया के लिए भारी पड़ सकता है.

Written ByShraddha Jain
Published: Sep 08, 2026, 02:24 PM IST|Updated: Sep 08, 2026, 02:30 PM IST
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8 अक्टूबर से बन रहा गुरु-केतु का गण्डांत दोष, आर्थिक मंदी और कोरोना जैसे संकट की आशंका?
Image Credit: गुरु-केतु का गण्‍डांत दोष और मंगल का मिलन संकटकारी समय ला रहा है. आने वाला एक साल देश-दुनिया पर भारी पड़ सकता है. (Photo: AI)

About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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8 अक्टूबर 2026 से 14 जुलाई 2027 तक का दौर वैदिक ज्योतिष की नजर से बेहद संवेदनशील साबित हो सकता है. इस समय गुरु-केतु और मंगल ग्रह मिलकर ऐसी अशुभ स्थितियां पैदा कर रहे हैं जो महामारी और वैश्विक आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं. 8 अक्‍टूबर 2026 से गुरु और केतु गण्‍डांत दोष बना रहे हैं. इससे पहले साल 2020 में यह दोष बना था और कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी थी. इस बार फिर यह ऐसे ही गंभीर संकेत दे रहा है. अनुभवी ज्‍योतिषाचार्य श्‍याम ठाकुर ने इस दोष पर गहन रिसर्च की है. आइए जानते हैं इससे जुड़ी सारी डिटेल्‍स.

क्या है गुरु-केतु का गण्डांत दोष?

वैदिक ज्‍योतिष में जल राशि के अंतिम हिस्से और अग्नि राशि के शुरुआती हिस्से के संधि क्षेत्र को गण्डांत कहा जाता है. कर्क-सिंह संधि भी इन्हीं संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है. इस समय गुरु कर्क राशि में हैं और केतु सिंह राशि में हैं. 8 अक्‍टूबर को गुरु और केतु की युति गण्‍डांत की डिग्री पर यानी जल तत्व कर्क राशि के आखिरी पद 26 डिग्री 20 मिनट से लेकर मघा नक्षत्र के पहले पद यानी सिंह राशि के पहले 3 डिग्री 20 मिनट तक हो रही है. जो कि जुलाई 2027 तक रहेगी.

मंगल की एंट्री मचाएगी घमासान!

इतना ही नहीं इस अशुभ दोष के साथ-साथ अग्नि तत्‍व वाले और युद्ध-दंगल करवाने वाले मंगल ग्रह भी गुरु-केतु के साथ जुड़ जाएंगे, जिससे स्थिति और भी विकट बन जाएगी. ज्‍योतिषाचार्य श्‍याम ठाकुर के अनुसार, मंगल 5 नवंबर से 20 नवंबर, फिर 31 जनवरी 2027 से 10 फरवरी 2027, इसके बाद 28 फरवरी से 7 मई 2027 के बीच में मंगल भी इनके साथ जुड़ जाएंगे. यह समय वैश्विक पटल पर विनाशकारी स्थितियां पैदा कर सकता है.

महामारी और आर्थिक संकट का खतरा

गुरु, केतु और मंगल की यह अशुभ स्थिति महामारी और आर्थिक संकट का खतरा पैदा कर रही हैं.

- ज्‍योतिष के अनुसार ऐसे समय में बड़े आर्थिक फैसले लेने से बचना चाहिए. जिन लोगों का मेडिकल इंश्‍योरेंस नहीं है, उन्‍हें इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए.

- यह समय आर्थिक अस्थिरता ला सकता है.

- वैश्विक स्‍तर पर स्थितियां बदलेंगी.

- प्राकृतिक आपदाओं या भू-राजनीतिक तनाव जैसी बड़ी घटनाओं का दौर भी देखने को मिल सकता है.

हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं और आकलन हैं, इन्हें निश्चित वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए. फिर भी इस समय सावधानी बरतने की बहुत ज्‍यादा जरूरत है.

फैली थी कोरोना महामारी

ज्‍योतिष इस समय में सावधान रहने की सलाह इसलिए दे रहा है क्‍योंकि इस अशुभ योग के कारण हुए नकारात्‍मक प्रभाव दुनिया पहले भी साल 2020 और साल 1932-33 में झेल चुकी है. इसलिए साल 2026 के गण्‍डांत दोष की तुलना इन सालों से की जा रही है.

ज्‍योतिषाचार्य श्‍याम ठाकुर कहते हैं कि इतिहास में इससे मिलती-जुलती ग्रह स्थितियां साल 2020 में कोरोना महामारी और वैश्विक आर्थिक संकट के समय थीं. जब साल 2020 में कोविड-19 महामारी आई थी, तब भी ठीक यही तीन ग्रह यानि कि बृहस्पति(गुरु), केतु और मंगल गण्डांत से गुजरे थे. महामारी के साथ वैश्विक आर्थिक संकट की भी साथ में स्थिति बन गयी थी.

इससे पहले साल 1932-33 में भी यह स्थिति बन चुकी है, जब महामंदी और यूरोप में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल का दौर भी ऐसे ही ग्रह स्थितियों के साए में आया था. इसी वजह से अक्‍टूबर 2026-27 का यह काल ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष ध्यान देने योग्य बन जाता है.

8 अक्‍टूबर के बाद क्‍या-क्‍या हो सकता है?

ज्‍योतिषाचार्य श्‍याम ठाकुर कहते हैं कि 8 अक्टूबर 2026 से 14 जुलाई 2027 के बीच विश्व युद्ध की शुरुआत होने, भूकंप, ज्वालामुखी फटना, सुनामी और बाढ़ जैसी विपदा के प्रबल होने आशंका है.  संभवतः इनमें से एक या कई घटनाएं एकसाथ होने के कारण बहुत बड़ा वैश्विक संकट भी आ जाए.

(Disclaimer- इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष की मान्यताओं और ज्योतिषीय आकलनों पर आधारित है. ग्रहों की स्थिति को आर्थिक मंदी, महामारी, युद्ध, भूकंप या अन्य वैश्विक घटनाओं का वैज्ञानिक कारण नहीं माना जा सकता. किसी भी घटना की निश्चित भविष्यवाणी के रूप में इसे न लें.) 
 

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