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लड़के के जन्म पर ही क्यों गाए जाते हैं सोहर गीत? जानिए लोक-संस्कृति से जुड़ा ये बड़ा सच

इस खबर में हम ये जानेंगे कि लड़के के जन्म पर ही क्यों सोहर गीत गाएं जाते हैं. साथ ही लोक-संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और बेटियों के जन्म पर गाए जाने वाले गीतों में आए बड़े बदलाव के बारे में डिटेल से बताएंगे.

Written By Harsh Singh
Published: Oct 14, 2026, 07:22 PM IST | Updated: Oct 14, 2026, 07:29 PM IST
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आपने अपने लोकल में देखा होगा कि जब भी कोई लड़का पैदा होता है तो बहुत खुशी मनाई जाती है. जिसके लिए लोग तरह-तरह के परंपरा को फॉलो करते हैं.

घर में अगर लड़का पैदा होता है तो यूपी, बिहार में महिलाएं ढोलक की थाप के साथ सोहर गाना शुरू करती हैं.

अब ये कोई नॉर्मल गाना नहीं होता है. ये परिवार में नए सदस्य के आने की खुशी का उत्सव होता है. लेकिन आपके मन में हमेशा एक सवाल उठता होगा.

आखिर क्यों लड़के के पैदा होने पर ही सोहर क्यों गाया जाता है. लड़कियों के पैदा होने पर उस तरह का शोर-शराबा नहीं होता है, जैसे लड़को के पैदा होने पर होता है.

लड़के के लिए ही क्यों गाया जाता है सोहर?

ऐसा होने के पीछे कहीं न कहीं हमारे समाज का दोष है. आपने अपने आस-पास देखा होगा की लोग लड़की होने पर ये जरूर बोल देते हैं कि लड़का होता तो ठीक होता.

दरअसल पहले के समय में लोग वंश बढ़ाने और अपने बुढ़ापे के सहारे के लिए लड़का ही पैदा करना चाहते थे.

समय के साथ इसका असर बस सिर्फ इंसानों की सोच पर ही नहीं हमारे लोक-साहित्य और गीतों पर भी पड़ने लगा. यही वजह है कि जब भी लड़का पैदा होता है तो उसे बहुत बड़े उत्सव की तरह मनाते हैं.

लड़के के आते हीं घर और आस-पास की महिलाएं एक साथ इकट्ठा होती हैं और सोहर गाती हैं. ऐसे ही ये हमारी परंपरा बन गई.

क्या बेटी के जन्मदिन पर भी मनाई जाती थी खुशियां?

अब आप ये सोच रहे होंगे कि लड़कियों के पैदा होने पर कोई खुशी नहीं मनाता होगा, पर ऐसा नहीं है. लड़कियों के पैदा होने पर भी गीत गाया जाता था, और खुशी मनाई जाती थी.

लेकिन वो गाने बिल्कुल अलग हुआ करते थे. जैसे लड़कों के पैदा होने पर सोहर गाया जाता था जिसमें उल्लास, गर्व और बधाई का भाव होता था.

वहीं लड़की के पैदा होने पर शांत गीत गाया जाता है. कई बार गाने में आपको बेटी के पराए धन होने और भविष्य में उसकी विदाई के दर्द की झलक दिख जाएगी.

दरअसल दहेज प्रथा और बेटियों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंता इस खुशी को कम कर देती थी. इसी वजह से लोग बेटी के पैदा होने पर उत्सव नहीं मनाते थे. वैसे अब ये चीजें धीरे-धीरे बदल रही है.

बदलता दौर और लोगों की सोच में बदलाव

अब समय बदल चुका है. लोगों की सोच में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है. अब के लोग बेटे और बेटी में फर्क नहीं करते.

अब लड़की के पैदा होने पर भी उतनी ही खुशियां मनाते हैं जितना लड़के के पैदा होने पर मनाते थे. इतना ही नहीं अब तो पढ़े-लिखे लोगों के घर लड़कियों के पैदा होने पर सोहर भी गाया जाता है.

सोहर गीत गाने का असली मकसद

सोहर गीत गाने का असली मकसद घर में आई नई जिंदगी और मां बनने की खुशी का सम्मान करना होता है.

फिर चाहे वो लड़का चाहे लड़की दोनों ही भगवान के दिए हुए तोहफे होते हैं.


(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी भारतीय लोक-संस्कृति, सामाजिक परंपराओं और लोक-साहित्य के विश्लेषकों की राय पर आधारित है. इसका उद्देश्य किसी भी सामाजिक मान्यता का अपमान करना नहीं है.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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