SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

पद्म पुराण में क्यों लिखा है कि पुष्कर तीर्थ के बिना अधूरी है आपकी हर यात्रा?

इस आर्टिकल में हम पद्म पुराण के अनुसार तीर्थराज पुष्कर की महिमा, ब्रह्मा जी के मंदिर का इतिहास, 52 घाटों का महत्व और 2026 के कार्तिक पूर्णिमा मेले की तिथियां, महा-आरती के समय तथा दर्शन के जरूरी नियमों के बारे में डिटेल से बताने वाले हैं.

Written By Harsh Singh
Published: Sep 03, 2026, 04:46 PM IST | Updated: Sep 03, 2026, 05:27 PM IST
Join

भारत में चार धाम और कई पवित्र तीर्थ स्थल मौजूद हैं. लोग जीवन में पुण्य कमाने के लिए अलग-अलग धार्मिक जगहों पर जाते हैं. लेकिन शास्त्रों में लिखा है कि पुष्कर गए बिना हर धार्मिक यात्रा अधूरी रहती है.

महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखित पद्म पुराण की मानें तो पुष्कर को सभी तीर्थों का गुरु यानी तीर्थराज माना गया है. राजस्थान के अजमेर में बसा यह शहर धार्मिक आस्था और खूबसूरत पर्यटन स्थल है.

पद्म पुराण में है पुष्कर तीर्थ की पौराणिक कथा

पद्म पुराण के सृष्टि खंड में पुष्कर की उत्पत्ति की एक बहुत सुंदर कथा के बारे में बताया गया है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा जी ने धरती पर एक यज्ञ करने के बारे में सोचा.

अब उनको सही जगह का चुनाव करना था. ऐसे में उन्होंने सही जगह चुनने के लिए अपने हाथ से एक कमल का फूल गिराया. वो फूल जिस जगह पर गिरा, वहां पानी का एक विशाल सरोवर बन गया.

कमल यानी पुष्प और हाथ यानी कर से मिलकर इस जगह का नाम पुष्कर पड़ा. यज्ञ के दौरान देवी सावित्री के समय पर न पहुंचने के कारण ब्रह्मा जी ने गायत्री माता से विवाह कर यज्ञ पूरा किया.

इसी बात से गुस्सा होकर देवी सावित्री ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया था कि पूरे संसार में केवल पुष्कर में ही उनकी मुख्य रूप से पूजा की जाएगी.

कार्तिक पूर्णिमा स्नान और पुष्कर सरोवर की महिमा:-

तीर्थों का राजा: पद्म पुराण में लिखा है कि व्यक्ति चाहे जितने भी बड़े धामों की यात्रा कर ले, जब तक वो पुष्कर सरोवर में स्नान नहीं करता है, तब तक उसे पूरा पुण्य नहीं मिलता है.

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व: कार्तिक महीने में शुक्ल एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक यहां ब्रह्मा जी का खास वास रहता है.

पापों का नाश: कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर सरोवर में डुबकी लगाने से व्यक्ति के सभी कायिक, मानसिक पाप खत्म हो जाते हैं.

महा-आरती: इस पावन अवसर पर पुष्कर के 52 घाटों पर हजारों दीप जलाए जाते हैं और भव्य महा-आरती की जाती है.

पुष्कर यात्रा के दौरान ध्यान रखने वाली बातें और नियम:-

1- अगर आप पुष्कर दर्शन और स्नान के लिए जा रहे हैं, तो कुछ नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. सरोवर के घाटों पर जाते समय चमड़े का सामान जैसे बेल्ट या पर्स बाहर ही उतार दें.

2- जल में साबुन लगाकर न नहाएं और न ही गंदगी फैलाएं. घाट पर पूजा करवाते समय अनजाने पंडितों के बहकावे में आकर अपनी क्षमता से ज्यादा दान-दक्षिणा का वादा न करें.

3- अपनी श्रद्धा अनुसार ही भक्ति भाव से दान करें. पुष्कर सरोवर के पास वराह मंदिर, रंगजी मंदिर और सावित्री माता के मंदिर के दर्शन करना भी बहुत शुभ माना जाता है.

पुष्कर का प्रसिद्ध कार्तिक मेला

पुष्कर के प्रसिद्ध कार्तिक मेले की बात करें तो ये इस साल नवंबर महीने में आयोजित होगा. धार्मिक मान्यताओं की मानें तो कार्तिक शुक्ल एकादशी से शुरू होकर पूर्णिमा (24 नवंबर 2026) तक यहां स्नान और दर्शन का खास महत्व माना जाता है.

इतना ही नहीं, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर के 52 घाटों पर शाम 6:00 बजे भव्य महा-आरती शुरू होती है. कहा जाता है कि, एक साथ यहां हजारों दीपों का दान किया जाता है.

मंदिर दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु ध्यान रखें कि मुख्य ब्रह्मा मंदिर में सुबह 5:30 बजे की मंगला आरती और शाम 7:00 बजे की संध्या आरती के समय भीड़ सबसे अधिक रहती है.

दर्शन के लिए हमेशा लाइन में बने रहें और सरोवर के घाटों पर स्वच्छता का खास पालन करें. घाट परिसर में फोटोग्राफी और जूते-चप्पल ले जाना पूरी तरह वर्जित है, इसलिए इन नियमों का पालन करके अपनी यात्रा को सुगम और फलदाई बनाएं.

पुष्कर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपरा और इतिहास का एक अटूट हिस्सा है. 

अगर आप अपनी धार्मिक यात्राओं को सफल और संपूर्ण बनाना चाहते हैं, तो पद्म पुराण में बताए गए नियमों के अनुसार एक बार पुष्कर तीर्थ के दर्शन और सरोवर स्नान जरूर करें.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी पद्म पुराण, धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है. हमारा मकसद पाठकों तक आसान भाषा में सही और प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है. किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा से पहले आप स्थानीय विशेषज्ञों या विद्वानों से सलाह ले सकते हैं.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES