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मध्य प्रदेश का उज्जैन शहर पूरी दुनिया में महाकाल की नगरी के नाम से जाना जाता है. यहां का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग तो सबको पता है. पर बहुत कम लोगों को ये मालूम है कि उज्जैन में कुछ और मंदिर भी हैं, जिनकी परंपराएं बेहद अलग और दिलचस्प हैं.
इन्हीं में से एक हरसिद्धि मंदिर है, जिसका जिक्र शिव पुराण में भी मिलता है. कहते हैं यहां माता सती की कोहनी गिरी थी. इसी मंदिर के ठीक पीछे एक और खास मंदिर है, जिसे वरसिद्धि मंदिर कहते हैं.
हरसिद्धि मंदिर के पीछे बना ये मंदिर देखने में भले छोटा लगे, पर लोगों की इसमें आस्था बहुत गहरी है. वरसिद्धि नाम का मतलब ही होता है, सही जीवनसाथी दिलाने वाली देवी.
जिन लड़के-लड़कियों की शादी में बार-बार कोई न कोई अड़चन आ जाती है, उनके लिए ये मंदिर किसी वरदान जैसा माना जाता है. मंदिर के अंदर माता की बहुत सुंदर मूर्ति रखी है. कहते हैं यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता है.
यहां पूजा और मन्नत मांगने का तरीका बाकी मंदिरों से एकदम अलग है. यहां आने वाले कुंवारे लड़के-लड़कियां सबसे पहले मंदिर के मुख्य दरवाजे की लोहे की जंजीर तीन बार बजाते हैं.
ऐसा करके माता को अपने आने की खबर दी जाती है. इसके बाद वे पांच रंग के धागे में तीन या पांच गांठ लगाकर उसे मंदिर परिसर में बांध देते हैं. माना जाता है कि इससे शादी में आ रही सारी रुकावटें जल्दी दूर हो जाती हैं.
यहां धागा बांधने और सांकल यानी लोहे की जंजीर बजाने के अलावा एक और अनोखी रस्म है, उल्टा स्वास्तिक बनाना. जिन लोगों को जल्दी शादी की इच्छा होती है, वे माता के दर्शन के बाद मंदिर की दीवार पर कुमकुम या रोली से उल्टा स्वास्तिक बना देते हैं.
ये उल्टा स्वास्तिक इस बात की निशानी माना जाता है कि भक्त की मुराद अभी अधूरी है. यह एक तरह से देवी से की गई गुजारिश होती है कि जल्द ही शादी का योग बन जाए.
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां मांगी गई मुराद जल्दी पूरी हो जाती है, ऐसा लोग मानते हैं. जब किसी की शादी पक्की हो जाती है, तो उसे दोबारा इस मंदिर में आना होता है.
शादी के बाद नई शादीशुदा जोड़ी माता के दर्शन करने आती है और पहले बनाए गए उल्टे स्वास्तिक की जगह उसे सीधा कर देती है. साथ ही बांधा हुआ धागा खोलकर माता का शुक्रिया अदा किया जाता है.
हरसिद्धि मंदिर परिसर में होने की वजह से यहां रोज सैकड़ों लोग दर्शन करने आते हैं. सिर्फ आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से भी लोग अपने बच्चों की जल्दी शादी की मन्नत लेकर यहां आते हैं.
अगर आप भी महाकाल के दर्शन करने उज्जैन जा रहे हैं, तो हरसिद्धि मंदिर के साथ इस वरसिद्धि देवी के मंदिर के दर्शन भी जरूर करें.
डिस्क्लेमर:
यह लेख उज्जैन की स्थानीय धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोक परंपराओं पर आधारित है. इसका मकसद पाठकों को भारतीय संस्कृति और मशहूर धार्मिक स्थलों की जानकारी देना है, इसे ऐतिहासिक तथ्य न मानें.