कब है तुला संक्रांति, कैसे करें सूर्य देव की उपासना और क्या है इस दिन पुण्य काल
Tula Sankranti 2026: इस साल तुला संक्रांति कब है और सूर्य देव की उपासना के लिए इस दिन पुण्य काल मुहूर्त क्या है, किस विधि से सूर्य देव की पूजा करें? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
Tula Sankranti 2026: सूर्य का तुला राशि में जब प्रवेश होता है तो इसे 'तुला संक्रांति' कहा जाता है. इस संक्रांति का महत्व उड़ीसा और कर्नाटक राज्य में और जगहों की अपेक्षा कहीं अधिक है. इस दिन सूर्य कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में गोचर कर जाएंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार तुला राशि में सूर्य का प्रवेश इस साल 17 अक्टूबर 2026 शाम 07:57 बजे होगा. इस राशि में सूर्य का संचरण 16 नवंबर तक होगा. आइए सूर्य की तुला संक्रांति के शुभ मुहूर्त पर एक नजर डालें ताकि सही समय पर पूजा व दान आदि कर सकें.
तुला संक्रांति का महत्व
तुला संक्रांति पर जातक स्नान आदि कर भगवान का ध्यान करें तो शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है. दान और सूर्य की पूजा करने से जातक की उम्र बढ़ती है और आय में वृद्धि होती है. तुला संक्रांति पर सूर्य देव की विशेष कृपा पाने के लिए उनकी पूजा उपासना कर सकते हैं. सूर्य पूजा की परंपरा सनातन धर्म में बहुत पुरानी है. सूर्योदय के समय नियमित रूप से या संक्रांति के शुभ मौके पर सूर्य देव को जल से अर्घ्य देने और उपासना करने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उसके सम्मान में भी वृद्धि होने लगती है.
तुला संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त
तुला संक्रांति शनिवार, अक्टूबर 17, 2026 को है.
तुला संक्रांति का पुण्य काल - दोपहर 12:06 बजे से लेकर शाम 05:50 बजे तक.
तुला संक्रांति महा पुण्य काल - दोपहर 03:55 बजे से लेकर शाम के 05:50 बजे तक.
तुला संक्रांति की पूजा विधि
तुला संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा सूर्योदय के समय करें.
सुबह-सवेरे उठकर स्नान आदि करें और साफ कपड़े पहनें.
सूर्य देव को एक लोटा जल का अर्घ्य दें.
सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए 'ॐ सूर्याय नमः'मंत्र का जाप करें.
अब फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें.
इस दिन देवी लक्ष्मी और देवी पार्वती की भी विधिवत पूजा करें.
पौधों की शाखाओं के साथ चावल और गेहूं जैसे अनाजों का भोग लगाएं.
देवी पार्वती को सुपारी के पत्ते अर्पित करें.
अब तुला संक्रांति कथा का पाठ करें. आरती कर पूजा संपन्न करें.
अब हाथ जोड़कर भगवान से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)