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Vastu Shastra Temple Rules: आजकल मॉडर्न घरों में मंदिर की स्थापना तो की जाती है लेकिन लोग अक्सर मंदिर स्थापना के वास्तु नियमों का पालन करने में चूक जाते हैं. मंदिर स्थापना में होने वाले भूल-चूक को दूर करने के लिए आइए इस लेख में विस्तार से जानें घर में मंदिर स्थापना के लिए किन वास्तु नियमों का ध्यान रखें. ताकि वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार बने मंदिर में जब भी पूजा करें तो घर में सकारात्मक ऊर्जा फैल सके और पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके.
घर के मंदिर के लिए शुभ दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में जब भी मंदिर को स्थापित करें तो इस बात का पूरा ध्यान रखें कि इसकी दिशा सही हो और वास्तु नियमों के अनुसार हो. मंदिर स्थापना के लिए घर की पूर्व या उत्तर दिशा सबसे शुभ माना जाता है. सूर्योदय की दिशा पूर्व है और यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है. वहीं उत्तर दिशा कुबेर की है जो धन और समृद्धि को घर में आकर्षित करती है. ऐसे में ध्यान रखें कि मंदिर को इस तरह से स्थापित करें कि पूजा के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की हो, जिससे सूर्य की किरणें सीधा आप पर पड़ें. भूलकर भी दक्षिण या पश्चिम दिशा में मंदिर को स्थापित न करें.
लकड़ी से बने मंदिर के लिए नियम
अगर घर में लकड़ी से बने मंदिर को स्थापित करते हैं तो इस बात पर जरूर गौर करें कि वास्तु शास्त्र के अनुसार किस लकड़ी से मंदिर बना है. कुछ पेड़ों की लकड़ी मंदिर बनाने के लिए शुभ और कुछ को अशुभ माना जाता है. जब भी घर में लकड़ी के बने मंदिर को स्थापित करें तो इसके लिए पीपल, चंदन, देवदार, नीम, आम, शीशम, सागवान और बरगद को ही चुनें. वहीं बबूल की लकड़ी, बांस या कीड़े-दीमक लगी लकड़ी को मंदिर बनवाने के लिए कतई न इस्तेमाल करें. शुभ लकड़ी से बने मंदिर में पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
घर के मंदिर में प्रतिमा से जुड़ा नियम
जब भी घर के मंदिर में भगवान की प्रतिमा को स्थापित करें इस बात का ध्यान रखें कि पूजा स्थल पर कभी भी एक साथ दो शिवलिंग, तीन गणेश जी की प्रतिमा, दो शंख, दो सूर्य देव की प्रतिमा, तीन देवी मां की प्रतिमा, दो गोमती चक्र और दो शालिग्राम न रखे गए हों. ऐसा करने से घर में कभी स्थायित्व नहीं आती है और परेशानियां बनी रहती हैं. इसके अलावा घर में 9 इंच यानी 22 सेंटीमीटर से कम लंबाई की प्रतिमा ही रखें. इससे बड़ी प्रतिमा घर के मंदिर के लिए वर्जित बताया गया है.
मंदिर में पीला या लाल कपड़ा जरूर बिछाएं
मंदिर में जब भी भगवान की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें तो इस बात का पूरा ध्यान रखें कि चौकी पर या मंदिर की भूमि पर सीधे इन्हें न रखें बल्कि पीला या लाल कपड़ा बिछा लें. वास्तु शास्त्र के अनुसार में प्रतिमाओं को मंदिर में स्थापित करने से पहले पीला या लाल रंग का कपड़ा जरूर बिछाना चाहिए. इससे मंदिर की पवित्रता बनी रहती है और हर ओर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. हर दिन कपड़े को साफ करें ताकि ऊर्जा नकारात्मक न हो सके.
(डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक वास्तु एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें और किसी भी प्रकार के निश्चित परिणाम या लाभ का दावा न मानें.)