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संधिपूजा 2026: अष्टमी-नवमी के बीच के 48 मिनट का रहस्य क्या है? इस मुहूर्त में पूजा से मिलती है मां दुर्गा के 2 रूपों की कृपा!

शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि विशेष होती है, लेकिन इसमें भी 48 मिनट का समय सबसे अहम होता है. क्‍या है वो समय और क्‍यों है इतना खास. साथ ही साल 2026 में इस 48 मिनट की संधिपूजा का शभ मुहूर्त भी जानें.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 14, 2026, 09:40 AM IST | Updated: Oct 14, 2026, 09:44 AM IST
Image Credit: संधि पूजा का महत्‍व, रहस्‍य और पूजा की तारीख व समय. (Photo:AI)
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11 अक्‍टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो चुकी हैं जो कि 19 अक्‍टूबर तक चलेंगी. इसमें नवरात्र के आखिर की दो तिथियों अष्‍टमी-नवमी का विशेष महत्‍व है, जिसमें दुर्गा पूजा चरम पर होती है. इन्‍हीं तिथियों के मेल पर विशेष पूजा की जाती है, जिसमें मां दुर्गा के सौम्‍य रूप के साथ मां के चामुंडा या काली स्‍वरूप की खासतौर पर पूजा होती है. क्‍योंकि इसी देवी मां के इसी रूप ने चंड और मुंड नाम के असुरों का वध किया था. यह पूजा 48 मिनट की होती है, जानिए इसका महत्‍व और इस साल का मुहूर्त.

संधिपूजा के 48 मिनट का रहस्‍य

महाअष्‍टमी और महानवमी तिथि के संधिकाल में संधिपूजा की जाती है. दुर्गा पूजा की ये महत्‍वपूर्ण पूजा होती है, जो कि 48 मिनट की होती है. इसमें 24 मिनट (एक घड़ी) अष्‍टमी तिथि के अंत की और दूसरे 24 मिनट (एक घड़ी) नवमी तिथि के प्रारंभ के होते हैं. पौराणिक मान्‍यता है कि इस विशेष संधि काल में ही मां दुर्गा ने चामुंडा का रूप धारण करके चंड-मुंड असुरों का वध किया था.

यह पूजा अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है. यह दर्शाती है कि बुराई और नकारात्‍मकता पर हमेशा अच्‍छाई व सकारात्‍मकता की ही जीत होती है. साथ ही आध्‍यात्मिक लिहाज से देखें तो माना जाता है कि इन 48 मिनट के समय में ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर यानी कि हाईऐस्‍ट लेवल पर होती है. जिसमें पूजा-मंत्र जाप, तप करने से मन के विकार दूर होते हैं और सुख-शांति, समृद्धि प्राप्‍त होती है.

108 दीपक और 108 कमल का विशेष महत्‍व

संधि पूजा में मां दुर्गा के सामने 108 दीपक जलाने और उन्‍हें 108 कमल के फूल, 108 बिल्‍वपत्र अर्पित करने का विशेष महत्‍व है. इसके अलावा देवी मां को विभिन्‍न फल, फूल, वस्‍त्र, आभूषण, सिंदूर आदि अर्पित किया जाता है. दुर्गा सप्‍तशती के पाठ और मंत्रोच्‍चार के बीच संधि पूजा संपन्‍न होती है.  

साल 2026 में कब है संधि पूजा का मुहूर्त?

इस साल संधि पूजा 19 अक्‍टूबर 2026, सोमवार को है. द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी 18 अक्टूबर को सुबह 08:27 बजे से आरंभ होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्‍त होगी. इसके बाद नवमी तिथि आरंभ होगी. अष्‍टमी के समापन और नवमी के प्रारंभ के 48 मिनट में ही संधि पूजा होती है.

इस साल संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से लेकर 11:15 बजे तक है.

(Disclaimer: लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक पंचांग गणनाओं पर आधारित है. पूजा के मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है. सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें.)

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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