11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो चुकी हैं जो कि 19 अक्टूबर तक चलेंगी. इसमें नवरात्र के आखिर की दो तिथियों अष्टमी-नवमी का विशेष महत्व है, जिसमें दुर्गा पूजा चरम पर होती है. इन्हीं तिथियों के मेल पर विशेष पूजा की जाती है, जिसमें मां दुर्गा के सौम्य रूप के साथ मां के चामुंडा या काली स्वरूप की खासतौर पर पूजा होती है. क्योंकि इसी देवी मां के इसी रूप ने चंड और मुंड नाम के असुरों का वध किया था. यह पूजा 48 मिनट की होती है, जानिए इसका महत्व और इस साल का मुहूर्त.
महाअष्टमी और महानवमी तिथि के संधिकाल में संधिपूजा की जाती है. दुर्गा पूजा की ये महत्वपूर्ण पूजा होती है, जो कि 48 मिनट की होती है. इसमें 24 मिनट (एक घड़ी) अष्टमी तिथि के अंत की और दूसरे 24 मिनट (एक घड़ी) नवमी तिथि के प्रारंभ के होते हैं. पौराणिक मान्यता है कि इस विशेष संधि काल में ही मां दुर्गा ने चामुंडा का रूप धारण करके चंड-मुंड असुरों का वध किया था.
यह पूजा अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है. यह दर्शाती है कि बुराई और नकारात्मकता पर हमेशा अच्छाई व सकारात्मकता की ही जीत होती है. साथ ही आध्यात्मिक लिहाज से देखें तो माना जाता है कि इन 48 मिनट के समय में ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर यानी कि हाईऐस्ट लेवल पर होती है. जिसमें पूजा-मंत्र जाप, तप करने से मन के विकार दूर होते हैं और सुख-शांति, समृद्धि प्राप्त होती है.
संधि पूजा में मां दुर्गा के सामने 108 दीपक जलाने और उन्हें 108 कमल के फूल, 108 बिल्वपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है. इसके अलावा देवी मां को विभिन्न फल, फूल, वस्त्र, आभूषण, सिंदूर आदि अर्पित किया जाता है. दुर्गा सप्तशती के पाठ और मंत्रोच्चार के बीच संधि पूजा संपन्न होती है.
इस साल संधि पूजा 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को है. द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी 18 अक्टूबर को सुबह 08:27 बजे से आरंभ होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होगी. इसके बाद नवमी तिथि आरंभ होगी. अष्टमी के समापन और नवमी के प्रारंभ के 48 मिनट में ही संधि पूजा होती है.
इस साल संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से लेकर 11:15 बजे तक है.
(Disclaimer: लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक पंचांग गणनाओं पर आधारित है. पूजा के मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है. सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें.)