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Radha Ashtami 2026: बढ़ गई हैं लव लाइफ की दिक्कतें तो राधाष्टमी पर करें ये उपाय, जानें राधा-कृष्ण की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Radha Ashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के 15 दिन बाद आने वाला राधाष्टमी पर्व का विशेष महत्व बताया गया है. लव लाइफ की परेशानियां दूर करने से लेकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए कौन से अचूक उपाय करें, राधा-कृष्ण की किस विधि से पूजा करें आइए जानें.

Written ByPadma Shree Shubham
Published: Sep 18, 2026, 10:05 AM IST|Updated: Sep 18, 2026, 10:17 AM IST
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Radha Ashtami 2026: बढ़ गई हैं लव लाइफ की दिक्कतें तो राधाष्टमी पर करें ये उपाय, जानें राधा-कृष्ण की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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Radha Ashtami 2026 Upay: हिंदू धर्म में राधा अष्टमी पर्व का बड़ा महत्व बताया गया है. राधा रानी के भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा भाव और आस्था के साथ व्रत का संकल्प करते हैं और पूजा उपासना करते हैं. ध्यान दें राधा अष्टमी व्रत को लेकर एक मान्यता है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत तभी पूरा होता है जब इस व्रत के 15 दिन बाद भक्त राधा रानी को समर्पित राधाष्टमी का व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता है कि कि भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि पर राधा रानी का अवतरण हुआ. ऐसे में हर साल इसी तिथि पर राधाष्टमी व्रत रखा जाता है और राधा जी की पूजा की जाती है. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि राधाष्टमी पर्व कब है और इस दिन राधा-कृष्ण की किस विधि से पूजा करें, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है. इसके साथ ही जानेंगे कि प्रेम में सफलता पाने के लिए राधाष्टमी पर्व पर कौन से उपाय करें.

राधा अष्टमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को दोपहर के 01:02 बजे होगी. 19 सितंबर 2026, शनिवार को दोपहर 03:28 बजे तिथि का समापन होगा. राधा अष्टमी का पर्व उदया तिथि मान्य होती है. ऐसे में 19 सितंबर 2026 को राधा अष्टमी का व्रत रखा जाएगा.

राधा अष्टमी 2026 के शुभ मुहूर्त

धार्मिक परंपरा है कि राधा रानी की मुख्य और पारंपरिक पूजा दोपहर के समय करना चाहिए. आइए इस दिन के शुभ मुहूर्त पर एक नजर डालें- 
शुभ चौघड़िया: सुबह 7:39 बजे से लेकर 9:11 बजे तक.
लाभ चौघड़िया: दोपहर 1:46 बजे से लेकर 3:18 बजे तक.
अमृत चौघड़िया: दोपहर 3:18 बजे से लेकर 4:50 बजे तक.
लाभ चौघड़िया: शाम 6:22 बजे से लेकर 7:50 बजे तक.

राधा अष्टमी पर कैसे करें राधा-कृष्ण की पूजा?

  • राधा अष्टमी के शुभ मौके पर सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि कर साफ कपड़ा पहनें.
  • राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और व्रत पूजा का संकल्प करें.
  • सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें और पूजा की तैयारी करें. 
  • घर के मंदिर को साफ कर गंगाजल छिड़कें.
  • इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं.
  • चौकी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा को स्थापित करें.
  • राधा-कृष्ण को चंदन, रोली, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं. 
  • धूप और दीप जलाएं और श्रद्धापूर्वक राधा रानी के मंत्र जपें.
  • फल, मिठाई और खीर का भोग चढ़ाएं. 
  • अब आरती कर पूजा को संपन्न करें

राधा अष्टमी के उपाय

 प्रेम जीवन में सफलता पाने के लिए उपाय 

लोक मान्यताओं के अनुसार प्रेम जीवन में सफलता पाने के लिए राधा अष्टमी पर एक विशेष उपाय कर सकते हैं. इस उपाय को करने के लिए भोजपत्र लें और उस पर चंदन से अपने प्रेमी या प्रेमिका का नाम लिखें. अब इसे राधा रानी के चरणों में चढ़ा दें. राधा रानी से प्रार्थना करें कि जीवन में सफल प्रेम संबंध, सुख, विश्वास और मधुरता का आशीर्वाद प्राप्त हो.

दांपत्य जीवन का तनाव होगा दूर

राधा अष्टमी पर राधा-कृष्ण के मंदिर में जाएं और केले या अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य मौसमी फलों का दान करें. ऐसा करना अति शुभ माना जाता है. अगर दांपत्य जीवन में चल रहा तनाव परेशान कर रहा है और पति-पत्नी में मतभेद बना ही रहता है तो इस उपाय को करने से शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं. राधा-कृष्ण से प्रेम, शांति और मधुरता की प्रार्थना करें.

पायल या बिछिया का उपाय

राधा अष्टमी पर मोर पंख के साथ अगर चांदी की पायल या बिछिया खरीदें और राधा रानी के चरणों से स्पर्श कराएं, इसके बाद इसे किसी  सुहागिन महिला को उपहार में दें तो सौभाग्य सुख और प्रेम पाने का आशीर्वाद प्राप्त होगा. इसे आप खुद भी धारण कर सकते हैं.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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