SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

कौन था वो राजा, जिसने खुद को बताया श्री कृष्ण? फिर जो माधव ने किया...

इस खबर में हम बताएंगे कि महाभारत काल में राजा पौंड्रक ने खुद को असली कृष्ण क्यों बताया और उन्हें युद्ध के लिए क्यों ललकारा. साथ ही जानेंगे कि इस टकराव का अंत कैसे हुआ और इस कहानी से क्या सीख मिलती है.

Written By Harsh Singh
Published: Sep 05, 2026, 04:24 PM IST | Updated: Sep 05, 2026, 05:06 PM IST
Join

मगर उसी दौर में एक राजा था, जिसे यह गुमान हो गया कि असली कृष्ण तो वो खुद है. उसने न सिर्फ कृष्ण जैसा रूप बना लिया, बल्कि उन्हें सीधे लड़ाई के लिए बुला बैठा.

आज हम जिसकी कहानी बताएंगे, उसका नाम राजा पौंड्रक है. जिसका अंत बड़ा ही दिलचस्प था.

कैसे शुरू हुआ यह पूरा भ्रम

राजा पौंड्रक के पिता का नाम भी वसुदेव था, ठीक कृष्ण के पिता की तरह. बस इतनी सी बात उसके दिमाग में घर कर गई.

उसने मान लिया कि जब नाम एक है, तो असली वासुदेव-पुत्र भी वही होगा. आसपास चापलूस दरबारियों ने आग में घी का काम किया.

वो लगातार उसे भरोसा दिलाते रहे कि श्रीकृष्ण नकली हैं, और असली रूप तो पौंड्रक का ही है. धीरे-धीरे यह गलतफहमी उसके सिर चढ़कर बोलने लगी.

हूबहू कृष्ण बनने की कोशिश

अपनी बात को सच साबित करने के लिए पौंड्रक ने कृष्ण जैसी वेशभूषा अपना ली. सिर पर मोरपंख, शरीर पर पीतांबर, और साथ में नकली सुदर्शन चक्र व कौस्तुभ मणि जैसी चीजें भी बनवा लीं.

वो अपनी प्रजा को यकीन दिलाता रहा कि असली भगवान वही है. पूरे राज्य में उसने खुद के बारे में यही प्रचार फैलाया, जिससे लोगों के बीच काफी उलझन पैदा हो गई.

कृष्ण के सामने रखी शर्त

पौंड्रक का दिमाग इस कदर खराब हो गया कि उसने सीधे श्रीकृष्ण को चुनौती भेज दी. संदेश में साफ लिखा था कि या तो कृष्ण अपनी दिव्य पहचान त्याग दें, या फिर युद्ध के मैदान में उतरें.

ये सुनकर श्रीकृष्ण को न कोई गुस्सा आया, न हैरानी हुई. उन्होंने बड़ी सहजता से इस चुनौती को कबूल कर लिया.

युद्ध के मैदान में सामने आई सच्चाई

जब लड़ाई का दिन आया, तो पौंड्रक पूरी तरह कृष्ण के भेष में मैदान में उतरा. मोरपंख और पीतांबर पहनकर उसने खुद को हूबहू भगवान जैसा दिखाने की कोशिश की.

लेकिन बाहरी रूप बदल लेना और असली शक्ति होना, दोनों अलग बातें हैं. जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, नकल और असलियत का फर्क खुलकर सामने आ गया.

सुदर्शन चक्र ने किया काम तमाम

कथाओं के मुताबिक श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से पौंड्रक का वध कर दिया. इस तरह खुद को भगवान बताने वाले शख्स की कहानी वहीं खत्म हो गई.

इसके बाद पौंड्रक के मित्र काशी नरेश ने भी बदला लेने की कोशिश की, मगर उन्हें भी हार का मुंह देखना पड़ा.

कहानी से निकलने वाली सीख

यह पूरा किस्सा घमंड और झूठी पहचान के अंजाम की मिसाल है. पौंड्रक दूसरे की नकल करते-करते अपना असली वजूद ही भूल बैठा. उसके चापलूसों ने उसे सच्चाई से दूर करने में बड़ी भूमिका निभाई.

यहां से ये सबक मिलता है कि हर इंसान को अपनी असली पहचान और खूबियों पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि दिखावे और झूठ की बुनियाद पर खड़ी शोहसरत ज्यादा दिन नहीं टिकती.

डिस्क्लेमर:

इस लेख में दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. यह जानकारी विभिन्न धर्मग्रंथों और लोक-प्रचलित कथाओं से ली गई है, इसे ऐतिहासिक तथ्य के रूप में न लें. अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस कथा के विवरण में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है. यह वेबसाइट/चैनल इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES