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अक्टूबर में गुरु और शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग, नोट कर लें महादेव की पूजा का शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat October 2026 Date: अक्टूबर 2026 में भगवान शिव की उपासना करने के लिए दो प्रदोष व्रत मिल रहे हैं. एक शुक्र प्रदोष और दूसरा गुरु प्रदोष. आइए इन दोनों ही प्रदोष व्रत की तिथि और सही प्रदोष काल जान लें.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 03, 2026, 11:29 AM IST | Updated: Oct 03, 2026, 11:34 AM IST
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Guru and Shukra Pradosh Vrat In October 2026: हिंदू पंचांग में त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस तरह हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली दोनों त्रयोदशी पर भक्त प्रदोष व्रत रखकर महादेव की उपासना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के दिन प्रदोष काल में जो भी भक्त शिव जी की पूजा करता है उसके जीवन में सुख समृद्धि आती है और इच्छाओं की पूर्ति होती है.अश्विन मास का दोनों प्रदोष व्रत अक्टूबर महीने में ही पड़ रहे हैं. इनमें पहला गुरुवार को और दूसरा शुक्रवार को पड़ रहा है. अक्टूबर महीने में पड़ने वाले इन दोनों ही प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त क्या है और इसकी सही तारीख क्या है? आइए इस बारे में जानें.

8 अक्टूबर को गुरु प्रदोष व्रत

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस साल 7 अक्टूबर 2026 को रात के 11 बजकर 16 मिनट से शुरू हो रही है और तिथि का समापन 8 अक्टूबर की रात को 11 बजकर 16 मिनट पर होगा. प्रदोष काल के अनुसार कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा मान्य होगा. गुरुवार को प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष कहा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं में गुरु प्रदोष को ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और सुखदायी माना जाता है. भगवान शिव की पूजा के साथ इस दिन बृहस्पति देव की उपासना करना शुभ होता है.

गुरु प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

23 अक्टूबर को गुरु प्रदोष व्रत

शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रदोष व्रत यानी अक्टूबर का दूसरा व्रत 23 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. 23 अक्टूबर दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से लेकर 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 36 बजे तक त्रयोदशी तिथि बनी रहेगी. इस तरह प्रदोष काल के अनुसार प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार के दिन होगा. शुक्रवार होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष कहा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने से वैवाहिक सुख, प्रेम, सौंदर्य से लेकर भौतिक सुख-सुविधाओं और समृद्धि की कामना पूर्ण होती है. भक्त अगर इस व्रत के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र व फूल चढ़ाएं तो भगवान शिव की विशेष कृपा पा सकते हैं.

शुक्र प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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