Pauranik Katha: आजीवन कुंवारी रहने का प्रण लेकर क्यों उल्टी दिशा में बहने लगी नर्मदा, इस प्रेम कथा में छिपा है इसका रहस्य!
Pauranik Katha Narmada Kunwari Kyo: नर्मदा और सोणभद्र की अधूरी प्रेम कथा में इस प्रश्न का उत्तर छिपा है कि आखिर मां नर्मदा उल्टी दिशा में क्यो बहती है. आहत होकर आजीवन कुंवारी रहने का प्रण क्यों राजकुमारी नर्मदा ने लिया. आइए इसके बारे में जानें.
भारत में नदियां केवल नदियां नहीं है बल्कि इन्हें मां का दर्जा दिया गया है जिनसे हमारी आस्था जुड़ी हुई है. कुछ पवित्र नदियों को तो मोक्षदायिनी और पापनाशिनी भी कहा गया है. इन्हीं पवित्र नदियों में से एक है नर्मदा जिसका बड़ा धार्मिक महत्व है और लोग इस नदी को मां नर्मदा कहकर पुकारते हैं. नर्मदा का प्रवाह शिव की ऊर्जा व इनकी तपस्या का प्रतीक माना गया है. नर्मदा नदी को हिंदू धर्म में जीवित देवी कहते हैं जिनकी महत्ता के बारे में स्कंद पुराण से लेकर अन्य ग्रंथों में भी बताया गया है. मां नर्मदा को कुवांरी नर्मदा भी कहा जाता है लेकिन क्यों, इसके पीछे की कहानी क्या है जिसके बारे में बहुत लोगों नहीं पता है.
कौन है नर्मदा और क्या है इसका धार्मिक महत्व
नर्मदा नदी हिंदू धर्म में एक अति पवित्र, जीवित देवी और मोक्षदायिनी के रूप में जानी जाती है जिसे 'मां नर्मदा' और 'रेवा' के नाम से भी भक्त पुकारते हैं. पौराणिक मान्यताओं और कथाओं की मानें तो मां नर्मदा के पिता राजा मैखल है. जिसके कारण नर्मदा जी को 'मेकलसुता' भी कहते हैं. वहीं धार्मिक मान्यता ये भी है कि नर्मदा नदी की उत्पत्ति भगवान शिव की तपस्या व उनके पसीने से हुई है. ऐसे में इन्हें 'शिव की पुत्री' या 'शंकरी' भी कहते हैं. स्कंद पुराण के अनुसार, नर्मदा के दर्शन से गंगा स्नान जितना पुण्य फल प्राप्त होता है. जहां गंगा-यमुना समेत कई नदियां बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती हैं यानी पश्चिम से पूर्व की ओर, वहीं नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की दिशा की ओर बहती है और समुद्र में जाकर मिलती है.
एक अधूरी प्रेम कथा और अटूट प्रण
स्कंद पुराण के अनुसार, राजा मैखल की पुत्री राजकुमारी नर्मदा जब विवाह योग्य हो गईं तो पिता मैखल ने उनके विवाह की घोषणा पूरे राज्य में कर दी. राजा ने इस घोषणा के साथ कहा कि जो भी व्यक्ति 'गुलबकावली' का फुल ले आएगा उसे से राजकुमारी नर्मदा का विवाह किया जाएगा. इस घोषणा के बाद कई राजकुमार आए लेकिन विवाह की शर्त पूरी नहीं कर पाए. तब आए राजकुमार सोनभद्र जिन्होंने गुलबकावली का फुल लाने की शर्त पूरी कर दी. इसके बाद नर्मदा और सोनभद्र का विवाह राजा ने तय कर दिया. विवाह तय किया तो राजकुमारी की इच्छा हुई कि वह सोनभद्र को एक बार देख लें. इसके लिए उन्होंने अपनी सखी जुहिला को अपना संदेश देकर राजकुमार के पास भेजा. इसके बाद राजकुमारी ने बहुत राह देखी अपनी सखी के लौट आने कि लेकिन जुहिला लौटी नहीं. फिर क्या था राजकुमारी चिंतित हुई और जुहिला को खोलने निकल पड़ीं. जुहिला को खोजते-खोजते नर्मदा जब सोनभद्र के पास पहुंची तो वहा जुहिला को उनके साथ देखा जिससे वे बहुत अधिक क्रोधिक हो गईं और वहीं पर उन्होंने आजीवन कुंवारी रहने का प्रण किया. वो इतनी क्रोधित हो गईं कि उल्टी दिशा में यानी पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लगी. आज नर्मदा अरब सागर में जाकर मिलती है लेकिन देश की अन्य सभी नदियां बंगाल की खाड़ी में मिलती है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक ग्रंथों, व्रत कथाओं, पौराणिक प्रसंगों एवं प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है. विभिन्न ग्रंथों, क्षेत्रों, परंपराओं और विद्वानों के मतानुसार कथाओं एवं उनके विवरण में अंतर संभव है. इसका उद्देश्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है.)