पापों से मुक्ति दिलाने वाली पापांकुशा एकादशी कल, व्रत नहीं रख सकते तो ये काम करके भी पा सकते हैं पुण्यफल
पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. यह व्रत हिंदू धर्म में बेहद अहम माना गया है. लेकिन किसी कारण से एकादशी व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो कुछ खास काम करके भी इसका पुण्यफल पा सकते हैं.
Papankusha Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में हर महीने पड़ने दोनों एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित हैं, इस तरह साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं. इनमें से कुछ का विशेष महत्व है. आश्विन शुक्ल एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं क्योंकि ये जाने-अनजाने में किए गए पापों को नष्ट करने वाली है और आत्मशुद्धि करने वाली है. इसके नाम का अर्थ है पापांकुशा यानी कि पापों पर अंकुश लगाने वाली. इस साल पापांकुशा एकादशी व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा. साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाएगी. लेकिन जो लोग किसी कारण से यह व्रत नहीं कर पा रहे हैं, वो विधि-विधान से पूजा करके और कुछ उपाय करके भी एकादशी व्रत का पुण्यफल पा सकते हैं.
बिना व्रत के कैसे पाएं फल?
यदि बीमारी, ट्रैवल, पीरियड या अन्य किसी आदि कारण से आप फास्ट नहीं कर पा रहे हैं तो घबराएं नहीं. संभव हो तो भगवान विष्णु की पूजा करें और कुछ उपाय कर लें.
1. एकादशी की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. फिर भगवान विष्णु की पूजा करने का भी समय न हो तो उनकी फोटो या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं. फिर भगवान विष्णु का ध्यान करें, मन को शुद्ध करें और भगवान से अच्छे विचार देने राह दिखाने की प्रार्थना करें.
2. जब भी समय मिले भगवान विष्णु के नाम का जाप करें. यदि पवित्र स्थिति में हैं तो विष्णु मंत्र का जाप करें. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है.
3. विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर भी बहुत लाभ देता है. संभव हो तो शांत और सच्चे मन से श्रीहरि का ध्यान करते हुए पाठ करूं.
4. पापांकुशा एकादशी की कथा पढ़ें. पूजा करने के साथ व्रत कथा पढ़ें.
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5. एकादशी पर गरीबों को दान दें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराएं, अनाज दें, कपड़े दें. लेकिन अपना बजट देखकर ही दूसरों से मदद करें.
6. भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी जरूर अर्पित करें. शाम को तुलसी के पास दीपक लगाएं, तुलसी की परिक्रमा करें.
7. पापांकुशा एकादशी मन और आत्मशुद्धि का व्रत है. लिहाजा ईगो, अहंकार, जलन आदि बुराइयों का त्याग करें. नकारात्मक विचारों से दूर रहें. सकारात्मक सोचें, भगवान का स्मरण करें. साथ ही सभी से अच्छा व्यवहार करें.
बता दें कि 21 अक्टूबर की दोपहर 02:12 बजे से 22 अक्टूबर की 02:48 बजे तक एकादशी तिथि रहेगी. उदयातिथि के आधार पर 22 अक्टूबर को एकादशी व्रत रखा जाएगा. वहीं व्रत का पारण 23 अक्टूबर की सुबह 05:51 बजे से 08:08 बजे तक करना उचित होगा.
(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)