मृत्यु पर भी विजय दिलाता है काशी का यह गुप्त शिव मंदिर: कूप के जल से दूर होते हैं असाध्य रोग! जानिए इस पावन धाम का रहस्य
वाराणसी के दारानगर स्थित मृत्युंजय महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत खास है. मंदिर के पुराने कुएं का पानी जमीन के अंदर बहने वाली कई अलग-अलग पानी की धाराओं से मिलकर बना है.जो बीमारियों को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है.
काशी को धर्म और मोक्ष की नगरी कहा जाता है. वैसे तो अनगिनत प्राचिन मंदिर हैं. लेकिन आज हम जिस मंदिर के बारे में आपको बताएंगे उस मंदिर काशी में अगल ही धार्मिक महत्व है.
दरअसल इस मंदिर का नाम मृत्युंजय महादेव मंदिर है. ये कालभैरव मंदिर के पास दारानगर मार्ग पर स्थित है.
कहा जाता है कि इस मंदिर में जो सच्चे मन से पूजा करता है. उसे अकाल मृत्यू का भय नहीं सताता है.
शास्त्रों और वहां के लोगों की मानें तो मंदिर में स्वयं भगवान शिव मृत्युंजय रूप में विराजमान हैं. देश में किसी को ऐसी कोई बीमारी हुई जिसको ठीक करना मुश्किल है वो लोग यहां दर्शन करने आते हैं.
दारानगर मार्ग पर स्थित मृत्युंजय महादेव का पावन धाम
वाराणसी के फेमस कालभैरव मंदिर से कुछ ही दूरी पर दारानगर जाने वाले रास्ते पर ये चमत्कारी मंदिर है. काशी की पतली गलियों के बीच बने इस मंदिर का वहां के लोगों में आध्यात्मिक प्रभाव बहुत गहरा है.
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव की पूजा करने भर से इंसान को जीवन और मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है.
जो लोग लंबे समय से किसी बीमारी या शारीरिक कष्ट से जूझ रहे होते हैं, उनके परिवार के लोग यहां आकर खास पूजा-अर्चना कराते हैं.
मंदिर का शांत और आध्यात्मिक माहौल हर श्रद्धालु को एक अलग ही शांति का अहसास कराता है.
प्राचीन कूप और जल का अनूठा चमत्कार
मृत्युंजय महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसके परिसर में बना एक बहुत ही पुराना कूप यानी कुआं है. इस कुएं को धनवंतरी कूप के नाम से भी जाना जाता है.
मान्यता है कि इस कुएं का जल कोई साधारण पानी नहीं है, बल्कि यह जमीन के नीचे बहने वाली कई अलग-अलग धाराओं का दुर्लभ संगम है.
शास्त्रों में जिक्र मिलता है कि समुद्र मंथन के समय निकले आयुर्वेद के देवता धनवंतरी की औषधियों का प्रभाव भी इस जल में समाहित है.
इसी वजह से इस कुएं के पानी को जल न मानकर औषधीय जल का दर्जा दिया जाता है.
बीमारियों को खत्म करता है य जल
कहा जाता है इस कुएं का पानी कई तरह के बीमारियों या तकलीफों को खत्म कर दिया है. वहां पूजा करने वाले लोगों का मानना है कि इस पवित्र जल का लगातार सेवन करने से पेट की बीमारियां, त्वचा रोग और कई ना ठीक किए जाने वाले रोग धीरे-धीरे ठीक होने लगते हैं.
जो लोग लंबे समय से बीमार चल रहे होते हैं, वे यहां आकर इस पावन जल को पीते हैं और अपने साथ घर भी ले जाते हैं.
आधुनिक समय में भी लोग इस जल के अनोखे औषधीय गुणों को देखकर हैरान रह जाते हैं.
अकाल मृत्यु के डर से मुक्ति दिलाता है महामृत्युंजय मंत्र
धार्मिक ग्रंथों की माने तो इस पावन मंदिर में बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए. ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि अगर कोई इंसान गंभीर बीमारी से पीड़ित है या किसी परेशानी में फंसा हुआ है, तो यहां जाप कराने से उसकी सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं.
शिवपुराण की मान्यताओं के अनुसार मृत्युंजय महादेव की शरण में आने वाले भक्त को यमराज का भय भी नहीं रहता है.
यही वजह है कि नवरात्र, सावन और महाशिवरात्रि के मौकों पर यहां तिल रखने की भी जगह नहीं होती और भक्तों की भारी भीड़ जुटती है.
काशी यात्रा के दौरान इस धाम के दर्शन क्यों हैं बेहद जरूरी?
अगर आप काशी विश्वनाथ और कालभैरव बाबा के दर्शन करने वाराणसी आ रहे हैं, तो मृत्युंजय महादेव के दर्शन के बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जाती है.
कालभैरव मंदिर से महज कुछ कदम की दूरी पर होने के कारण श्रद्धालु आसानी से यहां पहुंच सकते हैं. मंदिर में प्रवेश करते ही आपको पुरानी काशी की ऐतिहासिक और धार्मिक झलक देखने को मिलती है.
अपनी शारीरिक सेहत और मानसिक शांति के लिए इस दिव्य मंदिर में जाकर भोलेनाथ का आशीर्वाद लेना और पावन कूप का जल ग्रहण करना हर भक्त के लिए एक मंगलकारी अनुभव साबित होता है.
(Disclaimer): यह लेख पौराणिक कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय ऐतिहासिक स्रोतों में उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है.
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