SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Mahalaxmi Vrat 2026: महालक्ष्मी व्रत कब से शुरू हो रहा है, इस व्रत के दौरान कौन से काम भूलकर भी न करें?

Mahalaxmi Vrat 2026 Kab Se Hai: महालक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी को समर्पित है जो 16 दिन का होता है. इस साल यह व्रत कब से शुरू हो रहा है और इस व्रत को रखने के नियम क्या हैं? आइए इस लेख में विस्तार से जानें.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Sep 17, 2026, 10:36 AM IST | Updated: Sep 17, 2026, 12:21 PM IST
Join

Mahalaxmi Vrat 2026: हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत का बड़ा महत्व है. यह व्रत मां लक्ष्मी को समर्पित है जो 16 दिनों का होता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, इस व्रत को भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि से शुरू किया जाता है और आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक रखा जाता है. गणना में तिथियों के घटने या बढ़ने से व्रत 15 दिन या 17 दिन का भी हो सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर उनके निमित्त व्रत रखें तो ऐसे घर में दरिद्रता नहीं रहती है और आर्थिक परेशानियों का अंत होने लगता है. आइए जानें महालक्ष्मी व्रत क्यों रखा जाता है और इस व्रत को रखने के नियम क्या हैं.

कब से शुरू होगा महालक्ष्मी व्रत 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से शुरू होगी. वहीं, तिथि 19 सितंबर को दोपहर के 03 बजकर 26 मिनट पर खत्म हो जाएगी. इस तरह महालक्ष्मी व्रत 19 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चलने वाला है. इस बार महालक्ष्मी व्रत का कुल दिन 15 दिन का होगा. जरूरी नहीं कि हर दिन व्रत रखा जाए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पहले के 3 दिन या आखिरी के 3 दिन के व्रत का भी संकल्प कर सकते हैं. यह पूरी तरह व्रती की इच्छा , क्षमता और उसकी श्रद्धा भाव पर निर्भर करता है कि उसे कितने दिन का व्रत रखना है.

महालक्ष्मी व्रत के नियम

महालक्ष्मी व्रत में लगातार सोलह दिनों का व्रत रखकर देवी लक्ष्मी की पूजा सुबह के समय करने का नियम है. इस व्रत में महालक्ष्मी जी के सभी आठ स्वरूपों की उपासना करें. धार्मिक मान्यता है कि व्रती बाएं हाथ में सोलह गांठों वाली स्ट्रिंग पहनना चाहिए. पूजा होने के बाद सोलह दूर्वा घास की गांठ बनाकर पानी में डुबोएं और फिर इसे शरीर पर छिड़कें. पूजा में महालक्ष्मी व्रत कथा का जरूर पाठ करें. व्रत के आखिरी दिन कलश की पूजा करें और कलश के पानी में कुछ सिक्के डालें या उसे अक्षत से भरें. कलश पर पान या आम के पत्ते रखें और उसपर नारियल रखें. अब चंदन, हल्दी और कुमकुम कलश में लगाए.  कलश पर कोई भी नया कपड़ा बांध दें. व्रत का पारण पूजा में चढ़ाए खीर के भोग का ही सेवन करें.

महालक्ष्मी व्रत पर क्या न करें

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

और पढ़ें- Anant Chaturdashi 2026: कौन हैं अनंत भगवान, अनंत सूत्र के 14 गांठों का क्या है रहस्य?

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES