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महाभारत कथा: द्रौपदी को अपने ही पति के पुत्र पर क्‍यों आया इतना गुस्‍सा? दिया ऐसा श्राप, हो गई मृत्‍यु

महाभारत धर्म-अधर्म, पराक्रम से लेकर कई श्रापों, छल-कपट की कहानी है. आज हम एक ऐसे श्राप की बात करते हैं जो द्रौपदी ने भीम के पुत्र को दिया था. जिसके कारण उसकी मृत्‍यु हो गई थी. जानिए महाभारत की रोचक कथा.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 05, 2026, 04:31 PM IST | Updated: Oct 05, 2026, 04:36 PM IST
Image Credit: द्रौपदी के श्राप के कारण भीम का पुत्र घटोत्‍कच महाभारत युद्ध में बिना लड़े ही मारा गया था. (Photo:AI)
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महाभारत में द्रौपदी सबसे अहम किरदार में से एक है, जिसे अर्जुन ने स्‍वयंवर में जीता और फिर कुंती के आदेश पर उससे सभी 5 पांडवों की शादी हुई. लेकिन पांडवों - युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव के अलग-अलग विवाह भी हुए और संतानें भी हुईं. इन संतानों ने महाभारत युद्ध में हिस्‍सा भी लिया. जिसमें अधिकांश वीरगति को प्राप्‍त हुए. लेकिन भीम का एक पुत्र ऐसा था, जो बेहद पराक्रमी होने के बाद ही बहुत जल्‍दी मारा गया. ज‍बकि वह अकेला इतना ताकतवर था कि सारे कौरवों का अकेले सर्वनाश कर सकता है. लेकिन द्रौपदी के श्राप के कारण वह जल्‍दी ही मारा गया.

कर्ण ने किया था घटोत्‍कच का वध

भीम का पुत्र घटोत्‍कच विशालकाय शरीर वाला था और युद्ध में उसकी एंट्री कौरवों की सेना में कोहराम मचा देती है. इसलिए दुर्योधन के कहने पर कर्ण ने अपने अमोघास्त्र का प्रयोग भीम पुत्र घटोत्कच पर किया था जबकि वह इसका प्रयोग अर्जुन पर करना चाहता था.

कर्ण को यह शस्‍त्र ऐसे वरदान के साथ मिला था कि इसका वार कभी खाली नहीं जाएगा लेकिन इसका प्रयोग वह एक बार ही कर सकता था. यदि कर्ण घटोत्‍कच को नहीं मारता तो घटोत्कच अकेला ही कौरव सेना का नाश कर देता. जबकि घटोत्कच इतना वीर था कि वह किसी भी प्रकार की शक्ति से नहीं मरता लेकिन द्रौपदी के श्राप के कारण उसकी मौत हो गई.

द्रौपदी ने दिया था भीम पुत्र घटोत्कच को श्राप

द्रौपदी ने भीम के पुत्र घटोत्कच को श्राप दिया था कि उसकी आयु बहुत कम होगी. महाभारत कथा के अनुसार भीम और हिडिम्बा का पुत्र घटोत्कच जब पहली बार अपने पिता भीम के राज्य में आया तो उसने अपनी मां (हिडिम्बा) की आज्ञा के अनुसार द्रौपदी को कोई खास सम्मान नहीं दिया.

इससे द्रौपदी को अपमान महसूस हुआ और उसे बहुत गुस्सा आया. उसने नाराज होकर उसे अपमान दिया कि दुष्‍ट तेरा जीवन बहुत छोटा होगा तथा तू बिना किसी लड़ाई के ही मारा जाएगा. आखिर में ऐसा ही हुआ. कर्ण के अमोघअस्‍त्र के कारण घटोत्‍कच बिना लड़ाई के ही मारा गया.

उसी घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बना लेकिन श्रीकृष्‍ण ने उससे दान में उसका शीश मांग लिया. बाद में श्रीकृष्‍ण ने उसे वरदान दिया कि कलयुग में तुम मेरे नाम से पूजे जाओगे. वर्तमान में वे खाटू श्याम के नाम से प्रसिद्ध हैं.

(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक ग्रंथों, व्रत कथाओं, पौराणिक प्रसंगों एवं प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है. विभिन्न ग्रंथों, क्षेत्रों, परंपराओं और विद्वानों के मतानुसार कथाओं एवं उनके विवरण में अंतर संभव है. इसका उद्देश्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है.)
 

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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