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मध्य प्रदेश के खजुराहो में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी बनावट देखकर पूरी दुनिया के लोग हैरान रह जाते हैं. ये मंदिर विष्णु भगवान के तीसरे अवतार वराह यानी जंगली सूअर को समर्पित है.
खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह में बना यह छोटा सा मंदिर अपने आप में बेहद अनोखा है. यहां आने वाले लोग इसकी विशाल मूर्ति देखकर दंग रह जाते हैं. आइए इस मंदिर के बारे में डिटेल से जानते हैं.
इतिहासकारों के मुताबिक इस मंदिर को 10वीं सदी में बनवाया गया था. माना जाता है कि इसे 900 से 925 ईस्वी के बीच चंदेल वंश के राजा यशोवर्मन ने बनवाया.
चंदेल राजा विष्णु भगवान के बड़े भक्त थे. उन्होंने खजुराहो को अपनी खास जगह बनाया और यहां कई शानदार मंदिर बनवाए. वराह मंदिर भी उन्हीं में से एक बड़ी विरासत है.
इस मंदिर की सबसे खास बात है इसके अंदर रखी वराह अवतार की बड़ी मूर्ति. ये मूर्ति पत्थर के एक ही बड़े टुकड़े से बनाई गई है. इसकी लंबाई करीब 2.6 मीटर है.
मूर्ति की चमक और बनावट इतनी बढ़िया है कि देखने पर लगता है जैसे इसे अभी-अभी बनाया गया हो. इतने बड़े पत्थर पर इतनी बारीक कारीगरी करना पुराने जमाने के कलाकारों का कमाल दिखाता है.
इस बड़ी मूर्ति के पूरे शरीर पर छोटे-छोटे रूप में कई देवी-देवताओं की आकृतियां बनाई गई हैं. मूर्ति की पीठ, पेट और पैरों पर 650 से भी ज्यादा देवी-देवता, नवग्रह, गंधर्व और ऋषियों की मूर्तियां बड़ी बारीकी से बनाई गई हैं.
माना जाता है कि वराह भगवान के शरीर में पूरी दुनिया समाई हुई है, और कलाकारों ने इसी सोच को पत्थर पर बड़ी खूबसूरती से उतारा है.
इस मंदिर के पीछे एक पुरानी कहानी जुड़ी है. कहा जाता है कि हिरण्याक्ष नाम के राक्षस ने पृथ्वी को उठाकर समुद्र में गहराई में छुपा दिया था.
तब विष्णु भगवान ने वराह अवतार लेकर उस राक्षस को मार डाला और अपने दांतों पर पृथ्वी को उठाकर बाहर निकाला. मंदिर की मूर्ति में वराह भगवान के बड़े दांत के पास पृथ्वी देवी की एक छोटी मूर्ति भी बनी है, जो इसी कहानी को दिखाती है.
इस मंदिर की एक और अनोखी बात इसकी बनावट है. आम मंदिरों की तरह इसमें बड़ा शिखर या बंद दीवारें नहीं हैं. ये 14 नक्काशीदार खंभों पर टिका एक खुला हॉल जैसा है.
इतिहासकारों का मानना है कि वराह अवतार की इतनी बड़ी और बारीक मूर्ति पूरे भारत में बहुत कम जगह देखने को मिलती है. आज ये मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और हर साल लाखों देशी-विदेशी लोग यहां घूमने आते हैं.
(Disclaimer):इस लेख में दी गई जानकारी ऐतिहासिक और पुरातात्विक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय जनश्रुतियों पर आधारित है. यह सामग्री केवल पाठकों की रुचि, सामान्य ज्ञान और सांस्कृतिक जानकारी के लिए प्रस्तुत की गई है. इसका उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना या अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है.