करवा चौथ व्रत: पूजा में कितनी सींकों का होता है इस्तेमाल, और क्यों होता है जरूरी? जानें नियम
करवा चौथ की पूजा में करवा की टोंटी पर सींकें लगाने का खास महत्व है. इस खबर में इससे जुड़ी पौराणिक कथा, सींकों की सही संख्या और पूजा के जरूरी नियम के बारे में जानेंगे.
करवा चौथ का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है. ये दिन सुहागन औरतों के लिए बहुत खास माना जाता है.
इस दिन महिलाएं अपने पति के लंबे जीवन के लिए व्रत रहती हैं. उनका व्रत तभी टूटता है जब उन्होंने रात को चांद का दर्शन कर लिया हो.
इस पूजा को पूरा करने के लिए मिट्टी का करवा, छलनी, दीपक, सुहाग का सामान और पूजा की थाली की जरूरत होती है.
लेकिन आपने देखा होगा कि, करवा की टोंटी में लगाए जाने वाले सींकों का अलग ही महत्व होता है.
पूजा में सींकों का होना क्यों है बेहद जरूरी?
अगर आपके घर में करवा चौथ की पूजा हो रही हो तो छलनी और दिए के साथ-साथ सींकों को भी मंगया जाता है.
पूजा करते समय महिलाएं करवे की टोंटी पर सींकों को नियम के साथ लगाती है.
कहा जाता है कि अगर सींकों का इस्तेमाल पूजा में नहीं किया गया तो, आपकी सारी पूजा बेकार हो जाती है.
इसलिए जब भी पूजा का समान खरीदा जाता है तो सींकों खास ध्यान दिया जाता है.
करवा माता और मगरमच्छ की पौराणिक कथा
अब आप ये सोच रहे होंगे कि टोंटी पर सींकें लगाना इतना भी क्यों जरूरी है. तो इसके पीछे भी एक कहान है.
एक बार करवा माता के पति नदी में नहा रहे थे. उसी समय उनका पैर नदी में मगरमच्छ ने पकड़ लिया था.
उस समय करवा माता ने अपनी शक्ति और इन सींकों का इस्तेमाल करके उस मगरमच्छ को कसकर बांध दिया था.
फिर माता यमराज के पास पहुंच गईं. उस समय चित्रगुप्त जी सभी इंसानों के जीवन का लेखा-जोखा लिख रहे थे.
कैसे सींकों के चमत्कार से बची पति की जान?
माता ने अपने पति को बचाने के लिए अपना दिमाग लगाया. उन्होंने सींकों की मदद से उम्र और दुर्घटना वाले लाइन को बदलकर बढ़ा दिया.
माता के जुनून को देखर यमराज भी हैरान हो गए. इसके बाद नरक के राजा यमराज को भी उनके पति के प्राण को बचाना पड़ा.
उसी समय से ये माना जाता है कि, पूजा में सींकों का इस्तेमाल करने से पतियों की रक्षा होती है.
पूजा में कितनी सींकों का किया जाता है इस्तेमाल?
अब ऐसा नहीं है कि चाहे जितना भी सींक लेकर पूजा कर सकते हैं. इसका नियम एकदम पक्का होता है.
पूजा करते समय कुल 28 सींकों का इस्तेमाल किया जाता है. सींकों को 7-7 की संख्या में चार अलग अलग जगह पर रखा जाता है.
जिसमें 7 सींकें करवे की टोंटी पर लगाई जाती है. जब महिलाएं कथा सुनती हैं तब ये सींके करवे पर लगी होती हैं.
सींकों के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है पूजा?
मान्यताओं के हिसाब से व्रत को पूरा करना है तो विधि-विधान और सही नियमों के पालन से ही हो सकता है.
और बात रही सींकों की तो इसे माता के शक्ति का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इनके बिना पूजा और कथा दोनों अधूरी रह जाती है.
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(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, लोक कथाओं और मान्यताओं पर आधारित है.