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कार्तिक माह में साल की अंतिम सोमवती अमावस्या, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और करें पीपल का यह अचूक उपाय!

Kartik Amavasya 2026 Somvati Amavasya: कार्तिक माह में इस साल का अंतिम सोमवती अमावस्या का संयोग हो रहा है. आइए इस लेख में जानें कि इस तिथि पर पीपल के पेड़ से जुड़ा कौन-सा उपाय करें और इस दिन स्नान-दान करने का शुभ मुहूर्त क्या है.

कार्तिक माह में साल की अंतिम सोमवती अमावस्या, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और करें पीपल का यह अचूक उपाय!

Kartik 2026 Somvati Amavasya: इस साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर सोमवती अमावस्या का संयोग हो रहा है. हालांकि कार्तिक अमावस्या तिथि पर दिवाली का पर्व प्रदोष काल में मनाया जाता है लेकिन स्नान-दान के लिए उदया तिथि में कार्तिक अमावस्या तिथि 9 नवंबर को मान्य होगी. 9 नवंबर को सोमवार दिन है, इस तरह इस दिन सोमवती अमावस्या का संयोग हो रहा है. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि अमावस्या तिथि पर कब स्नान-दान करें और इस दिन पीपल के पेड़ से जुड़ा कौन-सा एक उपाय करें.

कार्तिक अमावस्या 2026 मुहूर्त

कार्तिक अमावस्या पर स्नान का शुभ मुहूर्त- उदया तिथि में 9 नवंबर को सुबह 04:53 बजे से 05:46 बजे तक.
अभिजीत मुहूर्त- 9 नवंबर को सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक. (इस मुहूर्त में दान कर सकते हैं.)
कार्तिक अमावस्या तिथि पर पूजा का शुभ मुहूर्त- 9 नवंबर को शाम 05:54 बजे से शाम 07:50 बजे तक.
कार्तिक अमावस्या तिथि पर प्रदोष काल- 9 नवंबर को शाम 05:31 बजे से रात 08:09 बजे तक.

सोमवती अमावस्या पर करें पीपल की परिक्रमा का उपाय

सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की परिक्रमा का एक अचूक उपाय कर सकते हैं. सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें. इसके बाद सूर्योदय होने पर सूर्य देव को अर्घ्य दें. अब जल में काले तिल और थोड़ा सा कच्चा दूध डालकर पीपल के पेड़ को चढ़ाएं. ध्यान रखें जल चढ़ाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर हो. अब हाथ में अक्षत, पुष्प और फल लें और पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करने का संकल्प लें. परिक्रमा करते हुए पेड़ में मौली या कच्चा सूत लपेटते जाएं. 7 या 21 की संख्या में भी परिक्रमा करने का संकल्प कर सकते हैं. इस उपाय को करने के बाद जरूरतमंदों में दान करें और ब्राह्मण को दक्षिणा दें. सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने से व्यवसाय में उन्नति होती है और भगवान शिव व श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है. पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है.

(Disclaimer- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक जानकारी और इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है. पूजा-विधि अपनाने से पहले किसी विद्वान से सलाह अवश्य लें.)

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About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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